रेवड़ी कल्चर पर चुनाव आयोग के तीखे सवाल, CEC बोले- जनता को भी पता चले कैसे पूरे होंगे वादे
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि चुनाव से पहले राजनीतिक दल बड़े बड़े वादे करते हैं। मुफ्त योजनाओं की घोषणा करते हैं लेकिन जनता को भी पता चलना चाहिए कि वे वादे कैसे पूरे किए जाएंगे।

रेवड़ी कल्चर यानी मुफ्त की योजनाओं को लेकर चुनाव आयोग ने राजनीतिक पार्टियों पर बड़े सवाल उठाए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि राजनीतिक दल चुनाव से पहले बड़ा तड़का लगाते हैं। उन्होंने कहा कि एक राज्य में एक ऐलान किया जाता है और फिर दूसरे राज्य में उससे भी बढ़कर ऐलान होता है। मुझे समझ नहीं आता कि आखिर पांच साल इस तरह की घोषणाएं और वादे क्यों नहीं किए जाते हैं। चुनाव से पहले ही मुफ्त वाली योजनाओं के वादे याद आ जाते हैं।
सीईसी राजीव कुमार ने कहा राजनीतिक दलों ने रेवड़ी कल्चर को बढ़ावा देना अपना अधिकार समझ लिया है। वे अपने घोषणापत्र में बड़े-बड़े वादे करते हैं। वहीं जनता को भी यह जानने का अधिकार है कि जिन मुफ्त की योजनाओं का वादा किया गया है आखिर उनको पूरा करने के पीछे प्लान क्या है। इसके लिए बजट कहां से आएगा। क्या लोगों पर टैक्स का बोझ बढ़ाया जाएगा या फिर कुछ योजनाएं बंद कर दी जाएंगी।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने पिछले साल ही मैनिफेस्टो गाइड में परिवर्तन किया है और एक प्रोफॉर्मा शामिल कर दिया है जिसमें राजनीतिक दलों को अपने चुनावी वादों के बारे में जानकारी देनी होगी। हालांकि यह अभी प्रभाव में नहीं है। उन्होंने कहा कि इस प्रोफॉर्मा में कितने लोगों को लाभ मिलेगा, इसके लिए वित्त के स्रोत क्या हैं, नए टैक्स, पुरानी योजनाओं के बारे में विचार आदि को जगह दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने इस प्रोफॉर्मा को लेकर राजनीतिक दलों से भी बात कर ली है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। इसपर फैसला आने के बाद इस प्रोफॉर्मा को लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को अधिकार है कि वे अपनी आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित करें। ऐसे में लोकलुभावने वादों से बचते हुए उन्हें देश हित के बारे में सोचकर वोट देना होगा।
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