दिल्ली वाले अध्यादेश पर गुरुवार से 'सुप्रीम' सुनवाई, संवैधानिक बेंच को भेजने की तैयारी
दिल्ली में अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग को लेकर आए केंद्र सरकार के अध्यादेश पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच में सोमवार को पेश किया गया।

दिल्ली में अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग को लेकर आए केंद्र सरकार के अध्यादेश पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच में सोमवार को पेश किया गया। अदालत ने कहा कि हम इस मामले को 5 जजों की संवैधानिक बेंच में भेज सकते हैं, जो इस पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे संशोधन के मामले संविधान बेंच को दिए जाने चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा कि केंद्र सरकार ने आर्टिकल 293AA(7) का इस्तेमाल करते हुए संविधान में संशोधन किया है। इससे दिल्ली सरकार के नियंत्रण सेवाओं को वापस लिया जाएगा। क्या इसकी अनुमति है? मैं मानता हूं कि संवैधानिक बेंच को इस मामले पर विचार करना चाहिए।
अदालत को जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला संसद में जाएगा। मॉनसून सेशन में इसे पेश किया जाना है। इसलिए फिलहाल इस मामले पर सुनवाई को टाल देना चाहिए। वहीं दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जब सारी बातें साफ ही हैं तो इसे संवैधानिक बेंच में भेजने का कोई मतलब नहीं है। चीफ जस्टिस ने कहा, 'मसला यह है कि संसद के पास अधिकार है कि वह केंद्र सूची के मसलों पर कानून बना सकेगी। तीसरी समवर्ती सूची है। यह समझना होगा कि इसे लेकर केंद्र सरकार की ओर से संशोधन किया जा सकता है या नहीं।'
दरअसल दिल्ली अध्यादेश का मामला राजनीतिक रंग ले रहा है। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि वह इस बिल को इसी मॉनसून सेशन में लाने जा रही है। इस बीच आम आदमी पार्टी राजनीतिक रूप से इसके खिलाफ माहौल बना रही है। आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में इसके विरोध के लिए कांग्रेस समेत कई दलों से समर्थन मांगा है। रविवार को ही कांग्रेस ने इस मामले में आम आदमी पार्टी के समर्थन का ऐलान किया है। इससे पहले शरद पवार, नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं से अरविंद केजरीवाल ने मुलाकात की है और विपक्षी एकता की दुहाई देते हुए समर्थन मांगा है।