बंगाल में सांसदी हारे दिग्गज भाजपा नेता को याद आए वाजपेयी, पार्टी को क्या नसीहत दी
घोष ने अपनी चुनावी हार के पीछे 'साजिश’ की ओर इशारा करते हुए बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा अपनी पकड़ को बरकरार रख पाने में क्यों नाकाम रही।

हाल ही में पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव हारने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक बड़े नेता ने अपनी ही पार्टी को नसीहत दी है। भाजपा नेता दिलीप घोष ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि 'पार्टी के एक भी पुराने कार्यकर्ता की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए।' दिलीप घोष 2019 में मेदिनीपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे लेकिन इस बार उन्हें बर्धमान-दुर्गापुर सीट पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कीर्ति आजाद के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कही 'बात' शेयर करते हुए लिखा, "एक बात का ध्यान रखें: पार्टी के एक भी पुराने कार्यकर्ता की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए। अगर जरूरत पड़े तो दस नए कार्यकर्ताओं को अलग कर दें। क्योंकि पुराने कार्यकर्ता ही हमारी जीत की गारंटी हैं। नए कार्यकर्ताओं पर इतनी जल्दी भरोसा करना उचित नहीं है।"
इससे पहले दिलीप घोष ने अपनी चुनावी हार के पीछे 'साजिश’ की ओर इशारा करते हुए बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा अपनी पकड़ को बरकरार रख पाने में क्यों नाकाम रही, इसके कारणों का पता लगाएंगे। घोष ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने बर्धमान-दुर्गापुर सीट पर पूरी मेहनत से चुनाव लड़ा लेकिन सफल नहीं हो सके। उन्होंने कहा, ''साजिश आदि राजनीति का हिस्सा हैं। मैं इसे इसी तरह लेता हूं। इसके बावजूद मैंने बहुत मेहनत की लेकिन सफल नहीं हो सका। राजनीति में हर कोई आपको पीछे धकेलने की फिराक में बैठा है।''
वर्ष 2021 में भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष रहे घोष ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल में पार्टी अपनी पकड़ क्यों बरकरार रख पाने में नाकाम रही, इसके कारणों का पता लगाये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ''पार्टी 2021 तक तेज गति से आगे बढ़ रही थी लेकिन उसके बाद कैसे अपनी राह से भटक गई। हम 2021 तक जिस गति से आगे बढ़ रहे थे उस गति से आगे नहीं बढ़ सके। हमें इस साल बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए। कुछ कमी जरूर रही होगी। हमें इसकी जांच करनी चाहिए। हर चीज पर चर्चा होनी चाहिए।'' वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 18 लोकसभा सीट पर जीत हासिल की थी लेकिन इस बार उसकी संख्या घटकर 12 रह गई।
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