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रेसिप्रोकल टैक्स पर टीम ट्रंप क्यों दो फाड़, कौन हैं वो 'टैरिफ मैन' जिन पर साथी ही ठीकरा फोड़ने को तैयार

आर्थिक विश्लेषकों की चिंता के बावजूद ल्युटनिक का मानना है कि रेसिप्रोकल टैरिफ अमेरिका के लिए फायदेमंद है। उनका मानना ​​है कि इससे अमेरिकी बजट संतुलित होगा और घाटा कम होगा।

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, वॉशिंगटनWed, 2 April 2025 05:27 PM
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रेसिप्रोकल टैक्स पर टीम ट्रंप क्यों दो फाड़, कौन हैं वो 'टैरिफ मैन' जिन पर साथी ही ठीकरा फोड़ने को तैयार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल से दुनियाभर के कई देशों पर रेसिप्रोकल टैक्स लगाने का ऐलान किया है। इस दिन को मुक्ति दिवस (लिबरेशन डे) के रूप में भी प्रचारित किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि अब जवाबी शुल्क लगाकर अमेरिका व्यापार और कराधान के मामले में मुक्त हो जाएगा। ट्रंप प्रशासन को उम्मीद है कि ऐसा टैरिफ लगा कर अमेरिका अपने व्यापार घाटा को कम कर सकेगा। हालांकि, उन्हीं की सरकार में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें इस बात का संशय है कि यह कदम कहीं उलटा दांव साबित न हो जाए। ये लोग ट्रंप सरकार के ही एक मंत्री पर अपनी खीझ निकाल रहे हैं।

दरअसल, अमेरिका के वाणिज्य सचिव यानी कॉमर्स मिनिस्टर को विवादास्पद 'लिबरेशन डे' टैरिफ का वास्तुकार और उस टैरिफ का मुखर वक्ता कहा जा रहा है। उन्होंने ही राष्ट्रपति ट्रंप के सामने ऐसा प्रस्ताव दिया और इन उपायों को अमेरिकी बजट को संतुलित करने और व्यापार घाटे को कम करने के लिए जरूरी बताया है। टीम ट्रंप के कुछ लोग उन्हें जहां इस मामले में एक प्रमुख रणनीतिकार मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग उन्हें एक चिंता के रूप में देखने लगे हैं। खासकर तब जब आर्थिक चिंताएं बढ़ रही हैं और वैश्विक व्यापार युद्ध बढ़ रहा है। इन लोगों को डर सता रहा है कि कहीं ट्र्ंप के टैरिफ मैन की रणनीति सब गुड़-गोबर न कर दे।

कौन हैं वो टैरिफ मैन?

अमेरिकी राष्ट्रपति को रेसिप्रोकल टैरिफ लगाकर व्यापार घाटा पाटने का सुझाव देने वाले उनके वाणिज्य सचिव हॉवर्ड ल्युटनिक हैं, जिन्हें टैरिफ मैन कहा जा रहा है। वह एक अमेरिकी व्यवसायी और वित्तीय सेवा कंपनी कैंटर फिट्ज़गेराल्ड के सीईओ रहे हैं और इजरायली मुद्दों के लिए बड़े दानदाता रहे हैं। अब डोनाल्ड ट्रम्प के अधीन संयुक्त राज्य अमेरिका के वाणिज्य सचिव हैं, जो ट्रंप प्रशासन की आक्रामक टैरिफ नीतियों का चेहरा बने हुए हैं।

आर्थिक विश्लेषकों की चिंता के बावजूद ल्युटनिक का मानना है कि रेसिप्रोकल टैरिफ अमेरिका के लिए फायदेमंद है। उनका मानना ​​है कि इससे अमेरिकी बजट संतुलित होगा और घाटा कम होगा। उन्होंने तर्क दिया है कि इससे सरकार के लिए राजस्व उत्पन्न होगा। हालांकि यह राजस्व अंततः टैरिफ का भुगतान करने वाले अमेरिकी व्यवसायों और उच्च लागत को वहन करने वाले उपभोक्ताओं से ही आएगा।

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साथी क्यों ठीकरा फोड़ने को तैयार

बहरहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के "लिबरेशन डे" टैरिफ का अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा लेकिन अगर उम्मीद के विपरीत चीजें बिगड़ती हैं और वैश्विक व्यापार युद्ध गहराता है या अमेरिकी नागरिकों पर वित्तीय बोझ बढ़ता तो ट्रंप प्रशासन के सदस्य कथित तौर पर वाणिज्य सचिव हॉवर्ड ल्युटनिक के सिर ठीकरा फोड़ने के लिए तैयार हैं। पोलिटिको की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन के एक करीबी व्यक्ति ने बताया कि कथित तौर पर ल्युटनिक ने ही "अधिक आक्रामक टैरिफ" के लिए प्रेसिडेंट पर दबाव डाला है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापार सलाहकार पीटर नवारे लंबे समय से टैरिफ के समर्थक के रूप में जाने जाते रहे हैं लेकिन ल्युटनिक टैरिफ के नए वकील और आक्रामक आवाज बनकर उभरे हैं, जो आक्रामक नीतियों को लागू करवा रहे हैं। इसी वजह से ट्रंप प्रशासन के अंदर खींचतान और तनाव पैदा हो गया है। ट्रंप प्रशासन के ही कई साथी आर्थिक और व्यापारिक मोर्चे पर अनिश्चितता बढ़ने की बात कबूल कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई साथी ल्युटनिक के सख्त कदम से काफी नाराज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ल्युटनिक पर व्हाइट हाउस के अधिकारियों की भी भौहें तनी हुई हैं।

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