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उम्मीदों का नहीं अंत, क्यों फिर सपा से ही बात करने लगे जयंत; भाजपा से क्यों बिगड़ी बात

जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी के भाजपा संग जाने की अटकलें कुछ दिनों से लग रही हैं। इस बीच रालोद ने सपा से बिगड़े रिश्तों के बीच लोकसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर शर्त रख दी है और 12 सीटों की मांग की है।

Surya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीTue, 11 July 2023 03:31 PM
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उम्मीदों का नहीं अंत, क्यों फिर सपा से ही बात करने लगे जयंत; भाजपा से क्यों बिगड़ी बात

जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी के भाजपा संग जाने की अटकलें कुछ दिनों से लग रही हैं। इस बीच रालोद ने सपा से बिगड़े रिश्तों के बीच लोकसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर शर्त रख दी है। रालोद ने सपा से मांग की है कि उसे 12 सीटें दी जाएं। इसकी वजह यह है कि रालोद यदि राज्य पार्टी का दर्जा पाना चाहती है तो उसे कम से कम 6 फीसदी वोट राज्य में पाने होंगे। आरएलडी को उम्मीद है कि वह लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर पाई तो फिर राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा उसे मिल सकेगा। रालोद ने 2019 में 3 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी जीत नहीं सकी थी। 

पिछले कुछ दिनों से खबरें थीं कि जयंत चौधरी की भाजपा के साथ बातचीत चल रही है। इसके बीच उनका सपा से 12 सीटों की शर्त रखना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि शायद भाजपा से उनकी बात नहीं बन पा रही। सूत्रों का कहना है कि भाजपा से उन्होंने लोकसभा चुनाव में गठबंधन की बात की थी और पश्चिम यूपी की कई सीटों पर दावा ठोका था। वहीं भाजपा का कहना था कि वह अपनी पार्टी का ही भाजपा में विलय कर लें या फिर गठबंधन करना है तो एक या दो सीट से ही संतोष करें। इसके बाद जयंत चौधरी नए सिरे से संभावनाएं तलाश रहे हैं।

अब तो यह भी कहा है कि वह 17 और 18 जुलाई को कर्नाटक में होने वाली विपक्षी दलों की बैठक का भी हिस्सा बनेंगे। इससे पहले वह 23 जून को पटना में हुई मीटिंग में नहीं गए थे। माना जा रहा है कि वह एक बार फिर से अखिलेश के साथ जाने की कोशिश कर सकते हैं, जिनका अब तक किसी बड़े दल के साथ गठबंधन का प्लान नहीं है। खबर है कि जयंत चौधरी बिजनौर, कैराना, मुजफ्फरनगर, नगीना, अमरोहा, मेरठ, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, फतेहपुर सीकरी, बागपत और मथुरा की सीटों पर दावा ठोक रहे हैं।

ये सारी सीटें जाट बहुल हैं और जयंत चौधरी सामाजिक समीकरण एवं सपा के यहां कमजोर रहे इतिहास का हवाला देते हुए दावा ठोक रहे हैं। दरअसल सपा और रालोद के बीच इसी साल हुए निकाय चुनाव के बाद से संबंध बिगड़ गए थे। मेरठ की मेयर सीट समेत कई जगहों पर सपा के साथ रालोद के मतभेद थे। इसके बाद चर्चा यहां तक छिड़ी की जयंत चौधरी कांग्रेस संग गठबंधन कर सकते हैं, लेकिन उस पर भी मुहर नहीं लग पाई। संभावना यहां तक जताई जा रही है कि यदि सपा से फिर झटका लगा तो फिर जयंत चौधरी, बसपा और कांग्रेस के साथ मिलकर एक गठबंधन का हिस्सा हो सकते हैं। 

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