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विपक्षी दलों की आवाज को सदन से बाहर करना गंभीर मसला, राघव चड्ढा मामले में बोला सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court News: शीर्ष अदालत ने कहा कि आम तौर पर सदन की कार्यवाही बाधित किए जाने पर सदस्य को एक सत्र के लिए निलंबित किया जाता है, क्या आप सांसद राघव चड्ढा की गलती उससे भी बड़ी है?

Nisarg Dixit हिन्दुस्तान, नई दिल्लीTue, 31 Oct 2023 06:04 AM
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विपक्षी दलों की आवाज को सदन से बाहर करना गंभीर मसला, राघव चड्ढा मामले में बोला सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा से अनिश्चितकाल तक के लिए निलंबित किए जाने पर सोमवार को चिंता जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि इसका इसका असर लोगों के प्रतिनिधित्व के अधिकार पर पड़ेगा। पीठ ने टिप्पणी की कि अनुपातिकता के सिद्धांत को ध्यान में रखा जाना चाहिए और विपक्षी दलों की आवाज को बाहर करना एक गंभीर मसला है। कोर्ट ने कहा कि हमें उन आवाजों को संसद से बाहर न करने के बारे में बहुत सावधान रहना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने आप सांसद की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में सांसद ने मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा से अनिश्चितकाल के लिए निलंबित किए जाने के राज्यसभा सचिवालय के फैसले को चुनौती दी है। कोर्ट ने यह सवाल भी किया कि क्या विशेषाधिकार समिति को किसी सदस्य को अनिश्चितकाल तक के लिए निलंबित करने का अधिकार है?

एक सत्र के लिए होता निलंबन
शीर्ष अदालत ने कहा कि आम तौर पर सदन की कार्यवाही बाधित किए जाने पर सदस्य को एक सत्र के लिए निलंबित किया जाता है, क्या आप सांसद राघव चड्ढा की गलती उससे भी बड़ी है? पीठ ने राज्यसभा सचिवालय की ओर से पेश अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से सवाल किया कि क्या याचिकाकर्ता ने जो किया, उससे सदन की गरिमा कम होती है? क्या याचिकाकर्ता के कृत्य से विशेषाधिकार का हनन होता है? 

कई सवाल उठाते हुए शीर्ष अदालत ने अटार्नी जनरल से यह बताने के लिए कहा कि क्या याचिकाकर्ता द्वारा सभापति को पत्र लिखकर माफी मांग ली जाए तो उनका निलंबन रद्द हो जाएगा या फिर हमें सुनवाई करनी होगी। पीठ ने कहा कि इस मसले पर कानून बनना चाहिए और यह हम कर सकते हैं। इसके साथ ही, पीठ ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी।

अटॉर्नी जनरल ने कहा, मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में
इससे पहले, अटार्नी जनरल वेंकटरमणी ने पीठ से कहा कि इस मामले में अदालत को दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। यदि शीर्ष अदालत मामले की सुनवाई करती है तो संसद का असम्मान कर रही है।

अनिश्चितकाल के लिए निलंबित नहीं करने की दलील दी
आप नेता राघव चड्ढा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने पीठ से कहा कि यदि उनके मुवक्किल 60 दिन तक सदन नहीं जाएंगे तो सीट को खाली घोषित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में किसी भी सदस्य को अनिश्चितकाल तक के लिए निलंबित नहीं किया जा सकता। द्विवेदी ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ विशेषाधिकार के हनन का मामला नहीं बनता और यदि बनता भी है तो नियम 256 के तहत अनिश्चितकाल तक के लिए निलंबित नहीं किया जा सकता।

क्या है मामला
मॉनसून सत्र के दौरान 11 अगस्त को दिल्ली सेवा (संशोधन) विधेयक के मसले पर पांच सांसदों के कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर के आरोप में आप सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा से निलंबित किया गया था। उनका यह निलंबन विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट आने तक के लिए है। शीर्ष अदालत में राज्यसभा सचिवालय के खिलाफ दाखिल याचिका में पंजाब से राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने सदन से अनिश्चितकाल के लिए निलंबित किए जाने को मनमाना और अवैध बताते हुए रद्द करने की मांग की है।