भारत को बताकर विद्रोहियों को निपटा रहा US, 'चीन का नाम' लेने को मजबूर जहाज; लाल सागर में मची खलबली
अमेरिका और ब्रिटेन के निशाने पर मुख्य रूप से लॉजिस्टिक सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, हथियारों का भंडार और लॉन्च करने की फैसिलिटी थीं। ऐसा माना जा रहा है कि इस हमले से पहले अमेरिका ने भारत को भी लिया था।

और ब्रिटिश सेना ने गुरुवार को यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ बम और मिसाइलें बरसाईं हैं। दोनों देशों ने एक दर्जन से अधिक स्थानों को निशाना बनाकर बम बरसाए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस ऑपरेशन में युद्धपोतों और पनडुब्बियों के साथ-साथ लड़ाकू जेट विमानों से टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। अमेरिका और ब्रिटेन के निशाने पर मुख्य रूप से लॉजिस्टिक सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, हथियारों का भंडार और लॉन्च करने की फैसिलिटी थीं। ऐसा माना जा रहा है कि इस हमले से पहले अमेरिका ने भारत को भी लिया था।
अमेरिका ने भारत को लिया साथ
दरअसल अमेरिका ने लाल सागर में हुती विद्रोहियों के हमलों को लेकर भारत के साथ ‘‘साझा चिंताओं’’ पर चर्चा की और क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा में दोनों देशों के बीच ‘‘बढ़ते सहयोग’’ का स्वागत किया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बृहस्पतिवार को फोन पर बातचीत की और दक्षिणी लाल सागर और अदन की खाड़ी में हुती के हमलों को लेकर अमेरिका तथा भारत की साझा चिंताओं पर चर्चा की। इन हमलों ने कॉमर्शियल जहाजों की आवाजाही और निर्दोष नौसैनिकों की जान खतरे में डाल दी है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है। विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने एक बयान में कहा कि ब्लिंकन ने कहा कि लाल सागर एक प्रमुख वाणिज्यिक गलियारा है जहां से अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है और उन्होंने ‘‘क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने में भारत के साथ बढ़ते सहयोग का स्वागत किया।’’
जयशंकर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने ‘‘अपने मित्र’’ ब्लिंकन से ‘‘अच्छी बातचीत’’ की। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी बातचीत में समुद्री सुरक्षा चुनौतियों, विशेष रूप से लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। गाजा समेत पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात पर उनके दृष्टिकोण को सराहा।’’ मिलर ने ‘एक्स’ पर कहा कि ब्लिंकन ने जयशंकर के साथ ‘‘सार्थक बातचीत की और अहम समुद्री क्षेत्रों में नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए अमेरिका-भारत साझेदारी पर चर्चा की।’’
'चीन का नाम' लेने को मजबूर जहाज
लाल सागर के पार मालवाहक जहाजों पर हूती विद्रोहियों के हमलों में वृद्धि हुई है। इस बीच, कई जहाजों ने इन विद्रोहियों द्वारा हाइजैक किए जाने से बचने के लिए चीन के नाम वाली रणनीति आई है। कई जहाज अब अपने सिग्नल का इस्तेमाल यह संकेत देने के लिए कर रहे हैं कि उनके चीन से संबंध हैं। लाल सागर में हूती उग्रवादियों के हमले से बचने के ताजा कदम थोड़े अजीब हैं लेकिन जानमाल की सुरक्षा के लिए उन्हें ये उपाय करने पड़ रहे हैं। ये जहाज अपनी 'डेस्टिनेशन' की जगह ये सिग्नल दे रहे हैं कि उनके 'क्रू मेंबर के सभी सदस्य चीनी' हैं। इस वक्त लाल सागर में कम से कम पांच जहाज ऐसे हैं जो इस तरह की रणनीति अपना रहे हैं। इनमें से दो जहाज वर्तमान में लाल सागर में हैं, जबकि दो अन्य ने जोखिम भरे जलमार्ग को पार कर लिया है और अब एशिया की ओर जा रहे हैं। पांचवां जहाज अदन की खाड़ी की ओर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
इजरायल के चलते लाल सागर में मची खलबली
हूती विद्रोहियों का कहना है कि वे केवल इजरायल से संबंध रखने वाले कॉमर्शियल जहाजों को निशाना कर रहे हैं, लेकिन बिना किसी इजरायली लिंक वाले कई जहाजों पर भी हमला किया गया है। इन हमलों के परिणामस्वरूप वैश्विक निर्यात में कमी और पश्चिम में तेल की कीमतों में उछाल के रूप में देखी जा रही है। 2021 में एक विशाल कंटेनर जहाज द्वारा जलमार्ग ब्लॉक किए जाने के बाद से स्वेज नहर पर आवाजाही सबसे निचले स्तर पर गिर गई है, क्योंकि कई जहाज लाल सागर से बचने का विकल्प चुन रहे हैं और इसके बजाय अपना माल पहुंचाने के लिए अफ्रीका के चारों ओर हजारों मील की दूरी तय कर रहे हैं। लाल सागर और भूमध्य सागर को हिंद महासागर से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति यमन स्थित हूती आतंकवादियों के हमलों के कारण बिगड़ गई है। इन हमलों के कारण, जहाज रास्ता बदलकर ‘केप ऑफ गुड होप’ के माध्यम से आवाजाही कर रहे हैं। इससे लगभग 20 दिनों की देर हो रही है और माल ढुलाई एवं बीमा लागत भी बढ़ रही है।
क्यों ले रहे हैं चीन का नाम?
पांच जहाजों की डेस्टिनेशन से पता चलता है कि वे हूती विद्रोहियों के हमलों से बचने के लिए ऐसे कदम उठा रहे हैं। जहाजों के चालक दल या उनकी मालिक कंपनियों का मानना है कि एशियाई देश चीन से संबद्ध होने से हमले को रोकने में मदद मिल सकती है। जहाज की डेस्टिनेशन आमतौर पर चालक दल द्वारा मैन्युअल रूप से एंटर की जाती है और फिर इंटरनेट पर लगभग किसी को भी ये दिखाई देती है। दरअसल चीन के ईरान से अच्छे संबंध हैं। ईरान इन हूती विद्रोहियों का खुला समर्थक है। इजरायल के खिलाफ अपने अभियान को तेज करते हुए ईरान हूती विद्रोहियों को पूरी मदद कर रहा है। हालांकि चीन से लिंक बताने पर जहाजों को हमलों से बचने में मदद मिल रही है।
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