बोले आजमगढ़ : बिजली कटौती छीने एकाग्रता, बंदरों और मच्छरों के बीच रहने की बाध्यता
Azamgarh News - राजकीय अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास की छात्राएं खराब सुविधाओं से परेशान हैं। मच्छर, बंदर, गंदगी और बिजली कटौती उनकी पढ़ाई में बाधा डाल रहे हैं। छात्राएं डिजिटल लाइब्रेरी, बेहतर पुस्तकालय और इनवर्टर...

समाज कल्याण विभाग के राजकीय अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास के कमरों में वे जिंदगी के सपने बुनती हैं। कड़ी मेहनत से उम्मीदों की तस्वीरें बनाती हैं लेकिन हॉस्टल की बदइंतजामी उनकी एकाग्रता तोड़ती है। मच्छर और बंदर नींद उड़ाते हैं। सुराख भरी आलमारियों में चूहे अरमानों को कुतरने से बाज नहीं आते। हॉस्टल कैंपस के पीछे जमा गंदगी की बदबू नाकों पर रुमाल रखने से भी नहीं जाती। जब-तब बिजली कटौती उन्हें डराती है। छात्राएं पूछ रही हैं कि सुविधाओं का अभाव ही क्या राजकीय छात्रावास की पहचान होती है? राजकीय अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास के सामने अंबेडकर प्रतिमा स्थल पर ‘हिन्दुस्तान के साथ बातचीत में बीएड की छात्रा कविता और निशा ने बताया कि हॉस्टल में इनवर्टर नहीं है। रात में बिजली कटते ही पूरे परिसर में अंधेरा छा जाता है। तब कमरे से बाहर निकलने में डर लगने लगता है। इनवर्टर न होने के कारण पंखे भी बंद हो जाते हैं। गर्मी के दिनों में काफी दिक्कत होती है। इस बार अभी से गर्मी शुरू हो गई है। हॉस्टल की वार्डेन से इनवर्टर लगवाने की मांग की गई है। समाज कल्याण विभाग के अधिकारी और वार्डेन जल्द समस्या दूर करने का आश्वासन दे रही हैं, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है। शालू ने बताया कि कमरों में रखी लोहे की आलमारियां खराब हो रही हैं। उनमें सुराख हो गए हैं। छात्राओं के लिए नई आलमारी की व्यवस्था होनी चाहिए।
पुस्तकालय में किताबें नहीं, अभ्युदय कोचिंग दूर
अग्रसेन कॉलेज में बीएड की पढ़ाई कर रहीं नेहा कुमारी ने बताया कि छात्रावास के पुस्तकालय में सुविधाएं न के बराबर हैं। सामान्य अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित पुस्तकें न होने के कारण छात्राओं को भटकना पड़ता है। समाज कल्याण विभाग की तरफ से पहले डीएवी कॉलेज में अभ्युदय कोचिंग का संचालन होता था, अब ब्रह्मस्थान इलाके में कक्षाएं चल रही हैं। छात्रावास से ब्रह्मस्थान की दूरी ज्यादा होने से छात्राएं अभ्युदय की क्लास में नहीं जा पातीं। अभ्युदय कोचिंग में ऑनलाइन क्लास की भी व्यवस्था होनी चाहिए।
फ्री इंटरनेट की मिले सुविधा
बीटीसी की छात्रा दुर्गावती ने बताया कि राजकीय छात्रावास में भी फ्री इंटरनेट की सुविधा मिलनी चाहिए। यूट्यूब जैसे प्लेटफार्म पर कई स्कॉलरों की उच्चस्तरीय ऑनलाइन क्लास चलती हैं। उन्हें फ्री में देखा जा सकता है लेकिन इसके इसके लिए निर्बाध इंटरनेट सुविधा की आवश्यकता है। यह सुविधा यहां न होने के चलते प्राइवेट लाइब्रेरियों में पढ़ना पड़ता है। वहां पैसे खर्च होते हैं। अगर छात्रावास में भी डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा होजाए तो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में बहुत ज्यादा मदद मिलेगी।
स्कॉलरशिप बिना आर्थिक दिक्कत
एमए द्वितीय वर्ष की छात्रा सुनीता कुमारी ने बताया कि उसे दो वर्षों से स्कॉलरशिप नहीं मिल रही है। परिवार ने किसी प्रकार से शहर के कॉलेज में एडमिशन करा दिया, लेकिन स्कॉलरशिप मिलने में देर होने से आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई बार इसके लिए समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया गया। हर बार विभाग का यही कहना होता है कि जल्द स्कॉलरशिप की धनराशि मिल जाएगी। दो वर्षों से इंतजार ही चल रहा है। पैसे के अभाव में अच्छे कोचिंग संस्थान और लाइब्रेरी में चाहकर भी प्रवेश नहीं ले पा रही।
