असम में परिसीमन को लेकर क्यों मचा बवाल? बंद का आह्वान, हिरासत में कई प्रदर्शनकारी
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को कहा था कि राज्य में निर्वाचन क्षेत्रों की परिसीमन कवायद में कोई समस्या नहीं है, जिसका मसौदा प्रस्ताव पिछले सप्ताह प्रकाशित किया गया था।

भारत के चुनाव आयोग (ईसी) द्वारा प्रस्तावित परिसीमन मसौदे के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को मंगलवार सुबह असम के करीमगंज में हिरासत में लिया गया। असम में विरोध की ये आग कई दिनों से जल रही है लेकिन मंगलवार को राजनीतिक पार्टियों के बंद के आह्वान के बीच कई प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए। परिसीमन मसौदे के खिलाफ कांग्रेस और एआईयूडीएफ सहित कई राजनीतिक दलों ने मंगलवार को 12 घंटे के बंद का आह्वान किया है। बंद का आह्वान करीमगंज के अलावा कछार और हलाकांडी समेत बराक घाटी के कई जिलों में किया गया है।
क्या है असम का परिसीमन मसौदा?
निर्वाचन आयोग ने पिछले मंगलवार को 1976 के बाद पहली बार असम के लिए परिसीमन मसौदा दस्तावेज जारी किया था। इसके मुताबिक, पूर्वोत्तर राज्य में विधानसभा सीट की संख्या 126 और लोकसभा सीट की संख्या 14 पर बरकरार रखने का प्रस्ताव दिया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने प्रस्ताव दिया है कि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीट को आठ से बढ़ाकर नौ और अनुसूचित जनजाति की सीट को 16 से बढ़ाकर 19 किया जाए। निर्वाचन आयोग के परिसीमन मसौदे में अनुसूचित जनजाति के लिए विधानसभा की 19 और दो संसदीय सीट तथा अनुसूचित जाति के लिए विधानसभा की नौ और एक संसदीय सीट आरक्षित करने का प्रस्ताव है।
चुनाव निकाय ने प्रस्ताव दिया कि वेस्ट कार्बी आंगलोंग के स्वायत्त जिलों में विधानसभा सीट की संख्या एक और बोडोलैंड स्वायत्त परिषद क्षेत्रों में तीन (16 से 19) तक बढ़ाई जाए। निर्वाचन आयोग ने अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित दीफू और कोकराझार संसदीय सीट को बरकरार रखा है तथा लखीमपुर संसदीय सीट को अनारक्षित रखा है।
जन सुनवाई के लिए असम जाएंगे मुख्य चुनाव आयुक्त
प्रस्तावों के अनुसार, धेमाजी जिले में एक अनारक्षित विधानसभा सीट होगी। बराक घाटी जिलों- कछार, हैलाकांडी और करीमगंज के लिए दो संसदीय सीट प्रस्तावित की गई हैं। आयोग ने एक संसदीय सीट का नाम काजीरंगा रखने का प्रस्ताव दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे तथा अरुण गोयल जुलाई में मसौदा प्रस्ताव पर जन सुनवाई के लिए असम का दौरा करेंगे।
परिसीमन कवायद 2001 की जनगणना के आधार पर की गई। पिछला परिसीमन 1976 में असम में किया गया था। आयोग ने इस साल 26 मार्च से 28 मार्च तक असम का दौरा किया था और राज्य में परिसीमन कवायद के संबंध में राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों, नागरिक संस्थाओं के सदस्यों, सामाजिक संगठनों, जनता के सदस्यों और मुख्य निर्वाचन अधिकारी, सभी जिलों के उपायुक्तों तथा जिला चुनाव अधिकारियों के साथ बातचीत की। कुल मिलाकर, 11 राजनीतिक दलों और 71 अन्य संगठनों से अभ्यावेदन प्राप्त हुए तथा उन पर विचार किया गया।
परिसीमन प्रस्तावों के विरोध में असम में प्रदर्शन जारी
असम में परिसीमन प्रस्तावों के विरोध में पिछले हफ्ते से ही प्रदर्शन जारी हैं, जबकि राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा नीत गठबंधन के सहयोगियों के साथ-साथ विपक्षी दलों ने भी इस पर अपनी नाराजगी जताई है। परिसीमन के मसौदा प्रस्ताव को लोगों की भावनाओं की अनदेखी कर मतदाताओं का धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण करने की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कोशिश करार देते हुए विपक्षी दलों ने नागरिकों की 'शिकायतों' को निर्वाचन आयोग के समक्ष रखने का फैसला किया है।
शिवसागर जिले के अमगुरी विधानसभा क्षेत्र में शनिवार को असम गण परिषद (अगप) नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भाजपा की सहयोगी अगप के प्रदीप हजारिका कर रहे हैं। एक स्थानीय अगप नेता ने कहा, ''हमारे अमगुरी निर्वाचन क्षेत्र का विलय दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में किया जा रहा है और हम अपनी पहचान खो रहे हैं। हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे और अपना आंदोलन जारी रखेंगे।''
विपक्षी दल ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने शुक्रवार को बराक घाटी के जिलों में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सीमाओं और निर्वाचन क्षेत्रों के नाम की यथास्थिति बरकरार रखी जाए। यह फैसला लिया गया है कि कांग्रेस समेत 12 विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल 30 जून को शिवसागर जिले के दौरा करेगा।
परिसीमन के मसौदा प्रस्ताव से कोई समस्या नहीं: असम के मुख्यमंत्री
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को कहा था कि राज्य में निर्वाचन क्षेत्रों की परिसीमन कवायद में कोई समस्या नहीं है, जिसका मसौदा प्रस्ताव पिछले सप्ताह प्रकाशित किया गया था। उन्होंने कहा कि मसौदा प्रस्ताव का विरोध केवल उन लोगों द्वारा किया गया है, जो प्रक्रिया को नहीं समझते हैं या जिन्हें चुनावी हार नजर आ रही है। एक कार्यक्रम से इतर यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, ''हम एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र हैं, जहां निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण सभी की भलाई को ध्यान में रखकर किया जाता है। आरक्षण एक विशिष्ट समुदाय की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है।''
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