Racket of Water Adulteration Surges in Doaba Region Amidst Summer Heat गर्मी आते ही पानी के धंधे में कूदे मिलावटखोर, Fatehpur Hindi News - Hindustan
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गर्मी आते ही पानी के धंधे में कूदे मिलावटखोर

Fatehpur News - -ब्रांडेड कंपनियों के फर्जी स्टीकर लगाकर बेच रहे बोतलबंद पानी -ब्रांडेड कंपनियों के फर्जी स्टीकर लगाकर बेच रहे बोतलबंद पानी -ब्रांडेड कंपनियों के फर्ज

Newswrap हिन्दुस्तान, फतेहपुरWed, 2 April 2025 02:56 AM
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गर्मी आते ही पानी के धंधे में कूदे मिलावटखोर

फतेहपुर। दोआबा में लंबे समय से सक्रिय मिलावटखोरों का रैकेट गर्मी आते ही पानी के धंधे में कूद गया है। आरओ प्लांट से शुद्ध जल बताकर कैन और पाउच में बेचा जा रहा नलों का पानी तो आम है ही अब धंधेबाजों ने फर्जी तरीके से नल का पानी ब्रांडेड कंपनी या उससे मिलते जुलते नाम का स्टीकर लगा बोतल में भरकर बाजार में झोंक दिया है। इन दिनों जिले भर में पांच सैकड़ा से अधिक आरओ प्लांट संचालित हो रहें हैं। अधिकांश में शुद्ध् पानी के नाम पर लोगों से छलावा किया जा रहा है। पानी में जारी मिलावट पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। अधिकांश दुकानदार तक नहीं पहचान पाते कि उनसे बिकवाए जा पानी में धोखा है। ज्यादा मुनाफा के लालच में दुकानदार पानी की बोतल दुकान पर उतरवा ले रहे हैं। ग्राहक भी बाहरी रंग-बनावट देखकर उसे शुद्ध मानकर प्यास बुझा रहे हैं।

क्योंकि इसे चलते-फिरते इस्तेमाल करने वालों की तादाद ज्यादा है, इसलिए स्वाद अलग मिलने पर भी ग्राहक आपत्ति नहीं कर पाता। जानकार बताते हैं कि ऐसा पानी पीने से कई तरह के खतरे हैं। डा. शुभम मिश्रा बताते हैं कि अगर पानी शुद्ध कर नहीं भरा गया है तो उसका इस्तेमाल कई बीमारियां पैदा कर सकता है।

बोतल बंद पानी के बढ़े चलन ने मिलावट खोरों का मौका दिया है। शादी समारोह हो या राह चलते दुकान, होटल से खरीद कर बोतल बंद पानी पीना स्टेटस सिंबल बन गया है। कारोबारी संजीव गुप्ता बताते हैं हर साल गर्मी के सीजन में पचास से ज्यादा नई कंपनियां बाजार में आती हैं और इतनी ही हर सीजन में लापता हो जाती हैं।

पैकिंग के लिए किसी न किसी प्लांट में उसे पानी भरा जाता है। नकली स्टिकर लगाकर रिटेलरों, चाय की दुकानों, होटलों या किसी समारोह में खपा दिया जाता है।

जानकार बताते हैं कि शुद्ध पानी में टीडीएस की मात्रा 500 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) होनी चाहिए। इसका पीएच लेवल 7.0 से 8.5 के बीच होना चाहिए। इससे ज्यादा होने पर नुकसानदेह है। निजी आरओ से आपूर्ति किए जाने वाले पानी में टीडीएस और पीएच की नियमित जांच होनी चाहिए।

पानी में अशुद्धता से लोग त्वचा रोग, पथरी, हेपेटाइटिस या पीलिया, हैजा, पोलियो, टायफाइड, डायरिया आदि के शिकार हो सकते हैं।

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