जौनपुर के बाद मुरादाबाद में हिजाब पर हंगामा, छात्राएं बोलीं- नहीं उतारेंगे, छोड़ देंगे बोर्ड परीक्षा
जौनपुर के बाद मुरादाबाद में हिजाब को लेकर हंगामा हुआ है। भोजपुर क्षेत्र के एक परीक्षा केंद्र पर छात्राओं ने हिसाब उतरवाने पर विरोध जताया। छात्राओं ने यहां तक कह दिया कि भले ही साल खराब हो जाए हिजाब नहीं उतारेंगे।
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यूपी बोर्ड की परीक्षा के दौरान जौनपुर के बाद अब मुरादाबाद में हिजाब को लेकर जमकर शोर-शराबा हुआ। परीक्षा देने आई चार छात्राओं को हिजाब पहनकर अंदर जाने से रोका गया तो उन्होंने विरोध कर दिया। कहा कि वे हिजाब नहीं उतारेंगी भले ही उन्हें परीक्षा छोड़नी पड़े। विवाद बढ़ा तो डीआईओएस को सूचना देने के साथ ही पुलिस भी बुला ली गई। डीआईओएस ने महिला शिक्षकों से जांच कराने के बाद चारों छात्राओं को हिजाब में ही पेपर देने की इजाजत दे दी।
विवाद सोमवार को भोजपुर क्षेत्र के इस्लामनगर स्थित वाईपी सिंह इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर हुआ। सुबह की पाली में हिजाब में हिंदी का पेपर देने आई छात्राओं को चेकिंग के दौरान गेट पर रोक दिया गया। जब उनसे हिजाब उतारने को कहा गया तो उन्होंने इससे मना कर दिया। कहा कि उन्हें परीक्षा छोड़ना मंजूर है लेकिन हिजाब उतारना नहीं। इस पर वहां शोर-शराबे की स्थिति बन गई।
विवाद बढ़ा तो केंद्र व्यवस्थापक ने डीआईओएस देवेंद्र कुमार पांडेय को पूरे मामले की जानकारी दी। डीआईओएस ने एकांत में छात्राओं की जांच शिक्षिकाओं से कराके हिजाब में ही परीक्षा देने की अनुमति दे दी। छात्राओं के अभिभावकों ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी। कहा कि इस बारे में उन्हें पहले ही बताया जाना चाहिए था।
कॉलेज के प्रधानाचार्य कुलदीप कुमार ने कहा कि हिजाब पहनकर परीक्षा देने पहुंची छात्राओं को महिला शिक्षक ने गेट पर रोका था। पहचान के लिए कहने के बाद भी छात्राओं ने हिजाब हटाने से इनकार कर दिया। बाद में जांच के बाद उनकी पहचान करने के बाद उन्हें अंदर जाने की अनुमति दे दी गई थी। पहचान के लिए ही हिजाब उतारने को कहा गया था ताकि परीक्षा की शुचिता बनी रहे।
वहीं, डीआईओएस देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि हिजाब चेक कराने को लेकर कुछ छात्राओं ने आपत्ति जताई थी। केंद्र व्यवस्थापक से कहकर महिला शिक्षकों ने उनकी जांच कराने के बाद उन्हें हिजाब में ही परीक्षा की अनुमति दे दी गई। साथ ही केंद्र व्यवस्थापक और शिक्षकों को हिदायत भी दी गई है कि हिजाब के कारण किसी को न रोका जाए लेकिन महिला शिक्षकों की मदद से उनकी पहचान कर ली जाए।
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