बोले बरेली: समय पर मानदेय नहीं मिलने से परेशान हैं पंचायत सहायक
Bareily News - ग्राम पंचायतों के विकास के लिए 2021 में पंचायत सहायकों की नियुक्ति की गई थी। ये ग्रामीणों के विभिन्न प्रमाण पत्र बनाते हैं और विकास कार्यों की निगरानी करते हैं। हालांकि, इन्हें कम मानदेय, मोबाइल और...
ग्राम पंचायतों के विकास को रफ्तार देने के लिए 2021 में पंचायत सहायकों की नियुक्ति की गई थी। कंप्यूटर का ज्ञान रखने वाले पंचायत सहायक विकास की कार्ययोजना तैयार कराने से लेकर भुगतान कराने तक की जिम्मेदारी निभाते हैं। ग्रामीणों के आय-जाति और निवास प्रमाण पत्र बनाते हैं। निर्वाचन में वीडियोग्राफी करते हैं। क्रॉप और आयुष्मान सर्वे करते हैं। फैमिली आईडी बनाते हैं। ऑनलाइन फीडिंग करते हैं। बावजूद इसके न इनको विभाग ने न एंड्रायड फोन दिए हैं और न ही रिचार्ज की सुविधा। महज छह हजार रुपये का मानदेय भी प्रधान और सचिव की खुशामद से मिलता है। पंचायत सहयकों के लिए हर ग्राम पंचायत के पंचायत सचिवालय में ऑफिस बनाया गया है। कंप्यूटर की व्यवस्था की गई है। पंचायत सहायकों का मूल काम ग्राम पंचायत के विकास कार्ययोजना की ऑनलाइन फीडिंग करना है। विकास कार्यों के होने वाले सभी भुगतान के बिल-बाउचर की फीडिंग करने की जिम्मेदारी भी पंचायत सहायकों की है। हालांकि ज्यादातर प्रधान और पंचायत सचिव पंचायत सहायक को साइड लाइन करके बिल-बाउचर की फीडिंग कराते हैं। ताकि उनके खेल के बारे में पंचायत सहायक को जानकारी न हो सके। ग्रामीणों के आय-जाति और निवास प्रमाण पत्र के ऑनलाइन आवेदन कराने का अधिकार पंचायत सहायकों को दिया गया है। ग्रामीण एक आवेदन करने का पंचायत सहायक 30 रुपए लेते हैं। यह रकम ऑनलाइन खाते में भेज दी जाती है। एक आवेदन पर पंचायत सहायक को 5 रुपये कमीशन देने का प्रावधान भी है। हालांकि यह कमीशन ज्यादातर पंचायत सहायकों को प्राप्त नहीं हो सका। वैसे भी गांव में आय-जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने का ग्राफ काफी कम है। शौचालायों के निर्माण भी पंचायत सहायकों की अहम भूमिका होती है। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के साथ मिलकर लाभार्थियों के चयन की जिम्मेदारी पंचायत सहायक निभाते हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायतों में होने वाले तमाम पंचायत सहायकों को करने पड़ते हैं। फैमिली आईडी बनाने की जिम्मेदारी पंचायत सहायक को दे रखी है। ग्रामीणों को जागरूक कर उनकी फैमिली आईडी तैयार कर रहे हैं। आष्युष्मान कार्ड के लिए गांव में पंचायत सहायक ही सर्वे करते हैं। इतना ही नहीं क्रॉप सर्वे की जिम्मेदारी भी पंचायत सहायकों के कंधों पर है। गरीबों को आवास दिलाने की जिम्मेदारी भी पंचायत सहायक निभाते हैं। दूसरे विभागों के फील्ड के काम अधिक होने की वजह से पंचायत सहायक पंचायत सचिवालयों पर कम ही नजर आते हैं। सर्वे करने वाले पंचायत सहायकों को प्रोत्साहन राशि तक नहीं दी जाती।
छह हजार के मानदेय के लिए छह महीने इंतजार
पंचायत सहायकों को ग्राम निधि से छह हजार मानदेय देने का प्रावधान है। पंचायत सहायक को अपना मानदेय लेने में पसीने छूट जाते हैं। प्रधान और सचिव नखरे दिखाते हैं। प्रधान की हां में हां करने वाला पंचायत सहायक नहीं है तब तो और ज्यादा कठिन है। प्रधान छह-छह महीने तक टहलाते हैं। मानेदय मांगने पर हड़काते हैं। बरेली में 3 से लेकर 6 महीने का पंचायत सहायकों को मानदेय ग्राम पंचायतों में बकाया है। पंचायक सहायक मानदेय का भुगतान की प्रक्रिया ग्राम पंचायतों से हटाने की की मांग कर रहे हैं।
पंचायत सचिवालयों में बिजली की किल्लत
ग्राम पंचायत सचिवालयों में कंप्यूटर लगाए गए हैं। पंचायत सहायकों को अपना काम कंप्यूटर के जरिए करना होता है। गांव में बिजली की किल्लत होने की वजह से बहुत परेशानी का करना पड़ता है। काम में रुकावट आती है। आय-जाति, निवास प्रमाण पत्रों के आवेदन की प्रक्रिया भी रुक जाती है।
