एक झटके में पाकिस्तान को महा भिखारी बना सकता है ईरान, लटकी है 18 अरब डॉलर की तलवार
ईरान लगातार पाकिस्तान पर इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए दबाव डाल रहा है। उसने कई बार पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी लेकिन ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे पड़ोसी देश को मुश्किलें हों।

Iran Pakistan Latest News: ईरान और पाकिस्तान में जंग ठनी है। पहले ईरान ने पाकिस्तान में बम बरसाए। इसके बाद पाकिस्तान ने ईरान के अंदर घुसकर हमले किए। दोनों ही हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। हालांकि भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान के लिए जवाबी हमलों से नई मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। दरअसल इन ताजा झड़पों से पहले पाकिस्तान और ईरान में गैस पाइपलाइन को लेकर ऐतिहासिक समझौता हुआ था। एक दशक से भी ज्यादा समय पहले हुआ ये समझौता अभी भी अधर में लटका हुआ है। इसकी मुख्य वजह कंगाल हो चुका पाकिस्तान है। ईरान लगातार पाकिस्तान पर इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए दबाव डाल रहा है। उसने कई बार पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी लेकिन ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे पड़ोसी देश को मुश्किलें हों।
पाकिस्तान कर्ज के महाजाल में डूब सकता
अब ऐसे हालात बन रहे हैं कि पाकिस्तान कर्ज के महाजाल में डूब सकता है। खुद पाकिस्तान तो इस बात का अंदाजा है। पिछले साल मई में पाकिस्तान की लोक लेखा समिति ने चिंता जताई थी कि पाकिस्तान को भारी जुर्माना देना पड़ सकता है। समिति ने कहा था कि पाकिस्तान अगर ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन परियोजना को आगे नहीं बढ़ाता है तो उसे जुर्माने के रूप में 18 अरब डॉलर की भारी राशि का भुगतान करना होगा।
पाकिस्तान और ईरान ने 4 सितंबर 2012 को घोषणा करते हुए कहा था कि गैस पाइपलाइन परियोजना अक्टूबर 2012 से पहले शुरू होगी और दिसंबर 2014 तक पूरी की जाएगी। लेकिन अभी तक ये अधर में लटकी हुई है। ईरान ने इस बीच पाकिस्तान के कई बार नोटिस जारी भेजा है और 18 अरब डॉलर के जुर्माने की चेतावनी दी है। पिछले साल ईरान ने पाकिस्तान को धमकी दी थी कि अगर 'आईपी गैस लाइन परियोजना' के हिस्से के रूप में उसने पाइपलाइन नहीं बिछाई तो वह मध्यस्थता अदालत का रुख करेगा। ये पाकिस्तान को जारी ईरान का तीसरा नोटिस था।
18 अरब डॉलर का जुर्माना देने के लिए तैयार रहे
ईरान ने इससे पहले 2022 में नवंबर-दिसंबर में अपना दूसरा नोटिस जारी किया था। इसमें कहा गया कि पाकिस्तान फरवरी-मार्च 2024 तक अपने क्षेत्र में ईरान-पाकिस्तान गैस लाइन परियोजना के एक हिस्से का निर्माण करे या फिर 18 अरब डॉलर का जुर्माना देने के लिए तैयार रहे। इससे पहले, ईरान ने आईपी गैस लाइन परियोजना के तहत निर्धारित समय के भीतर पाकिस्तान के क्षेत्र में पाइपलाइन नहीं बिछाने के लिए मध्यस्थता अदालत में जाने के लिए फरवरी 2019 में इस्लामाबाद को एक नोटिस भेजा था। इसने गैस बिक्री खरीद समझौते (जीएसपीए) के तहत आने वाले जुर्माने को लागू करने की धमकी दी थी।
पाकिस्तान के मुकाबले ईरान एक अमीर देश है जिसके पास कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार है। पाकिस्तान पहले से ही महंगे तेल और गैस के झंझट से जूझ रहा है। ऐसे में उसने ईरान से सस्ती गैस के वास्ते ये समझौता किया था। लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया जा सका क्योंकि पाकिस्तान पहले से ही विदेशी कर्ज के जाल में गले तक डूबा हुआ है।
अमेरिका पर दोष मढ़ रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान यह तर्क देता रहा है कि ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वह अपने क्षेत्र में इस परियोजना को अमलीजामा नहीं पहना पा रहा है। हालांकि ईरान के अधिकारियों इस तर्क से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंध उचित नहीं हैं। इराक और तुर्की लंबे समय से ईरान से गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्योंकि उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंधों पर छूट हासिल कर ली है। इसी तरह भारत को भी अपनी जरूरतों के लिए ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात करने की छूट मिली है। लेकिन पाकिस्तान ऐसा क्यों नहीं कर पा रहा। इस बीच, पाकिस्तान ने यह जानने के लिए अमेरिकी अधिकारियों से कई बार संपर्क करने की कोशिश की है कि अगर ईरान आईपी गैस लाइन का हिस्सा बन जाता है तो क्या ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का पाकिस्तान पर कोई असर होगा? हालांकि अमेरिका ने इसका कोई जवाब नहीं दिया।
ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन को पीस पाइपलाइन या आईपी गैस के रूप में भी जाना जाता है। यह ईरान से पाकिस्तान तक प्राकृतिक गैस पहुंचाने के लिए 2,775 किलोमीटर (1,724 मील) की एक निर्माणाधीन पाइपलाइन परियोजना है। फिलहाल ईरान के हमले और पाकिस्तान के जवाबी हमलों ने पश्चिम एशिया में नए संघर्ष को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। ये क्षेत्र पहले से ही गाजा पट्टी में हमास के खिलाफ इजरायल के युद्ध और यमन के हुती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाए जाने से तनाव व्याप्त है।
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