केसीआर को उनके गढ़ में हराने का प्लान, CM को कितनी चुनौती दे पाएंगे कांग्रेस उम्मीदवार रेवंत रेड्डी
कांग्रेस नेता ने कहा, 'राज्य के मुख्यमंत्री केसीआर के खिलाफ रेड्डी को खड़ा करना एक स्मार्ट और रणनीतिक कदम है। इससे निर्वाचन क्षेत्र के स्थानीय कांग्रेस नेताओं को पार्टी छोड़ने से रोका जा सकेगा।'

भारत राष्ट्र समिति (BRS) के अध्यक्ष और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (KCR) के खिलाफ कांग्रेस ने रेवंत रेड्डी को चुनावी मैदान में उतारा है। रेड्डी तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं, जो कामारेड्डी विधानसभा क्षेत्र से केसीआर को चुनौती देंगे। कांग्रेस आलाकमान के इस फैसले ने राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा दिया है, जहां 30 नवंबर को विधानसभा चुनाव होना है। मामले के जानकार सीनियर कांग्रेस नेता ने कहा कि कामारेड्डी में KCR के खिलाफ रेवंत रेड्डी को उतारने का फैसला बहुत पहले ही लिया गया था, मगर आखिरी क्षण तक छिपाकर रखा गया। इस तरह नामांकन प्रक्रिया बंद होने से सिर्फ चार दिन पहले यह घोषणा की गई।
कांग्रेस नेता ने कहा, 'केसीआर के खिलाफ रेड्डी को खड़ा करना एक स्मार्ट और रणनीतिक कदम है। इससे निर्वाचन क्षेत्र के स्थानीय कांग्रेस नेताओं को पार्टी छोड़ने से रोका जा सकेगा।' उन्होंने कहा कि पूर्व मंत्री मोहम्मद अली शब्बीर इससे पहले 2 बार कामारेड्डी सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। माना जा रहा था कि कांग्रेस इस बार भी उन्हें मौका दे सकती है। मगर, शब्बीर को निजामाबाद (शहरी) निर्वाचन क्षेत्र से लड़ने के लिए भेज दिया गया। इस तरह कामारेड्डी के लिए रेवंत रेड्डी के नाम की घोषणा की गई।
सर्वे में केसीआर के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर की बात
21 अगस्त को बीआरएस के 115 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की गई थी। इसमें साफ था कि केसीआर गजवेल और कामारेड्डी दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से पार्टी के उम्मीदवार होंगे। इसके बाद माइंडशेयर एनालिटिक्स के अपने पॉलिटिकल रणनीतिकार सुनील कनुगोलू के नेतृत्व में कांग्रेस की टीम कामारेड्डी पहुंची, जहां पर एक सर्वे किया गया। इस दौरान निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी नेताओं और आम लोगों के विचार जाने गए। कांग्रेस नेता ने बताया, 'सर्वे से सामने आया कि निर्वाचन क्षेत्र में सत्ता विरोधी लहर है। मगर, सीएम केसीआर का मुकाबला करने के लिए मजबूत उम्मीदवार की जरूरत होगी।'
KCR के खिलाफ मजबूत लीडर की पड़ी जरूरत
कांग्रेस लीडर ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि शब्बीर एक अच्छे उम्मीदवार हैं। लेकिन, अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति उनका नरम रुख रहा है। इसलिए मुख्यमंत्री के खिलाफ वह यहां से कड़ी टक्कर नहीं दे पाते। वह 2009 से लगातार चुनाव हार रहे थे। ये सब देखते हुए पार्टी ने विकल्प के तौर पर रेवंत रेड्डी की उम्मीदवारी पर विचार किया। राजनीतिक विश्लेषक श्रीराम कर्री भी इस मामले पर अपनी राय जाहिर करते हैं। उन्होंने कहा, 'कामारेड्डी से रेवंत रेड्डी को खड़ा करना इस आलोचना से बचने का प्रयास होगा कि कांग्रेस के पास KCR के खिलाफ लड़ने के लिए सही उम्मीदवार नहीं है। खासतौर से बीजेपी ने गजवेल में मुख्यमंत्री के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार उतारा है। इसे देखते हुए कांग्रेस भी कामारेड्डी से लोकप्रिय चेहरे की तलाश में थी। इस तरह यहां रेवंत रेड्डी से बेहतर कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं होता।'
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