निर्वाचन में वीडियोग्राफी की, भुगतान नहीं मिला
पंचायत सहायकों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में खास जिम्मेदारी निभाई। पोलिंग बूथों पर पंचायत सहायकों ने वीडियोग्राफी की। वीडियो बनाकर निर्वाचन विभाग को मुहैया कराई। करीब 10 महीने बीतने के बाद भी अभी तक पंचायत सहायकों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं हो सका है।
क्रॉप सर्वे में अभद्रता से घबरा रहीं महिला पंचायत सहायक
पंचायत सहायकों को क्रॉप सर्वे की जिम्मेदारी दी है। पंचायत सहायक मौके पर ऑनलाइन एप के जरिए क्रॉप सर्वे करते हैं। खेत में कौन सी फसल है, इसकी पूरी डिटेल ऑनलाइन फीड करते हैं। फोटो भी अपलोड करते हैं। जंगल में कई बार कुछ शरारती तत्वों ने महिला पंचायत सहायकों के साथ अभद्रता की है। सुरक्षा न होने से महिला पंचायत सहायक खेतों पर जाकर सर्वे करने से कतरा रहीं हैं। कई बार अधिकारियों से शिकायत भी कर चुकी हैं।
मृतक आश्रित कोटा चाहते हैं पंचायत सहायक
पंचायत सहायक दूसरे विभागों की तरह मृतक आश्रित कोटे का लाभ देने की मांग कर रहे हैं। पंचायत सहायकों का कहना है कि पंचायत सहायक की अकास्मिक मृत्यु पर परिवार के किसी व्यक्ति को नौकरी नहीं दी जाती। इस वजह से पंचायत सहायकों के परिवार की स्थिति बहुत खराब हो जाती है।
मातृत्व अवकाश मिले
महिला पंचायत सहायक दूसरे विभागों की तरह मातृत्व अवकाश की मांग कर रही हैं। महिला पंचायत सहायकों को कहना है कि मातृत्व अवकाश के बगैर नवजात बच्चे की देखभाल बहुत मुश्किल हो जाती है। महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश देने पर अधिकारियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
आयुष्मान कार्ड की सुविधा मांग रहे पंचायत सहायक
पंचायत सहायकों को कहना है कि हमें सिर्फ 6 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलता है। वह भी निश्चित समय पर नहीं मिलता। हम लोगों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। इतने कम मानदेय में परिवार का खर्च चलाना बहुत मुश्किल है। परिवार में कोई बीमार हो जाए तो हालात और खराब हो जाते हैं। सभी पंचायत सहायकों को आयुष्मान कार्ड की सुविधा मिलनी चाहिए। आयुष्मान कार्ड के जरिए अपना और परिवार का उपचार करा सकेंगे।
पंचायत सहायक बगैर सेवा नियमावली करते हैं काम
पंचायत सहायक की तैनाती अनुबंध के आधार पर की गई थी। पंचायत सहायकों की कोई सेवा नियमावली नहीं है। बगैर नियमावली के पंचायत सहायक सर्विस कर रहे हैं। सेवा नियमावली बनाने की मांग को लेकर पंचायत सहायक लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
अतिकुशल श्रेणी का मिले मानदेय
ग्राम पंचायत सहायक यूनियन उत्तर प्रदेश वेलफेयर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष नवनीत गंगवार का कहना है कि पंचायत सहायक को अतिकुशल श्रेणी का 26,910 रुपये मानदेय मिलना चाहिए। पंचायत सहायक तकनीकी पद है। मानदेय के भुगतान को ग्राम निधि से हटाकर राज्य पोषित निधि से करना चाहिए। ताकि पंचायत सहायकों का शोषण बंद हो सके।
शिकायतें:
1. छह हजार रुपये का मानदेय देने के लिए ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव करते हैं परेशान
2. पंचायत सहायकों के परिवारों को मृतक आश्रित कोटे का नहीं मिलता लाभ
3. महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश की सुविधा भी नहीं दी जाती
4. ऑनलाइन सर्वे करने वाले पंचायत सहायकों को मोबाइल और रिचार्ज नहीं दिया जाता
5. क्रॉप सर्वे, आवास सर्वे, फैमिली आईडी, आयुष्मान सर्वे का नहीं मिलता भुगतान
6. पंचायत सहायकों को अपनी ग्राम पंचायत के बाहर नहीं दी जाती ट्रांसफर की सुविधा
7. पंचायत सहायक बगैर सेवा नियमावली के कर रहे हैं कई साल से सर्विस
सुझाव:
