कोच हो तो क्या, कहीं छू सकते हो? बच्ची की शिकायत पर जज ने सुनाई कठोर कारावास, जुर्माना भी ठोका
POCSO Court: मुंबई की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि एक कोच से यह अपेक्षा नहीं की जाती है कि वह छात्राओं को उनके नितंबों पर थप्पड़ मारकर या उनकी छाती पर चुटकी काटकर उन्हें दंडित करेगा।

मुंबई की एक अदालत ने पांच साल पुराने मामले में एक कोच को पांच साल कठोर सश्रम कारावास की सजा सुनाई है और उसकी दलीलों को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि कोच होने से उसे किसी बच्ची की छाती या हिप पर बेवजह हाथ से मारने या चुटकी काटने की इजाजत नहीं मिल जाती है। 27 वर्षीय आरोपी कोच ने तर्क दिया था कि बैडमिंटन प्रैक्टिस के दौरान गलती करने पर सजा देने के लिए उसने बच्ची की छाती पर चुटकी काटी थी और नितंबों पर थप्पड़ मारा था।
यौन अपराधों से बच्चों की विशेष सुरक्षा अधिनियम (POCSO) अदालत ने 10 वर्षीय छात्रा की यौन शोषण के आरोपों पर गुरुवार को कोच को दोषी ठहराया और पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। यह मामला 2019 का है। अपने फैसले में जज ने कहा कि एक कोच से यह अपेक्षा नहीं की जाती है कि वह छात्राओं को उनके नितंबों पर थप्पड़ मारकर या उनकी छाती पर चुटकी काटकर उन्हें दंडित करेगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस हरकत को आकस्मिक या अनजाने में किया गया कृत्य नहीं कहा जा सकता है। जज ने कहा कि 10 जुलाई, 2019 को हुई घटना से डेढ़ महीने पहले तक लड़की को आरोपी द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि अगर गलती से छूने और निकटता के कारण उसे अजीब महसूस हो तका तो उसने पहले ही शिकायत कर दी होती, लेकिन उसने शिकायत तब की, जब उसे लगा कि बेवजह छुआ जा रहा है।
जज ने कहा, “घटना के दिन, कोचिंग के दौरान, पीड़िता को लगा कि आरोपी ने उसे जानबूझकर छुआ था, इसलिए उसने शिकायत की। 10 साल की लड़की के नितंब पर चुटकी काटना और थप्पड़ मारना निश्चित रूप से सज़ा का तरीका नहीं हो सकता है।"
आरोपी कोच, जिसे पोक्सो के तहत गिरफ्तार किया गया था, 11 जुलाई से 28 अगस्त 2019 तक जेल में रह चुका है। उसे अब पूरे पांच साल की कठोर सजा काटनी होगी। कोर्ट ने उस पर 5000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। ये रकम पीड़िता को देने का निर्देश दिया गया है।