Baby Food: बच्चे को कैसे शुरू करें सॉलिड फूड खिलाना, ये बातें जानना है जरूरी
Solid Food For Baby: बच्चे को दूध के साथ ही सॉलिड फूड खिलाना शुरू कर रही हैं तो इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जिससे बच्चे को बिना तकलीफ के सही न्यूट्रिशन आसानी से मिल सके।

बच्चे जैसे ही 6 महीने के होने लगते हैं। उन्हें ब्रेस्ट मिल्क के अलावा अनाज और सॉलिड फूड खिलाने की कोशिश की जाती है। कई बार मांओं को सॉलिड फूड खिलाने का सही तरीका नहीं पता होता। जिसकी वजह से उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं बच्चे को सही समय पर सारे न्यूट्रिशन ना मिलने की वजह से वो अंडर ग्रोथ भी हो सकता है। इसलिए जानना जरूरी है कि बच्चे को किस तरह से सॉलिड फूड खिलाना शुरू किया जाए
कब दें बच्चे को सॉलिड फूड
-सबसे पहले जानना जरूरी है कि बच्चे को कब से सॉलिड फूड देना शुरू करना चाहिए। बच्चा केवल 6 महीने का हो गया इसके अलावा भी कुछ पहचान हैं। जो बता सकती हैं कि बच्चे को सॉलिड फूड देना शुरू कर देना चाहिए।
-बच्चा अपना सिर टिका लेता हो और बैठने लगा हो। हल्का सहारा लेकर भी बैठ रहा है तो बच्चे को सॉलिड फूड खिलाया जा सकता है।
-बच्चा जब खुद से खाने की तरफ आकर्षित हो और मुंह खोले। तब समझ जाएं कि बच्चे को खाने की इच्छा हो रही है।
-बच्चा मुंह में खिलौने, हाथ वगैरह डालने लगा है तो इसका मतलब कि बच्चा खाने के लिए रेडी है।
कैसे शुरू करें बच्चे को सॉलिड फूड देना
-बच्चे को सॉलिड फूड से पहले उसे टेस्ट का परिचय कराना जरूरी है। अगर आपका बच्चा मुंह में चीजें डालता है, तो उसे सेब का टुकड़ा, खीरे का टुकड़ा दे सकते हैं। जिसे वो हल्के-हल्के दबाएगा और उसे नया टेस्ट मिलेगा।
-इसके अलावा बच्चे को एक बार में एक ही फूड खिलाएं। दूसरे फूड को देने में कम से कम एक हफ्ते का अंतराल रखें। जिससे बच्चे को फूड से होने वाली एलर्जी का पता चल सके। डायरिया, रैशेज, उल्टी बच्चे को ऐसे किसी भी लक्षण के होने पर फौरन उस फूड को बंद कर दें।
आयरन और जिंक है जरूरी
बच्चे के छह महीने पूरे होने के बाद उसके शरीर में कुछ जरूरी न्यूट्रिशन की पहुंच जरूरी है। जो कि दूध में कम या बिल्कुल ना के बराबर होती है। जिंक और आयरन अनाज और आयरन फोर्टिफाइड सीरियल्स में होते हैं। इन फूड्स को बच्चे को खिलाना शुरू करें।
बोतल से ना दें
बच्चे को जब भी सेमी लिक्विड फूड खिलाएं तो इसे बोतल में भरकर ना दें। खिलाने के लिए हमेशा चम्मच का सहारा लें और बच्चे को हल्का सा सहारा देकर बैठाएं और खिलाएं। इससे बच्चे खाना सीखते हैं। धीरे-धीरे लिक्विड की मात्रा कम कर फूड को ठोस बनाएं और खिलाए।
सब्जी और फल भी खिलाएं
अनाज के साथ ही बच्चे को सेब और दूसरे फल भी खिलाना शुरू करें। 8-10 महीने के बच्चे छोटे टुकड़ों में कटे मुलायम फल और अच्छी तरह से पकी सब्जियों, मीट को खाने लगते हैं। उन्हें धीरे-धीरे सारे फल और सब्जियों का टेस्ट दिलाएं और खाने की प्रैक्टिस करवाएं।
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