साइबर शातिरों ने 21 लोगों से ठगे छह करोड़, ठगी के तरीके बदले, कर रहे डिजिटल अरेस्ट
प्रयागराज में साइबर शातिरों ने छह महीने में 21 लोगों से छह करोड़ ठगे हैं। शातिरों ने अपने ठगी के तरीके भी बदल लिए और डिजिटल अरेस्ट करके लोगों को धमकाकर और डर बैठाकर लूटना शुरू कर दिया है।

प्रयागराज में साइबर ठगी के मामले बढ़ गए हैं। पिछले साल पांच लाख या इससे अधिक रुपये की ठगी के 18 मामले सामने आए थे, इस साल जनवरी से अब तक लगभग छह महीने में ही यह संख्या 21 पहुंच गई है। खास बात यह है कि इस 21 में दो मामले ऐसे भी हैं, जिसमें ठगी की रकम एक करोड़ से अधिक है। इससे बचने के लिए सतर्कता जरूरी है क्योंकि न लूट, न छिनैती, न चोरी और न ही सेंधमारी सिर्फ लालच देकर साइबर ठग संगीन अपराधियों से भी ज्यादा पैसे उड़ा रहे हैं। शहर के 21 लखपतियों से छह महीने में हुई ठगी की रकम भी चौंकाने वाली है। शातिरों ने एक-दो नहीं बल्कि छह करोड़ रुपये उड़ा दिए।
मुकदमे से कई गुना ज्यादा शिकायतें
प्रयागराज कमिश्नरेट में साइबर थाना खुला है। अभी इस थाने में पांच लाख से ज्यादा की ठगी के मामले ही दर्ज हो रहे हैं। इसके अलावा साइबर ठगी के पीड़ितों की मदद के लिए साइबर सेल का गठन किया गया है। साइबर सेल हर तरह के साइबर अपराध के पीड़ितों की मदद करती है। जनवरी से लेकर अब तक साइबर अपराध के 214 मामले जिले के विभिन्न थानों में दर्ज हो चुके हैं। हर रोज औसतन तीन से अधिक शिकायतें सिर्फ साइबर सेल में पहुंच रही हैं, ज्यादातर मामले ठगी के ही होते हैं। प्रारंभिक जांच के बाद ही एफआईआर का आदेश किया जाता है। इस दौरान कई पीड़ित बार-बार थाने का चक्कर लगाकर मुकदमा भी नहीं दर्ज कराते हैं।
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केस 2
जार्जटाउन की एक बुजुर्ग महिला को साइबर ठगों ने वीडियो कॉल करके तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर घर में बंधक बनाये रखा। साइबर ठगों ने अपने बैंक खाते में एक करोड़ 48 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिया। साइबर सेल ने ठगी का केस दर्ज करके इस घटना का खुलासा किया। हालांकि मुख्य आरोपी अभी पकड़ा नहीं जा सका। पता चला कि वह नेपाल में छिपा हुआ है।
केस 1
कालिंदीपुरम निवासी पूर्व सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा को अनुराग ठाकुर के नाम से एक व्यक्ति ने व्हाट्स एप ग्रुप में जोड़ा। ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लालच देकर निवेश कराया। डॉक्टर ने कई बार में 1.26 करोड़ रुपये निवेश किया। साइबर ठगों ने ट्रेडिंग पेज बनाकर डॉक्टर आलोक से 3.11 करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू बताई, लेकिन रुपये कैश कराने के लिए कहने पर 3.17 करोड़ का लोन दिखाकर पेज ब्लॉक कर दिया। ठगी के शिकार हुए पूर्व सीएमओ ने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
ठगों ने बदल दिया ठगी का तरीका
पहले ओटीपी पूछकर साइबर ठग ऑनलाइन पैसा खातों से निकाल लेते थे, लेकिन लोगों में ठगी के इस तरीके के प्रति जागरूकता बढ़ने के बाद इस तरह की ठगी में कमी आई है। अब नए तरीके से साइबर ठगी के शिकार बना रहे हैं। बुजुर्गों को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे ठगी करने के साथ ही महिलाओं को उनके बेटे को रेप केस में फंसाने की धमकी देकर शिकार बना रहे हैं।
जागरूकता ही एक मात्र उपाय
साइबर थाना प्रभारी राजीव तिवारी ने बताया कि साइबर ठगों से बचने के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है। अगर कोई भी पुलिसकर्मी बनकर कॉल करे तो डरने की जगह सीधे 1930, साइबर थाने या साइबर हेल्प लाइन नंबर पर कॉल करें। साइबर ठगों से पीड़ित होने वालों की मदद के लिए जिले के हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क बनाया गया है।
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