बोले सीतापुर -सीमित संसाधनों से आग की घटनाओं पर काबू पाना मुश्किल
Sitapur News - सात तहसीलों में विभक्त सीतापुर जिले का कुल क्षेत्रफल 5,743 वर्ग किलोमीटर का बोले सीतापुर -सीमित संसाधनों से आग की घटनाओं पर काबू पाना मुश्किलबोले सी

सात तहसीलों में विभक्त सीतापुर जिले का कुल क्षेत्रफल 5,743 वर्ग किलोमीटर का है। जिले में छह फायर स्टेशन हैं। कुल मिलाकर इन पर 58 जवानों की तैनाती है। जिले भर में दो फायर इस्टिंगयुशर, आग बुझाने वाली कुल 15 गाड़ियां और नौ ड्राइवर हैं। इन पर जिले की 1,586 ग्राम पंचायतों और 11 नगर निकायों में आग बुझाने की जिम्मेदारी है। जिले की सात तहसीलों में से महोली को छोड़कर सभी तहसीलों पर अग्निशमन केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन हर अग्निशमन केंद्र पर अग्निशमन जवानों, वाहनों एवं अन्य संसाधनों का टोटा है। जिला मुख्यालय पर स्थित अग्निशमन केंद्र पर आग बुझाने के लिए छोटे-बड़े कुल छह वाहन हैं। जिसमें से दो बड़ी गाड़ियां हैं, जिनकी क्षमता 45-45 हजार लीटर पानी की है। इनमें से एक गाड़ी काफी पुरानी है, जिसकी मरम्मत कर किसी तरह से उसे चलाया जा रहा है। इसके अलावा 25 हजार लीटर क्षमता का एक वाहन और 750 लीटर का एक क्विक रिस्पान्स वाहन है। पानी भरने के लिए एक पोर्टेबल डीजल पंप वाहन और एक रेस्क्यू वाहन भी है। यहां पर एकमात्र लीड फायर मैन और 23 फायर फाइटर की तैनाती है, जोकि बीते सालों में अग्निकांड की वारदातों को देखते हुए नाकाफी है। इस अग्निशन केंद्र पर कम से आग बुझाने वाली कम आठ और गाड़ियों की जरूरत है। जिले के बिसवां और महमूदाबाद तहसील क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। इन दोनों तहसीलों पर फायर स्टेशन हैं। इसके अलावा रेउसा ब्लॉक में अग्निशमन केंद्र बन रहा है। इसके साथ अगर रामपुर मथुरा, थानगांव, रेउसा व पैंतेपुर क्षेत्र में आग लगती है तो बिसवां व महमूदाबाद से आग बुझाने के वाहन भेजे जाते हैं।
जब जिला मुख्यालय का यह हाल है तो तहसीलों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। जिले की महोली तहसील के अलावा अन्य सभी तहसील मुख्यालयों पर अग्निशमन केंद्र बने हुए हैं। महोली क्षेत्र में आग लगने की सूचना पर मिश्रिख अथवा सीतापुर से वाहन और फायर फाइटर भेजे जाते हैं। तहसीलों पर स्थित अग्निशमन केंद्रों पर कम से कम 15 फायर फाइटरों की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में चार से पांच की ही तैनाती है। इसके अलावा इन केंद्रों पर कम से कम दो-दो वाहन होने चाहिए लेकिन मिश्रिख में तीन और सिधौली व महमूदाबाद के अग्निशमन केंद्रों पर आग बुझाने के लिए दो-दो तथा लहरपुर और बिसवां के अग्निशमन केंद्रों पर आग बुझाने के लिए एक-एक गाड़ियां हैं।
महोली में नहीं है फायर स्टेशन ---
जिले के भूड़ इलाके में गिना जाने वाले पिसावां और महोली इलाकों में हर साल अग्निकांड की कई घटनाएं होती हैं। लेकिन महोली तहसील मुख्यालय पर अभी अग्निशमन केंद्र नहीं बन सका है। इन इलाकों में यदि कहीं आग लगती है तो उसे बुझाने के लिए मिश्रिख या फिर सीतापुर से अग्निशमन विभाग की गाड़ी और जवान जाते हैं। कई किलोमीटर इस लंबे सफर में जब तक कि विभाग की टीम मौके पर पहुंचती है, तब तक वहां लाखों की संपत्ति जलकर राख हो चुकी होती है।
दशकों से जमीन के नीचे दबे पड़े हैं वाटर हाइड्रेंट ---
