एडीआर ने 2022-23 के बीच पार्टियों को मिले चुनावी चंदे पर एक रिपोर्ट जारी की है। इस बार भी बीजेपी अव्वल रही है। वहीं, बीआरएस चुनावी चंदा मिलने वाले दलों में दूसरे नंबर पर है।
मौजूदा 4001 विधायकों की कुल संपत्ति 54,545 करोड़ रुपये है। यह राशि तीन राज्यों नगालैंड, मिजोरम और सिक्किम के वर्ष 2023-24 के संयुक्त सालाना बजट 49,103 करोड़ रुपये से भी ज्यादा ही है।
डीएमके ने 431.50 करोड़ रुपये (कुल दान का 90.703%) चुनावी बांड से हासिल किया। इसके बाद टीआरएस ने 383.6529 करोड़ रुपये (80.45%) और वाईएसआर-सी ने 330.44 करोड़ रुपये (72.43%) चुनावी बांड से घोषित किए।
बीजेपी ने 2021-22 के दौरान 1917.12 करोड़ रुपये की आय घोषित की है, जिसमें से 854.467 करोड़ रुपये खर्च हुआ है। कांग्रेस की आय 541.275 करोड़ रुपये रही, जबकि 400.414 करोड़ रुपये खर्च हुए।
एडीआर द्वारा मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ। पिछले वित्त वर्ष के लिए राष्ट्रीय दलों द्वारा घोषित 20,000 रुपये से ऊपर का कुल चंदा 780.77 करोड़ रुपये था। यह चंदा 7,141 दान से मिला था।
राष्ट्रीय दलों ने 2004-05 और 2020-21 के बीच अज्ञात स्रोतों से 15,077.97 करोड़ रुपये से अधिक जमा किए। अज्ञात स्रोतों से पैसा कमाने में कांग्रेस पार्टी सबसे आगे है।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्रीय दलों को मिले चंदे में सबसे ज्यादा पैसा जेडीयू को मिला है। इसके बाद तमिलनाडु की द्रमुका और केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी शामिल है।
कोरोना काल की शुरुआत में राजनीति दलों को मिलने वाले चंदे में बढ़ोतरी दर्ज हुई थी लेकिन उसके बाद चंदे में धीरे-धीरे गिरावट देखने को मिली है। एडीआर ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की है।
एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की एक रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में करीब 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का विधायक फंड इस्तेमाल ही नहीं किया गया। गुजरात में इस साल के अंत में चुनाव होना है।
हाल की में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव जीतने वाले 45 फीसदी उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज है। चुनाव अधिकार संगठन 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' (ADR) ने...