AAP की मोहल्ला क्लीनिक में खामियों की भरमार, एक मिनट भी नहीं देखते डॉक्टर; कैग रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासा
Mohall Clinic Cag Report: आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली में बड़े जोर-शोर से जिस मोहल्ला क्लीनिक को शुरू किया था उसमें कई तरह की खामियां हैं। यह बात कैग रिपोर्ट से सामने आई है। इन क्लीनिकों के डॉक्टर अपने यहां आने वाले ज्यादातर मरीजों को कंसल्ट करने के लिए एक मिनट से भी कम समय दे थे।
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Mohall Clinic Cag Report: आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली में बड़े जोर-शोर से जिस मोहल्ला क्लीनिक को शुरू किया था उसमें कई तरह की खामियां हैं। यह बात कैग रिपोर्ट से सामने आई है। इन क्लीनिकों के डॉक्टर अपने यहां आने वाले ज्यादातर मरीजों को कंसल्ट करने के लिए एक मिनट से भी कम समय दे थे। इनमें से कई क्लीनिकों में पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर, एक्स-रे व्यूअर, थर्मामीटर और ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग डिवाइस जैसे बुनियादी मेडिकल उपकरण तक नहीं थे।
70 फीसदी मरीजों को एक मिनट से कम कंसल्टेशन मिला
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्व, आर्थिक, सामाजिक एवं सामान्य क्षेत्रों और सार्वजनिक उपक्रमों पर सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में ये चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। ऑडिट से पता चला है कि जिन क्लीनिकों का मूल्यांकन किया गया था, उनमें से 18 प्रतिशत क्लीनिक 15 दिनों से लेकर 23 महीने तक बंद रहे, जिसकी मुख्य वजह डॉक्टरों की अनुपलब्धता, इस्तीफे और पैनल से बाहर होना था। ऑडिट में पाया गया कि मूल्यांकन किए जाने के समय चार जिलों- उत्तर पूर्व, दक्षिण, दक्षिण पश्चिम और पश्चिम में 218 क्लीनिकों में से 41 बंद रहे। चिकित्सा सेवाएं काफी प्रभावित हुईं, क्योंकि अक्टूबर 2022 और मार्च 2023 के बीच मोहल्ला क्लीनिकों में आने वाले 70 फीसदी मरीजों को एक मिनट से भी कम समय का कंसल्टेशन मिला।
कैग को क्या-क्या खामियां मिली
- कैग रिपोर्ट में दवाओं की उपलब्धता को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है, क्योंकि जिन 74 क्लीनिकों की समीक्षा की गई, वे जरूरी ड्रग लिस्ट (ईडीएल) में सूचीबद्ध 165 दवाओं का पूरा स्टॉक रखने में विफल रहे।
- सप्लाई चेन की दिक्कतें दवा वितरण में स्पष्ट हैं, जहां आपूर्तिकर्ताओं से अक्सर अधूरे या आंशिक रूप से पूरे किए गए ऑर्डर मिलते थे।
- ऑडिट में पाया गया कि कई ईडीएल दवाएं या तो केंद्रीय खरीद एजेंसी द्वारा नहीं खरीदी गईं या ऑर्डर दिए जाने के बावजूद विक्रेताओं द्वारा वितरित नहीं की गईं। दवाओं की डिलीवरी में तीन से छह महीने की देरी के कारण क्लीनिक मरीजों की समय पर देखभाल नहीं कर पाए।
- सीएजी ने पाया कि 16 नवंबर, 2022 से 14 दिसंबर, 2022 तक दिल्ली के क्लीनिकों में लैब सेवाएं पूरी तरह से अनुपलब्ध थीं, और कोई वैकल्पिक परीक्षण व्यवस्था भी नहीं थी।
- आप सरकार के 10 साल के शासन के बाद, प्लांड (योजना बनाई गई) मोहल्ला क्लीनिकों में से केवल 53 प्रतिशत ही स्थापित किए गए जबकि उनके दूसरे कार्यकाल में केवल 38 क्लीनिक बनाए, जो उनके स्वास्थ्य सेवा लक्ष्य से कम थीं।
- आप सरकार ने 2015 में वादा किया था कि वह स्वास्थ्य सेवा पहुंच में सुधार के लिए 1,000 क्लीनिक स्थापित करेगी, जो पूरा नहीं हुआ।