बोले बलरामपुर-उतरौला में नहीं खत्म हो रही जाम की समस्या
Balrampur News - समस्या उतरौला संवाददाता। उतरौला नगर को जाम की समस्या से निजात नहीं मिल रहा है।

समस्या उतरौला संवाददाता।
उतरौला नगर को जाम की समस्या से निजात नहीं मिल रहा है। नगरवासी जाम से जूझ रहे हैं। राहगीरों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यातायात कर्मी जूझते रहते हैं, लेकिन जाम हटवाना मुश्किल हो जाता है। जाम में एंबुलेंस व स्कूल वाहन भी फंसे रहते हैं, जिससे मरीजों व छोटे बच्चों को परेशानी उठानी पड़ती है। नगर में जाम का प्रमुख कारण अतिक्रमण बताया जा रहा है। ई-रिक्शों का संचालन भी कोढ़ में खाज का काम कर रहा है। कई बार मांग करने के बावजूद अतिक्रमण हटाने के नाम पर केवल खाना पूर्ति की जाती है। सभी त्योहार सम्पन्न हो चुके हैं। ऐसे में अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू करने की मांग एक बार फिर तेज पकड़ने लगी है।
अतिक्रमण एक ऐसी समस्या है, जिसमें लोगों को कीमती वक्त बर्बाद होता है। साथ-साथ उसे कई अन्य मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता है। उतरौला नगर की आवादी लगभग 70 हजार है। यहां थाना, डाक घर, इंटर व डिग्री कॉलेज, अस्पताल, बैंक आदि सुविधाएं लोगों को उपलब्ध हैं। पूरे नगर में लगभग पांच हजार दुकानें हैं। जहां आस पास क्षेत्र के लोग आवश्यक वस्तुओं की खरीद करने आते हैं। घनी आवादी होने के कारण जाम की समस्या विकराल होती जा रही है। यदि सड़क पर कुछ देर के लिए चार पहिया वाहन ठहर जाए तो जाम लग जाता है। सड़कें चौड़ी नहीं हैं। पटरियों पर ठेले वालों का कब्जा बना रहता है। ई-रिक्शों का संचालन नगर में बढ़ा है। ई-रिक्शे जहां एक ओर लोगों को घर तक पहुंचाने में सुविधा उपलब्ध कराते हैं वहीं इनकी वजह से लोगों की दुविधाएं भी बढ़ी हैं। सर्वाधिक जाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौराहे पर लगता है। यह चौराहा अत्यंत व्यस्ततम माना गया है। यहां चारों दिशाओं से गाड़ियां आती हैं। मार्ग सकरा होने के कारण यहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। चौराहे के आस पास पटरियों पर चाय, पान, सब्जी व फलों की दुकानें सजी हैं। दो वाहनों का एक साथ निकलना मुश्किल हो जाता है। आमने सामने वाहनों के आने पर भी भीषण जाम लगता है। चौराहे से मुख्य बाजार को जाने वाली सड़क पर हमेंशा जाम की स्थिति बनी रहती है। चौराहे से थोड़ी दूर स्थित भाजपा विधायक राम प्रताप वर्मा का घर है, वहां भी जाम लगा रहता है। जाम इतना तगड़ा होता है कि यातायात कर्मी दिन भर यातायात बहाल करने के लिए जूझते रहते हैं। बाजार में थोड़ा और आगे जाने पर ऐसा लगता है कि सड़क है ही नहीं। सड़क किनारे दुकानदारों का कब्जा बना रहता है। कुछ व्यापारियों ने भी टीन छाजन आदि करके पटरियों पर कब्जा कर रखा है। वे अपना अधिकतम सामान सड़क पटरी पर ही रखते हैं।
मार्ग सकरी होने के साथ पटरियों पर अतिक्रमण
हॉटन रोड तिराहा का हाल बेहाल है। तिराहा से होकर एक रोड बाजार के अंदर गई है। वहां हमेंशा जाम की स्थिति बनी रहती है। इस मार्ग पर गल्ला, सब्जी व फल मंडी स्थापित है, जिसके चलते बड़े वाहन सड़क पर ही खड़े रहते हैं। कभी-कभी ऐसा होता है कि माल अनलोड करने में एक से दो घंटे का समय लग जाता है। उस दौरान बाइक सवार भी रास्ते से निकल नहीं पाते। सड़क काफी सकरी है, जो जाम का कारण बन जाती है। प्राइवेट जीप व ई-रिक्शा स्टैंड भी हॉटन रोड के निकट बनाया गया है। याताया कर्मियों की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। दिन भर में दो से तीन बार जाम खाली करवाने को लेकर वाहन चालक आपस में नोंक झोंक करते रहते हैं। गल्ला मंडी के आस पास अक्सर जाम लगा रहता है। बड़े वाहन रुकते हैं, इस नाते से अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है।
बाजार में ई-रिक्शों के आवागमन पर लगे प्रतिबंध
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के निकट सर्वाधिक भीड़ होती है। कंचन, सुमन, सुनीता, रोजी, रुकसाना आदि ने बताया कि अवकाश के समय इतना जाम होता है कि घर तक पहंुचना मुश्किल हो जाता है। यहां भी पटरी पर दुकानदारों का कब्जा है। ई-रिक्शों को बाजार में जाने की छूट नहीं है फिर भी वह मनमानी करते हैं। कई बार दुकानदारों व ई-रिक्शा चालकों के बीच मारपीट की नौबत आ चुकी है। सड़क पतली होने के कारण ई-रिक्शों को मोड़ने में दिक्कतें होती हैं। उन्हें मोड़ने के दौरान ही जाम लग जाता है। बाजार में छोटे बच्चों के कई स्कूल हैं। जाम के कारण बच्चों के वाहन फंस जाते हैं और वे परेशान होते हैं। गोंडा मोड़ पर सड़क पटरी बची ही नहीं है। एक लाइन से ठेले वालों का कब्जा है। बड़े वाहनों के क्रास होने पर जाम लगता है। जाम खाली करवाने में 30 मिनट से कम का समय नहीं लगता है। कई बार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। अवैध कब्जादारों को नोटिस दी गई, लेकिन दुकानें नहीं हटीं।
बिना अतिक्रमण हटवाए नहीं मिल सकती जाम से निजात
लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाए बिना जाम की समस्या से नहीं निपटा जा सकता है। कोई न कोई तीस त्योहार बीच-बीच में आते रहते हैं, इसलिए प्रशासन दुकानदारों पर तरस खाकर उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाता। पटरी दुकानदारों के लिए कोई स्थान सुनिश्चित होना चाहिए, जिससे उनकी रोजी रोटी चल सके। यह जिम्मेदारी नगर पालिका को उठानी होगी। फल, सब्जी व गल्ला मंडी को एक जगह स्थापित करना होगा। ई-रिक्शों का संचालन बाजार में पूरी तरह रोकना होगा तब जाकर इस समस्या से निजात मिल सकती है।
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