आग लगने की घटना में दमकल विभाग को पानी की आपूर्ति करने के लिए शहर में ऑफीसर्स कॉलोनी, कोतवाली चौराहा, अग्निशमन केंद्र, तरणताल और ट्रांसपोर्ट चौराह आदि जगहों पर वाटर हाइड्रेंट स्थापित किए गए थे। जिसके संचालन और रख रखाव की जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन के कंधो पर थी। आपात स्थिति में दमकल विभाग इन्हीं वाटर हाइड्रेंट से पानी लेकर आग बुझाने का काम करता था। लेकिन आधा दर्जन से अधिक यह वाटर हाइड्रेंट आज कहां हैं, इसकी जानकारी न तो दमकल विभाग के पास है और न ही इनके रख-रखाव का जिम्मा संभालने वाले नगर पालिका प्रशासन को ही इनका कोई पता है। ऐसे में यदि शहर की तंग गलियों या बाजारों में कोई अनहोनी होती है, तो सीमित संसाधनों के चलते दमकल विभाग का उस पर काबू पाना आसान नहीं होगा। गौरतलब बात तो यह भी है जिलाधिकारी आवास और ऑफीसर्स कॉलोनी के हाइड्रेंट भी दशकों से जमीन के नीचे दबे पड़े हैं। इसे जिम्मेदारों की अनदेखी नहीं तो और क्या कहेंगे। एक ओर दमकल विभाग पहले से ही संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में शहर के कई स्थानों के खराब हाइड्रेंट विभाग की समस्याओं पर नमक छिड़ने का काम कर रहा है। खराब हाइड्रेंट के कारण किसी अनहोनी की स्थित में कम पानी और सीमित संसाधनों की मदद से आग पर काबू पाना दमकल विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। हाइड्रेंट मिट्टी के नीचे दब जाने से जिला मुख्यालय पर बना फायर स्टेशन पानी की किल्लत से जूझ रहा है। बावजूद इसके जिम्मेदार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। फायर स्टेशन को पानी आपूर्ति करने वाले हाइड्रेंट की पाइप लाइन जर्जर और छतिग्रस्त हो चुकी है। जिस कारण से फायर स्टेशन के कर्मचारियों को पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। हाइड्रेंट की पाइप लाइन छतिग्रस्त होने के कारण कई बार फायर स्टेशन में पानी भर जाता है। हाइड्रेंट न चलने के कारण कई बार आपात स्थित में दमकल विभाग को पानी की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ता है। पानी की कमी से आग लगने की स्थित में फायर फाइटर्स को आग पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है।
पांच सालों में 1,813 स्थानों पर लगी आग ---
मौसम का तापमान बढ़ने और हवा की गति तेज तेज होने के साथ ही जिले में आग लगने की घटनाओं में भी इजाफा हो जाता है। जिले में बीते पांच सालों में आग लगने की कुल 1,813 घटनाएं हुई। इन घटनाओं में 46 पशुओं की मौत हुई और आग की चपेट में आने से बड़ी संख्या में लोग झुलसे थे। हर साल जिले में गर्मी के मौसम में अग्निशमन विभाग के समक्ष आग लगने की घटनाओं के बाद आग पर काबू पाना एक बड़ी चुनौती होती है। अग्निशमन विभाग में कर्मचारियों के साथ संसाधनों की कमी रहती है। कहने के लिए मुख्यालय | सहित छह तहसीलों में फायर स्टेशन हैं, लेकिन संसाधन कम हैं।
06 फायर स्टेशन जिले में
58 फायर फाइटर जिले में
02 फायर इस्टिंगयुशर जिले में
15 दमकम गाड़िया जिले में
09 वाहन चालक जिले में
सुझाव---
- सृजित पदों के अनुसार दमकल कर्मियों की तैनाती की जाए।
- शहर में लगे सभी वाटर हाइड्रेंट को शीघ्र ठीक कराया जाए।
- आग बुझाने के लिए बड़े वाहनों की संख्या बढ़ाई जाए।
- त्वरित रिस्पांस के लिए छोटे वाहनों की संख्या बढ़ाई जाए।
- वाहन चालकों के रिक्त पदों पर शीघ्र तैनाती की जाए।
- फायर फाइटर का समय-समय पर प्रशिक्षण होना चाहिए।
शिकायतें ---
- फायर फाइटर को नियमित रूप से प्रशिक्षण नहीं मिलता है।
- फायर फाइटर की संख्या सृजित पदों की अपेक्षा कम है।
- शहर में लगे सभी वाटर हाइड्रेंट अतिक्रमण का शिकार हैं।
- जरूरत के हिसाब से वाहनों की संख्या बेहद कम है।
- त्वरित रिस्पांश के लिए छोटे वाहनों की काफी कमी है।
- वाहन चालकों के पदों के रिक्त होने से मुश्किल आती है।
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