अंतरिक्ष में कब तक जिंदा रह सकते हैं हम? सुनीता विलियम्स पर टेंशन बढ़ी, क्या कहता है साइंस
- Sunita Williams: अंतरिक्ष में सुनीता विलियम्स को जितने दिन लगातार बीत रहे हैं, लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। अंतरिक्ष में हम कब तक जिंदा रह सकते हैं? इस पर साइंस क्या कहता है…
Sunita Williams: भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर पिछले सात महीने से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में फंसे हुए हैं। आठ दिनों के लिए अंतरिक्ष गए सुनीता विलिसम्य समेत दो एस्ट्रोनॉट्स की पहले वापसी अगले साल फरवरी तक के लिए टल गई थी, लेकिन अब उनकी वापसी पर नासा ने हाल ही में बताया कि अंतरिक्ष यात्री मार्च या अप्रैल महीने के बीच धरती पर लौट सकते हैं। अंतरिक्ष में सुनीता विलियम्स को जितने दिन लगातार बीत रहे हैं, लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। पिछले दिनों उनकी तस्वीरें भी सामने आईं। सुनीता काफी कमजोर हो गई हैं। हालांकि स्पेस स्टेशन में तमाम सुख-सुविधाओं के बावजूद यात्रियों के लिए अंतरिक्ष में रहना बेहद मुश्किल होता है। इस लेख में हम जानेंगे कि अंतरिक्ष में हम कब तक जिंदा रह सकते हैं? इस पर साइंस क्या कहता है...
आपने यह तो सोचा होगा कि अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्री होना कैसा होता है, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आप अंतरिक्ष में कितने समय तक रह सकते हैं? बुच विल्मोर और सुनी विलियम्स के शुरू में आई.एस.एस. पर सात दिनों तक रुकने की उम्मीद थी, लेकिन उनकी वापसी में कई बार देरी हो रही है। नासा यह निर्णय लेने से पहले कि उन्हें वापस लाना सुरक्षित होगा, कई परीक्षण कर रहा है, इसलिए अभी यह अज्ञात है कि वे वहां कितने समय तक रहेंगे।
गुरुत्वार्षण सबसे बड़ी समस्या
अंतरिक्ष यात्रा मानव शरीर के लगभग हर हिस्से को प्रभावित करती है और इसका मुख्य कारण गुरुत्वाकर्षण है। पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण ही आपको ज़मीन पर रखता है और चीज़ों को नीचे गिराता है। स्पेस में अंतरिक्ष यात्री धरती पर रहने वाले लोगों की तरह ज़मीन पर नहीं चलते। वे अपने अंतरिक्ष यान के अंदर तैरते रहते हैं। ऐसा चंद्रमा की तरह गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण नहीं है, बल्कि इसलिए है क्योंकि आई.एस.एस. मुक्त रूप से पृथ्वी की ओर गिर रहा है और लगभग उसी गति से पृथ्वी के चारों ओर आगे की ओर बढ़ रहा है, जिसका अर्थ है कि स्टेशन के अंदर अंतरिक्ष यात्री तैर रहे हैं। इसका मजेदार और सकारात्मक अर्थ यह भी है कि अंतरिक्ष यात्री उन वस्तुओं को भी आसानी से ले जाने में सक्षम हैं, जिन्हें हम सामान्यतः बहुत भारी मानते हैं या उठा नहीं सकते।
आंखों की रोशनी, मांसपेशियां और हड्डियों पर बुरा प्रभाव
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेस स्टेशन में किसी यात्री के लंबे समय तक रहने का एक और बड़ा नकारात्मक प्रभाव यह है कि उनकी मांसपेशियों को चीजों को हिलाने या उठाने के लिए बहुत कम काम करना पड़ता है। यूके अंतरिक्ष एजेंसी का कहना है कि ऐसा होना इंसान के लिए बहुत बुरा साबित हो सकता है। लगभग पांच महीने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों की मांसपेशियों का 40% और हड्डियों का 12% हिस्सा खत्म हो सकता है। कनाडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि केवल दो सप्ताह के बाद हमारी मांसपेशियों का द्रव्यमान 20% तक कम हो सकता है। हमारी देखने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। कम गुरुत्वाकर्षण के साथ उच्च दबाव के कारण अंतरिक्ष यात्री जब धरती पर वापस लौटते हैं तो उनके देखने की क्षमता भी पहले की तुलना में कम हो जाती है।
अंतरिक्ष में कौन सबसे लंबे समय तक रहा
बता दें कि अंतरिक्ष में पिछले वर्ष फ्रैंक रुबियो ने अंतरिक्ष में सबसे लम्बे समय तक रहने का अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री का रिकार्ड तोड़ दिया था। वह 371 दिनों तक स्पेस स्टेशन में रहे, लेकिन फिर भी वह सर्वकालिक रिकॉर्ड से काफी दूर रहे। रूसी अंतरिक्ष यात्री वालेरी पोल्याकोव के नाम एक बार में अंतरिक्ष में सबसे अधिक दिन बिताने का रिकार्ड है। वह 1994 और 1995 के बीच 437 दिनों तक रूस के मीर अंतरिक्ष स्टेशन पर रहे।
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