विधवा और आदिवासी हैं राष्ट्रपति इसलिए नई संसद में नहीं बुलाया, क्या यही सनातन धर्म: उदयनिधि स्टालिन
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सवाल किया कि क्या यही सनातन धर्म है? उन्होंने यह भी कहा कि हम इसके खिलाफ आने वाले दिनों में अपनी आवाज उठाना जारी रखेंगे।

तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर सनातन धर्म पर निशाना साधा है। इस बार उन्होंने इसे नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नहीं बुलाए जाने से जोड़ दिया। उदयनिधि ने कहा, 'नए संसद भवन का उद्घाटन किया गया। उन्होंने (भाजपा) उद्घाटन के लिए तमिलनाडु से अधीनम संतों को बुलाया, मगर देश की राष्ट्रपति को आमंत्रित नहीं किया गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वह विधवा हैं और आदिवासी समुदाय से आती हैं।' तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे ने सवाल किया कि क्या यही सनातन धर्म है? उन्होंने आगे कहा कि हम इसके खिलाफ अपनी आवाज उठाना जारी रखेंगे।
उदयनिधि स्टालिन बुधवार को मदुरै में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि कल कुछ हिंदी एक्टर्स आए और नई संसद का दौरा किया। मगर, हमारे राष्ट्रपति को आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने डीएमके यूथ विंग की बैठक में यह बात कही। मालूम हो कि उदयनिधि ने हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में सनातन धर्म को लोगों के बीच विभाजन और भेदभाव को बढ़ावा देने के लिए दोषी ठहराया था। उन्होंने कहा था कि इसे खत्म किया जाना चाहिए। इसे लेकर महाराष्ट्र में मीरा रोड पुलिस ने एक व्यक्ति की शिकायत पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि स्टालिन की टिप्पणियों से सनातन धर्म का पालन करने वालों की भावनाओं और धार्मिक आस्था को ठेस पहुंची है।
राष्ट्रपति मुर्मू को नहीं बुलाने पर TMC का भी सवाल
गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस ने भी सवाल किया था कि पुराने संसद भवन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू को क्यों नहीं बुलाया गया। भारतीय संसद की समृद्ध विरासत के उपलक्ष्य में केंद्रीय कक्ष में एक समारोह आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने की। TMC नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, 'केंद्रीय कक्ष में आयोजित समारोह में भारत की राष्ट्रपति नहीं थीं। क्या उन्हें आमंत्रित किया गया था? उनकी अनदेखी क्यों की गई?'
नई संसद के उद्घाटन में भी नहीं बुलाई गईं राष्ट्रपति
विपक्षी दलों ने मई में नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए राष्ट्रपति को आमंत्रित नहीं किए जाने पर भी आपत्ति जताई थी। विपक्ष के 21 दलों ने उद्घाटन कार्यक्रम का बहिष्कार किया था। उनकी दलील थी कि नए भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति मुर्मू को करना चाहिए, न कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को। बता दें कि संसद के नए भवन में मंगलवार को लोकसभा और राज्यसभा की पहली बैठक हुई। नए भवन के 'कांस्टीट्यूशन हॉल' में लोकतंत्र की विकास यात्रा को विभिन्न वस्तुओं और चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। संसद का नया भवन श्रीयंत्र से प्रेरित है जिसका इस्तेमाल हिंदू परंपराओं में पूजा के लिए होता है। इसे पवित्र ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।
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