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मोदी नहीं ढहा पाए ममता का किला, उलटा अपनी सीटें गंवा बैठी भाजपा; कहां हुई चूक?

बंगाल भाजपा के लिए प्राथमिकता वाले राज्यों में से एक रहा है, जहां पार्टी ने 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद से बहुत समय किया लेकिन चुनावों में अपनी 18 सीटों की संख्या में सुधार नहीं कर पाई।

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाताTue, 4 June 2024 04:53 PM
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मोदी नहीं ढहा पाए ममता का किला, उलटा अपनी सीटें गंवा बैठी भाजपा; कहां हुई चूक?

West Bengal Lok Sabha Results Mamata vs Modi: पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के लिए मतगणना के कई दौर के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) 29 सीट, भाजपा 12 और कांग्रेस एक सीट पर आगे हैं। निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर यह जानकारी दी गई है। अगर तृणमूल कांग्रेस शाम तक यह बढ़त बरकरार रख पाती है तो पार्टी 2014 के बाद राज्य में दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए तैयार है। तृणमूल कांग्रेस ने 2014 में 34 सीट जीती थीं।

बंगाल भाजपा के लिए प्राथमिकता वाले राज्यों में से एक रहा है, जहां पार्टी ने 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद से बहुत समय और ऊर्जा खर्च की लेकिन लोकसभा चुनावों में अपनी 18 सीटों की संख्या में सुधार नहीं कर पाई। ममता बनर्जी की पार्टी ने केवल अपना गढ़ बचाया बल्कि भाजपा की सीटों में भी सेंध लगा दी।  बंगाल में भाजपा की बंपर जीत के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि बंगाल में धुर्वीकरण की जगह लुभावनी योजनाओं ने ज्यादा असर डाला। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हमेशा से राज्य की महिला मतदाताओं के बीच बढ़त हासिल रही है और लक्ष्मी भंडार के साथ टीएमसी का मानना ​​है कि उनके पास तुरुप का इक्का है। 

ममता सरकार ने अगस्त 2021 में इस योजना की शुरुआत मतदाताओं को जीत दिलाने के लिए "धन्यवाद" के रूप में की थी। लोकसभा चुनाव से ठीक एक पखवाड़े पहले इसके तहत दिए जाने वाले पैसों में संशोधन किया गया। यानी कि 25 से 60 वर्ष की आयु की महिला लाभार्थी अब हर महीने 1,000 रुपये की हकदार हैं। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा की जाती हैं। अगर वे महिलाएं एससी/एसटी समूह से संबंधित हैं तो उन्हें 1,200 रुपये दिए जाते हैं। लक्ष्मी भंडार की लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा ने केंद्र की अपनी महिला-केंद्रित योजनाओं के बावजूद चुनावों के दौरान आश्वासन दिया था कि अगर वह सत्ता में आई तो वह इस पात्रता को बढ़ाएगी। वाम मोर्चा और कांग्रेस ने भी यह स्पष्ट कर दिया कि वे लक्ष्मी भंडार के खिलाफ नहीं हैं। 

अगर महिलाएं टीएमसी के सपोर्ट बेस का आधार हैं, तो अल्पसंख्यक उसका और भी बड़ा वोट है। अल्पसंख्यक राज्य की आबादी का लगभग 30% हिस्सा हैं। ममता ने अपने अभियान के दौरान इस पर मुस्लिमों पर से फोकस कभी नहीं हटाया। खासकर नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को लेकर वे हमेशा विरोध में खड़ी रहीं। अल्पसंख्यक वोट राज्य की कम से कम 10-12 सीटों पर टीएमसी का भाग्य तय करता है।

इसके अलावा, ध्रुवीकृत अभियान में, अगर टीएमसी ने अल्पसंख्यक वोटों को अपने पक्ष में करने की कोशिश की, तो भाजपा ने अनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों सहित हिंदुओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया कि ममता सरकार के "अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण" के तहत हिंदुओं को नुकसान उठाना पड़ा है। भाजपा ने राज्य में लंबे समय से बसे बांग्लादेशी हिंदू प्रवासियों तक पहुंचने के लिए सीएए कार्ड का भी इस्तेमाल किया। करीब पांच साल से अटका पड़ा सीएए लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अधिसूचित किया गया था।  

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