1. पंचायत सहायकों को ग्राम निधि की बजाय राज्य पोषित निधि से मानदेय दिया जाए
2. अकास्मिक निधन होने की स्थिति में पंचायत सहायक के परिजनों को मृतक आश्रित कोटे का लाभ मिले
3. महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश और ट्रांसफर की सुविधा दी जाए
4. पंचायतों को ऑनलाइन सर्वे के लिए एंड्रायड मोबाइल और रिचार्ज की सुविधा दी जाए
5. निर्वाचन में वीडियो ग्राफी और दूसरे विभागों के सर्वे का भुगतान तुरंत की जाए
6. पंचायत सहयको की अनुबंध प्रणाली समाप्त कर सेवा नियमावली तैयार की जाए
7. पंचायत सहायक को पंचायत सचिव की भर्ती में 50 फीसदी आरक्षण की सुविधा मिले
पंचायत सहायकों की सुनिए:
पंचायत सहायकों को अल्प मानदेय मिलता है। 6 हजार में परिवार का पालन पोषण नहीं हो सकता। सरकार को जल्दी से जल्दी मानदेय में वृद्धि करनी चाहिए। - बैभव शर्मा
निर्वाचन के दौराना हम लोगों से वीडियोग्राफी कराई गई थी। अभी तक वीडियोग्राफी का भुगतान नहीं किया गया। दूसरे विभागों के सर्वे का भी भुगतान नहीं दिया जाता। - सुधीर गंगवार
हम लोगों से तमाम विभागों के डिजिटल सर्वे करते हैं। विभाग ने न तो हमें एंड्रायड फोन मुहैया कराए हैं और न रिचार्ज की सुविधा दी जाती है।- कंचन यादव
पंचायत सचिवालय पर इंटरनेट सेवा बेहतर नहीं है। आय-जाति और निवास प्रमाण पत्र के आवेदन करने वक्त अक्सर दिक्कत आती है। हाईस्पीड इंटरनेट सेवा होनी चाहिए- नैपाल सिंह
पंचायत सहायकों का मानदेय सिर्फ 6 हजार रुपये है। मनरेगा मजदूर से भी कम मानदेय मिलता है। पंचायत सहायकों को आयुष्मान योजना का लाभ मिलना चाहिए।- अमित मौर्य
पंचायत सहायकों को मानदेय ग्राम निधि से नहीं मिलना चाहिए। राज्य पोषित निधि से व्यवस्था होनी चाहिए। ताकि ग्राम प्रधान और सचिवों की मनमानी खत्म हो सके। - सतीश कुमार
पंचायत सहायकों की सेवा नियमावली बननी चाहिए। अनुबंध प्रणाली खत्म की जाए। पंचायत सहायकों को 26910 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलना चाहिए। - अतुल कुमार
पंचायत सहायक से मूल काम की बजाय दूसरे विभागों को कार्य ज्यादा कराया जाता है। गांव के तमाम सर्वे पंचायत सहायक करते हैं। हमसे सिर्फ मूल काम कराया जाए। - अमन सागर
पंचायत सहायक पंचायत सचिव का काम करते हैं। पंचायत सचिव की भर्ती में कम से कम 50 फीसदी कोटा पंचायत सहायकों को मिलना चाहिए।- धर्मेंद्र मौर्य
पंचायत सहायकों को अवकाश और ट्रांसफर की सुविधा मिलनी चाहिए। ट्रांसफर नीति न होने से पंचायत सहायक परेशान हैं। काफी समय से मांग हो रही है।- प्रिया सिंह
डिजिटल सर्वे के लिए अच्छे एंड्रायड फोन की जरूरत होती है। विभाग ने हमें फोन मुहैया नहीं कराए हैं। अपने परिवार वालों के फोन लेकर किसी तरह काम चलाते हैं।- प्रिया
हम लोग जंगल में जाकर फसलों को सर्वे करते हैं। पेड़ों की जिओ टैगिंग करते हैं। सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। कई महिला पंचायत सहायकों के बदसलूकी हो चुकी है।- शबनम
पंचायत सहायकों का मानदेय हर महीने मिलना चाहिए। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिवों को दखल खत्म होना चाहिए। मानदेय ग्राम निधि की बजाय राज्य पोषित से मिले। - प्रेमलता
समान काम समान काम की नीति पंचायत सहायकों पर लागू होनी चाहिए। पंचायत सहायकों के काम के घंटे तय नहीं हैं। रात-दिन काम करना पड़ता है।- राजवी
पंचायत सहायकों को छह-छह महीने से मानदेय नहीं मिला है। खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है। पंचायत सहायकों को स्थायी किया जाना बहुत जरूरी है।- आवेश कश्यप
दिव्यांग पंचायत सहायकों को कम से कम फील्ड सर्वे से दूर रखना चाहिए। आंख बंद करके ड्यूटी लगाई जाती है। मुझे फील्ड सर्वे में बहुत दिक्कत आती है। कोई सुनने को तैयार नहीं।- हरेंद्र सिंह
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