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तेज ट्रायल, गवाहों की पेशी... योगी सरकार में तेजी से कैसे 'ठिकाने' लगाए जा रहे मुख्तार जैसे माफिया?

योगी सरकार में एक के बाद एक माफियाओं का खात्मा हो रहा है। इसके पीछे अपराधियों के प्रति सरकार की सख्ती तो है ही, साथ ही माफियाओं के खिलाफ पेंडिंग केसेज को कोर्ट में मुस्तैदी से पेश करना भी हम रहा।

Deepak Mishra लाइव हिंदुस्तान, नई दिल्लीSun, 30 April 2023 08:05 PM
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तेज ट्रायल, गवाहों की पेशी... योगी सरकार में तेजी से कैसे 'ठिकाने' लगाए जा रहे मुख्तार जैसे माफिया?

योगी सरकार में एक के बाद एक माफियाओं का खात्मा हो रहा है। इसके पीछे अपराधियों के प्रति सरकार की सख्ती तो है ही, साथ ही माफियाओं के खिलाफ पेंडिंग केसेज को कोर्ट में मुस्तैदी से पेश करना भी काफी अहम रहा। मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसारी के खिलाफ इसी सक्रियता ने दोनों भाइयों को सजा दिलाई। इनके खिलाफ 20-20 साल से केसेज पेंडिंग थे। लेकिन सपा और बसपा के शासन में लचरता ने इन्हें हमेशा बचाए रखा। लेकिन योगी सरकार के आते ही न सिर्फ ट्रायल में तेजी आई, बल्कि गवाहों को पेश करके मामले को अंजाम तक पहुंचा गया।

जुटाए गए पेंडिंग केसेज
एडिशनल डायरेक्टर जनरल (प्रॉसीक्यूशन) आशुतोष पांडेय ने कहा कि हमने मुख्तार अंसारी और उनके परिवार के खिलाफ शिकंजा कसा। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक उन्होंने कहा कि पिछले 20 साल से गवाहों के अभाव में इस परिवार के खिलाफ जितने भी केसेज पेंडिंग थे, उन्हें जुटाया गया। इसके बाद सबसे पहले मुख्तार के खिलाफ सभी मामलों की रोजाना के हिसाब से मॉनिटरिंग शुरू हुई। पांडेय ने बताया कि अभी मुख्तार के ऊपर जो गैंगस्टर ऐक्ट लगा है वह 19 नवंबर 2007 में लगा है। यह 1996 में नंदकिशोर रुंगटा के अपहरण और 2005 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामलों में लगाया गया था। इन मामलों में पुलिस ने 2 सितंबर, 2010 को चार्जशीट पेश की थी और इसका ट्रायल 23 सितंबर 2022 को शुरू हुआ।

फिर शुरू हुई गवाही
इसके बाद शुरू हुआ गवाही का सिलसिला। आशुतोष पांडेय के मुताबिक गवाहों को पूरी सुरक्षा दी गई और कोशिश की गई इसमें तेजी रहे। इसके बाद 3 अक्टूबर, 2023 को ट्रायल की शुरुआत हुई और अगले छह महीनों में कोर्ट का फैसला आ गया। पांडेय बताते हैं कि मुख्तार मामले में सुनवाई के दौरान कुछ गवाह डर भी गए थे। लेकिन प्रॉसीक्यूशन ने कोर्ट में दलील दी कि माफिया के डर के चलते ऐसा हुआ है। किडनैपिंग और मर्डर के दोनों मामलों में एमपी-एमएलए कोर्ट में कुल 27 गवाह पेश किए गए, जबकि कुल 143 तारीखें पड़ीं।

पहले नहीं पहुंचते थे गवाह
मुख्तार और अफजाल जैसे माफियाओं का डर कहें या शासन की लचरता कि पुलिस को चार्जशीट पेश करने में तीन साल लग गए। मुख्तार के खिलाफ मात्र 10 गवाह ही कोर्ट तक पहुंचे, जबकि तीन तो बार-बार सम्मन के बावजूद नहीं आए। वहीं, गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी के खिलाफ 14 में से केवल सात गवाह ही कोर्ट तक पहुंचे थे। आशुतोष पांडेय ने कहा कि अगर इन गवाहों को भी 2018 की तरह विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम मिली होती तो नतीजे कुछ और होते। एडीजी ने बताया कि गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करके हमने मुख्तार के खिलाफ चार मामलों में सजा सुनिश्चित की। वहीं, पांच अन्य मामले ट्रायल कोर्ट में फ्रेम किए गए। उन्होंने बताया कि अफजाल के खिलाफ एक केस तो सितंबर 2010 में ही दर्ज हुआ था, लेकिन इसमें ट्रायल 12 साल बाद शुरू हो पाया।

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