परिसर के पीछे गंदगी, आती है बदबू
मनचोभा से डीएड की पढ़ाई कर रहीं प्रज्ञा कुमारी ने बताया कि छात्रावास परिसर में प्रतिदिन झाड़ू लगती है, लेकिन परिसर के पीछे बाईपास बांध रोड पर कूड़ा फेंका जाता है। वहां हमेशा गंदगी बजबजाती रहती है। उसकी बदबू छात्रावास तक आती है। इस कारण मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। वार्डेन से कई बार दवा का छिड़काव कराने के लिए कहा गया। नगरपालिका का कोई कर्मचारी यहां पर दवा का छिड़काव करने नहीं आया। इससे सभी छात्राएं परेशान हैं। वहीं, स्कॉलरशिप भी पूरी नहीं मिल सकी है। 41 हजार रुपये की स्कॉलरशिप का इंतजार हो रहा था, लेकिन अभी 30 हजार रुपये आए हैं।
तपता है ऊपरी तल, पढ़ाई मुश्किल
आरती राव ने बताया कि छात्रावास के दो तल के भवन में भूतल पर गर्मी के दिनों में कुछ राहत रहती है, लेकिन दूसरा तल बहुत तपता है। इस तल पर मच्छर भी बहुत लगते हैं। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है। मच्छर जनित बीमारियों से छात्राएं बीमार भी होती रहती हैं। इस फरवरी में ही ऊपर के तल पर रहने में दिक्कत होने लगी है। अभी पूरी गर्मी बाकी है। कई बार कमरे से बाहर गलियारे में पढ़ना पड़ता है। ज्योति ने बताया कि छात्रावास के ऊपर लगी टंकी की सफाई समय-समय पर होनी चाहिए। कई बार पानी में केंचुए भी दिखाई देते हैं। भले ही पेयजल के रूप में उसका इस्तेमाल नहीं होता लेकिन दूसरे कामों में वही पानी उपयोग में लाया जाता है।
दूसरे तल पर लगे नया वाटर कूलर
शिब्ली नेशनल कालेज में बीए की छात्रा अमीषा ने बताया कि परिसर में सफाई की समस्या नहीं है, लेकिन पेयजल के लिए सिर्फ एक वाटर कूलर है। उसे भूतल पर लगाया गया है। जबकि ऊपर के तल पर रहने वाली छात्राओं को भी पानी की जरूरत पड़ती है। उसके लिए बार-बार उन्हें नीचे जाना पड़ता है। नीचे का वाटर कूलर पुराना भी हो गया है। उसके मोटर से तेज आवाज आती है। दूसरे तल पर रहने वाली छात्राओं के लिए नया वाटर कूलर लगना आवश्यक है। इसके लिए वार्डेन से निवेदन किया गया है।
गरीब छात्राओं को किराया में मिले छूट
डीएवी में बीएससी की छात्रा वैष्णवी ने बताया कि उसका पिछली बार का स्कॉलरशिप का पैसा आ गया, लेकिन इस बार नहीं मिला है। वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में भी जुटी हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे जिलों में भी परीक्षा देने जाना पड़ेगा। घर की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि बार-बार जाने के लिए किराया मिले। इसलिए गरीब वर्ग की छात्राओं को आने-जाने के लिए रोडवेज बसों के किराए में छूट मिलनी चाहिए।
बंदर बहुत उत्पात करते हैं
बंधन और अंजलि ने बताया कि छात्रावास में बंदरों का भी आतंक है। गलियारों में जाली लगाई गई है लेकिन दरवाजा कई बार खुला रह जाता है। उससे बंदर गलियारे में घुस जाते हैं। कई बार दरवाजा खोलकर पढ़ने के दौरान कक्ष में भी घुस जाते हैं। खाने-पीने के सामान उठा लेते हैं। विरोध करने पर दौड़ाने लगते हैं। कमरे के बाहर टंगे कपड़े उठा ले जाते हैं। उन्हें फाड़ देते हैं। इससे काफी नुकसान हो जाता है।
छात्राओं की पीड़ा
बीएड के बाद एमए कर रही हूं। दस हजार रुपये शुल्क लिया गया था। प्रथम वर्ष से छात्रवृत्ति और प्रतिपूर्ति नहीं मिली है।
-सुनीता कुमारी
शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति के भरोसे ही स्पेशल डीएड में दाखिला लिया। शुल्क प्रतिपूर्ति की पूरी राशि खाते में नहीं गई।
-प्रज्ञा कुमारी
पांच साल से हॉस्टल में बिजली कटौती से परेशानी झेलनी पड़ती है। विकल्प रूप में कोई व्यवस्था होनी चाहिए।
-आरती राव
एक ही वाटर कूलर होने से गर्मी में पेयजल संकट रहता है। एक और वाटर कूलर लगने से गर्मी में राहत मिल सकती है।
-अमिशा गौतम
हम छात्राओं को नि:शुल्क परिवहन सुविधा नहीं मिलती। पैसे के अभाव में कभी-कभी परीक्षा छोड़नी पड़ जाती है।
-वैष्णवी कुमारी
हॉस्टल में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा न होने से दिक्कत होती है। वाई-फाई की भी सुविधा नहीं है।
-दुर्गावती
बाहर गंदगी के चलते मच्छरों का प्रकोप रहता है। मलेरिया बुखार की आशंका बनी रहती है। हॉस्टल के पीछे सफाई नहीं होती।
-कविता
बंदर जाली से अंदर घुस जाते हैं। कपड़े तक फाड़ देते हैं। उनसे डर लगता है, बचकर रहना पड़ता है।
-बंधन कुमारी
कमरे की आलमारी टूट गई है। उसमें चूहे घुसकर काफी नुकसान कर देते हैं। उसकी मरम्मत कराने की जरूरत है।
-शालू कुमारी
अभ्युदय कोचिंग बहुत दूर है। छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को उसका फायदा नहीं मिल पाता है।
-निशा कुमारी
यूपी में टीचर की वैकेंसी नहीं निकल रही है। मजबूरी में गैर राज्यों में नौकरी के लिए आवेदन करना पड़ता है।
-ज्योति
बाहर डिजिटल लाइब्रेरी में पढ़ने पर हर महीने सात सौ रुपये खर्च होते हैं। हॉस्टल में यह व्यवस्था होने से राहत होगी।
-नेहा कुमारी
सुझाव :
हॉस्टल के अंदर डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था की जाए जिससे छात्रों को बाहर न जाना पड़े। इससे पैसे की भी बचत होगी।
हॉस्टल के वाचनालय में प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित किताबें रखी जाएं जिससे छात्राएं यहीं तैयारी कर सकें।
हॉस्टल में इनवर्टर लगने से बिजली कटौती होने पर भी कमरे में उजाला रहेगा, पढ़ाई जारी रहेगी।
हॉस्टल की बाउंड्रीवाल के पीछे गंदगी साफ हो। मच्छरों से बचाने के लिए समय-समय पर दवा का छिड़काव कराया जाए।
कॉलेजों में अध्ययनरत छात्राओं की छात्रवृत्ति, प्रतिपूर्ति राशि समय से दी जाए ताकि उन्हें आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
शिकायतें :
हॉस्टल में मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। रात की नींद हराम हो जाती है। पढ़ाई भी प्रभावित होती है। बीमारी की आशंका बनी रहती है।
बिजली कटौती से हॉस्टल में रात में अंधेरा छा जाता है। उमस भरी गर्मी में कमरे में रहना मुश्किल हो जाता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बाहर जाना पड़ता है। छह सौ रुपये खर्च होते हैं। इतने में सब्जी की व्यवस्था हो जाती।
छात्रवृत्ति समय से न मिलने से आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। कोचिंग के पैसे की व्यवस्था नहीं हो पाती है।
वाई-फाई की सुविधा न होने से नेटवर्क की समस्या रहती है। इस वजह से ऑनलाइन पढ़ाई में दिक्कत आती है।
बोले जिम्मेदारः
दूर होंगी हॉस्टल की समस्याएं
मच्छरों से निजात दिलाने के लिए हॉस्टल में फागिंग कराई जाएगी। छात्राओं के कमरे की खराब आलमारियों की मरम्मत का आदेश दिया गया है। छात्रावास परिसर के पीछे गंदगी दूर करने के लिए कई बार नगरपालिका को कहा जा चुका है। फिर पत्र लिखा जाएगा। छात्रावास में इनवर्टर लगवाने का भी प्रयास होगा।
मोतीलाल, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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