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बिहार: भूमिहारों की नाराजगी से भाजपा सतर्क, बड़े बदलाव की तैयारी में भगवा पार्टी

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व सांसद सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट कर मौजूदा हालात पर न केवल चिंता जताई है, बल्कि सामाजिक समीकरणों को लेकर पार्टी नेतृत्व को आगाह भी किया है।

Himanshu Jha हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।Sun, 24 April 2022 05:38 AM
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बिहार: भूमिहारों की नाराजगी से भाजपा सतर्क, बड़े बदलाव की तैयारी में भगवा पार्टी

बिहार में हाल में हुए बोचहां विधानसभा उपचुनाव और एमएलसी की सीटों के चुनाव नतीजों से भाजपा नेतृत्व सतर्क हो गया है। इन चुनावों में सामाजिक समीकरण काफी प्रभावित हुए हैं और आने वाले समय में भाजपा व उसके गठबंधन राजग को नुकसान हो सकता है। भाजपा के कई नेताओं ने इन नतीजों को लेकर चिंता जतानी शुरू कर दी है।

बिहार की राजनीति में सामाजिक समीकरण काफी अहम रहते हैं। बोचहां का उपचुनाव भले ही एक सीट का था, लेकिन इसमें भाजपा (राजग) उम्मीदवार को 36,000 मतों के बड़े अंतर से हार मिली है। जबकि, क्षेत्र के सामाजिक समीकरण भाजपा के पक्ष में माने जाते थे। नतीजों से साफ हो गया है कि भाजपा का समर्थन करने वाला भूमिहार और सवर्ण वर्ग उससे खिसका है। पासवान समुदाय ने भी चिराग पासवान के भाजपा से दूर होने के कारण उससे दूरी बनाई है। पशुपतिनाथ पारस के राजग के साथ होने का यहां पर लाभ नहीं मिला है।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व सांसद सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट कर मौजूदा हालात पर न केवल चिंता जताई है, बल्कि सामाजिक समीकरणों को लेकर पार्टी नेतृत्व को आगाह भी किया है। भाजपा नेतृत्व भी इस स्थिति को लेकर गंभीर दिख रहा है और निकट भविष्य में राज्य में कई बदलाव भी किए जा सकते हैं। इनमें संगठन के बदलाव भी शामिल हैं।

दरअसल, भाजपा को सबसे ज्यादा चिंता भूमिहार वर्ग की नाराजगी को लेकर हो रही है। यह वर्ग भाजपा के विरोध में राजद को समर्थन करता दिख रहा है। इसके अलावा कुछ सवर्ण और अति पिछड़ा वर्ग भी भाजपा से खिसक रहे हैं। निषाद समुदाय भी उससे दूर हुआ है।

मंथन करना जरूरी
भाजपा के एक प्रमुख नेता ने कहा कि एक उपचुनाव और कुछ एमएलसी के चुनाव से स्थिति का सटीक आकलन नहीं किया जा सकता। मगर, इन मसलों पर मंथन करना जरूरी है। राज्य में भाजपा ने मौजूदा सरकार के गठन में भी कई प्रयोग किए थे और नए नेताओं को सामने लाया गया था। इसके अलावा प्रदेश संगठन में भी युवा नेतृत्व को उभारा गया है। मगर, इन नेताओं का ज्यादा प्रभाव नजर नहीं आ रहा है। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक समुदायों में प्रभावी नेता भी इन प्रयोगों से कमजोर पड़े हैं और वह मुख्य भूमिका से दूर रहे हैं। रणनीतिक रूप से इससे भाजपा को भविष्य में नुकसान हो सकता है।

अनुभवी नेताओं को अहम जिम्मेदारी संभव
सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। इसके तहत बिहार में भी कुछ बदलाव किए जाने हैं। इसमें सत्ता और संगठन दोनों मोर्चे शामिल रहेंगे। कुछ अनुभवी नेताओं और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण नेताओं को दोनों स्तर पर अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। ताकि, 2024 के लिए स्थिति कमजोर न हो।

पार्टी के एक नेता ने कहा कि भाजपा और राजग के कमजोर होने से सीधा लाभ विपक्षी राजद को मिलेगा। इसलिए, पार्टी को समय रहते अपने सामाजिक समीकरण पूरी तरह चाक चौबंद करने होंगे।