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अब भाजपा पर भड़का अजित पवार गुट, टारगेट न करें वरना अलग रास्ता अपना लेंगे

एनसीपी ने भी खुलकर पलटवार किया है। इसके साथ ही एनसीपी ने चेतावनी भी दी है कि यदि हमें इसी तरह टारगेट किया जाता रहा तो फिर हम गठबंधन पर अलग स्टैंड भी ले सकते हैं। ऐसा एनसीपी ने पहली बार कहा है।

Surya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, मुंबईWed, 19 June 2024 09:54 AM
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अब भाजपा पर भड़का अजित पवार गुट, टारगेट न करें वरना अलग रास्ता अपना लेंगे

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों में भाजपा समेत एनडीए को महाराष्ट्र में झटका लगा है। इसे लेकर भाजपा और संघ के कई लोगों ने अजित पवार की एनसीपी के साथ गठजोड़ को जिम्मेदार ठहराया था। अब इस पर एनसीपी ने भी खुलकर पलटवार किया है। इसके साथ ही एनसीपी ने चेतावनी भी दी है कि यदि हमें इसी तरह टारगेट किया जाता रहा तो फिर हम गठबंधन पर अलग स्टैंड भी ले सकते हैं। एनसीपी नेता अमोल मितकारी ने कहा, 'हमें पता चला है कि भाजपा के विधायक हार के लिए अजित पवार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। मैं ऐसे लोगों को बता देना चाहता हूं कि यदि इसी तरह लगातार अजित पवार का निशाना बनाया जाता रहा तो फिर हमें अलग स्टैंड लेने पर विचार करना पड़ सकता है।'

दरअसल खबरें थीं कि भाजपा विधायकों ने नतीजों की समीक्षा के लिए बुलाई मीटिंग में अजित पवार गुट के साथ गठजोड़ को खराब नतीजों के लिए जिम्मेदार बताया था। इसी को लेकर अब एनसीपी के नेता भड़के हुए हैं। एनसीपी के कुछ नेताओं ने तो हार के लिए भाजपा को ही निशाने पर लिया है। एक नेता ने कहा कि संघ के साथ क्या हुआ, यह उनका अपना मसला है। अजित पवार की वजह से भाजपा को कोई नुकसान नहीं हुआ। ऐसा हो सकता है कि भाजपा के खिलाफ लोगों के गुस्से ने हमें नुकसान पहुंचाया हो। भाजपा के नेता लगातार 400 पार और संविधान बदलने की बात कर रहे थे। शायद इसी का नुकसान हुआ है।

एनसीपी नेता ने कहा कि अजित पवार की ओबीसी समुदाय के बीच बड़ी पैठ है। ऐसे में एनसीपी ने बड़ी कोशिश की थी कि डैमेज कंट्रोल कर लिया जाए, लेकिन भाजपा के कुछ नेता ऐसे हैं, जो मन में आता है वही बोलते हैं। ऐसे नेताों के चलते भी नुकसान हुआ है। एनसीपी ने कहा कि हम ही नहीं बल्कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना भी मानती है कि भाजपा नेताओं के बड़बोलेपन और 400 पार के नारे की वजह से ऐसे नतीजे आए हैं। वहीं एनसीपी के नेता सुनील तटकरे ने कहा कि गठबंधन में सब सही है। हमने भाजपा के सीनियर नेताओं से बात की है, जिन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही।

RSS की पत्रिका में लेख छपने से बढ़ा मामला

बता दें कि यह मसला आरएसएस से जुड़ी ऑर्गनाइजर पत्रिका में छपे एक लेख से उठा था। रतन शारदा की ओर से लिखे इस आर्टिकल में महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ गठजोड़ को हार की वजह बताया गया था। इसके बाद फिर भाजपा की समीक्षा बैठक में विधायकों की ओर से भी ऐसी ही राय रखी गई। हालांकि अब तक महाराष्ट्र भाजपा के किसी सीनियर नेता या फिर केंद्र में किसी लीडर ने इस पर कुछ नहीं कहा है।