दोस्तों को भी छका देते थे मुलायम सिंह यादव, इन 5 फैसलों से चौंकाया और बदल दी तस्वीर
मुलायम सिंह यादव के सियासी दांव अकसर अप्रत्याशित होते थे और उन्हें सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, मायावती से लेकर तमाम नेताओं को अपने फैसलों से चौंकाया था। हालांकि इसके बाद भी उनके सबसे रिश्ते अच्छे थे।

मुलायम सिंह यादव पंचतत्व में विलीन हो गए हैं और अब उनके राजनीतिक किस्से ही हमारे बीच में हैं। मुलायम सिंह यादव के सियासी दांव अकसर अप्रत्याशित होते थे और उन्हें सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, मायावती से लेकर तमाम नेताओं को अपने फैसलों से चौंकाया था। सेक्युलर, समाजवादी और किसान जातियों की राजनीति करने वाले मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपने फैसलों के चलते पहचान रखते थे। आइए जानते हैं, उनके ऐसे कुछ फैसले जिनके जरिए उन्होंने नेताओं को न सिर्फ चौंकाया बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में बदलावों को भी गति दी...
पीएम बनने से रोका था सोनिया गांधी का रास्ता
बात 1999 की है। अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार 1 ही वोट से गिर गई थी। तब सोनिया गांधी ने समाजवादी पार्टी समेत कई दलों के समर्थन से राष्ट्रपति केआर नारायणन से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था। लेकिन आखिरी वक्त में सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाकर मुलायम सिंह यादव पीछे हट गए थे। इस तरह सोनिया गांधी पीएम बनते-बनते रह गईं और अंत में जब यूपीए को जीत मिली तो मनमोहन सिंह ही प्रधानमंत्री बने। उस घटना के बाद कांग्रेस का उनसे भरोसा हिल गया था, जो 2008 में परमाणु डील के मुद्दे पर समर्थन से ही लौटा। इस तरह मुलायम सिंह ने दोनों मौकों पर कांग्रेस और सोनिया गांधी को चौंकाया था।
मायावती से अदावत और फिर लंबी चली 'दुश्मनी'
मुलायम सिंह यादव की सियासत सिद्धांतों के साथ ही व्यवहारिक भी थी। उनके लिए कोई स्थायी दुश्मन या दोस्त नहीं था। उन्होंने 1993 में कांशीराम के साथ गठबंधन किया था और भाजपा को उसके उभार के दौर में सत्ता से दूर कर दिया था। हालांकि यह गठबंधन दो साल ही चला। मायावती ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद जो हुआ, उसने यूपी की सियासत को सपा और बसपा के कड़वाहट भरे दौर को जन्म दिया। मायावती लखनऊ के एक गेस्ट हाउस में मीटिंग कर रही थीं। तभी सपा के लोगों ने उन पर हमला कर दिया। इस घटना के करीब ढाई दशक बाद ही सपा और बसपा एक हो पाए थे।
कलाम के नाम का भी मुलायम ने ही दिया सुझाव
एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनाने का श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी को दिया जाता रहा है, लेकिन वास्तव में यह आइडिया मुलायम सिंह यादव का ही था। उन्होंने ही पीसी एलेक्जेंडर की बजाय कलाम को एनडीए का उम्मीदवार बनाने का सुझाव दिया था। उनके इस सुझाव ने कांग्रेस को भी बोल्ड कर दिया था।
जब मुलायम खुद पीएम की रेस में खा गए थे गच्चा
मुलायम सिंह यादव ने अपनी सियासी कला से दिग्गजों को झटका दिया था, लेकिन 1996 में वह खुद भी गच्चा खा गए थे। दरअसल वह पीएम बनने की रेस में माने जा रहे थे, लेकिन लालू यादव और शरद यादव जैसे ओबीसी नेताओं ने ही उन्हें पीछे खिसका दिया। इसके बाद कर्नाटक से आने वाले एचडी देवेगौड़ा को पीएम बनने का मौका मिला था। तब मुलायम सिंह यादव को रक्षा मंत्री के पद से ही संतोष करना पड़ा था।
अखिलेश का नाम अचानक किया प्रोजेक्ट, सीधे ज्योतिषी को बताया
अखिलेश यादव ने 2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में खासी मेहनत की थी, लेकिन पार्टी का चेहरा मुलायम सिंह यादव ही थे। लेकिन जब नतीजे आए और शपथ के लिए ज्योतिषी से मुहूर्त निकाला जाने लगा तो मुलायम ने अखिलेश के नाम से देखने को कहा। तब जाकर शिवपाल यादव समेत तमाम नेताओं को पता लगा कि मुलायम के मन में क्या प्लान चल रहा था।
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