कनाडा में चुनाव नहीं लड़ पाएंगे हिंदू सांसद चंद्र आर्य, खालिस्तानियों के खिलाफ बोलने की सजा; टिकट कटा
- जुलाई 2023 में जब खालिस्तानी कार्यकर्ताओं ने भारतीय राजनयिकों की भूमिका की जांच की मांग की, तब आर्य ने खालिस्तान जनमत संग्रह को ‘हमारे आंगन में सांप’ करार दिया था।

कनाडा के भारतीय मूल के हिंदू सांसद चंद्र आर्य को खालिस्तानी चरमपंथियों के खिलाफ मुखरता से बोलने की कीमत चुकानी पड़ी है। सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी ने उन्हें आगामी चुनाव में हिस्सा लेने से रोक दिया है। खालिस्तान समर्थक कहे जाने वाले जस्टिन ट्रूडो की पार्टी ने उनका टिकट काट दिया। यह घटना कनाडा की राजनीति में हिंदू समुदाय के प्रतिनिधित्व और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल खड़े कर रही है। चंद्र आर्य नेपियन निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। वे लंबे समय से कनाडा में खालिस्तानी उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों की हिंसक गतिविधियों की निंदा की और हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए एकजुटता की अपील की थी। हाल ही में, उन्होंने एडमोंटन में एक हिंदू कार्यक्रम के दौरान खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना किया था, जिसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई थी। आर्य ने इसे "कनाडाई समस्या" करार देते हुए सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की थी।
चंद्र आर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए बताया कि पार्टी ने उनका टिकट काट दिया है। लिबरल पार्टी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, चुनाव प्रचार अभियान के अध्यक्ष ने चंद्र आर्य की पात्रता की विस्तृत समीक्षा की। इस समीक्षा के बाद उनका टिकट काटने की सिफारिश की गई जिसे पार्टी ने स्वीकार कर लिया है। आर्य ने इस निर्णय को "बेहद निराशाजनक" करार दिया, लेकिन कहा कि इससे नेपियन के लोगों की सेवा करने का उनका सम्मान और गर्व कम नहीं होगा।
उन्होंने लिखा, "मुझे लिबरल पार्टी द्वारा सूचित किया गया है कि नेपियन में आगामी आम चुनाव के लिए उम्मीदवार के रूप में मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया है। हालांकि यह खबर बेहद निराशाजनक है, लेकिन इससे नेपियन के लोगों - और सभी कनाडाई लोगों - की 2015 से संसद सदस्य के रूप में सेवा करने का गौरव और विशेषाधिकार कम नहीं होता। पिछले कई वर्षों से, मैंने इस भूमिका में अपना दिल और आत्मा झोंक दी है। मुझे एक सांसद के रूप में किए गए अपने काम पर बहुत गर्व है। नेपियन के निवासियों को मैंने जो अटूट सेवा प्रदान की है, कनाडाई लोगों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर मैंने जो सैद्धांतिक रुख अपनाया है और मुश्किल घड़ी में भी जिन कारणों के लिए मैंने खड़ा हुआ है - उस सब पर मुझे गर्व है। अपने समुदाय और देश की सेवा करना मेरे जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी रही है, और मैं इसके हर पल के लिए आभारी हूं।"
लिबरल पार्टी ने आर्य की उम्मीदवारी रद्द करने के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं। लिबरल पार्टी के इस फैसले के पीछे आर्य के खालिस्तानी विरोधी रुख को कारण माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि उनकी यह मुखरता कनाडा में सिख समुदाय के एक वर्ग को नाराज कर सकती है, जिसे लिबरल पार्टी अपना वोट बैंक मानती है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि उनकी खालिस्तान विरोधी रुख के अलावा, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ने पार्टी के भीतर असहजता पैदा की होगी। पिछले साल अगस्त में आर्य ने नई दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की थी, जिसे कनाडा सरकार ने "निजी पहल" करार दिया था।
खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ मुखर रहे हैं आर्य
चंद्र आर्य कनाडा और अन्य स्थानों पर सक्रिय खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ खुलकर बोलते रहे हैं। कनाडा को खालिस्तानियों का मुख्य गढ़ माना जाता है लेकिन फिर भी चंद्र आर्य सार्वजनिक रूप से इसके खिलाफ बोलते रहे। जिसके कारण वह पहले भी खालिस्तानी समूहों के निशाने पर रहे हैं। अक्टूबर 2023 में अमेरिका स्थित खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से भारतीय राजनयिकों के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद चंद्र आर्य को अगला निशाना बनाने की अपील की थी।
पन्नू ने आर्य पर लगाए गंभीर आरोप
गुरपतवंत सिंह पन्नू ने X पर पोस्ट कर कनाडाई सरकार से चंद्र आर्य के खिलाफ जांच करने की मांग की थी। उसने आरोप लगाया कि आर्य खालिस्तान आंदोलन के खिलाफ ‘जहर उगल’ रहे हैं और भारत सरकार के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। पन्नू ने आर्य पर आरोप लगाते हुए कहा, "इंडो-कैनेडियन सांसद चंद्र आर्य द्वारा शांतिपूर्ण खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के खिलाफ नफरत फैलाना भारतीय सरकार के एजेंट की भूमिका निभाने का स्पष्ट उदाहरण है। जुलाई 2023 में जब खालिस्तानी कार्यकर्ताओं ने भारतीय राजनयिकों की भूमिका की जांच की मांग की, तब आर्य ने खालिस्तान जनमत संग्रह को ‘हमारे आंगन में सांप’ करार दिया था। आर्य ने खालिस्तान समर्थकों द्वारा हिंदू मंदिरों पर हमलों की निंदा की थी और कनाडा में हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए आवाज उठाई थी।
लिबरल पार्टी द्वारा आर्य की उम्मीदवारी रद्द किए जाने के इस फैसले के राजनीतिक प्रभावों पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय कनाडा में खालिस्तानी समूहों और उनकी बढ़ती राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि यह फैसला पार्टी की आंतरिक राजनीति का परिणाम हो सकता है।
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