बच्चे की परवरिश में ना करें खुद को भूलने की गलती, जानिए कैसे रखें ख्याल know how to take care of yourself while raising a child, पेरेंटिंग टिप्स - Hindustan

बच्चे की परवरिश में ना करें खुद को भूलने की गलती, जानिए कैसे रखें ख्याल

माना कि अपने बच्चे का चेहरा देखने के लिए आपने बेसब्री से इंतजार किया है। पर, परवरिश के इस सफर में खुद को खो देने में समझदारी नहीं। कैसे पालन-पोषण के चक्र में खुद को भी बचाए रखें, बता रही हैं शाश्वती

Avantika Jain हिन्दुस्तान, नई दिल्लीSat, 30 March 2024 08:28 AM
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बच्चे की परवरिश में ना करें खुद को भूलने की गलती, जानिए कैसे रखें ख्याल

प्रेगनेंसी के दौरान ऑफिस जाने से जुड़े मेरे सवाल सुनकर मेरी डॉक्टर अकसर कहती थीं कि गर्भावस्था में काम करने में क्या दिक्कत है। तुम और तुम्हारा बच्चा दोनों अभी आपस में जुड़े हुए हो। असल दिक्कत तो तब होगी, जब बच्चे के जन्म के कुछ माह बाद उसे किसी और के भरोसे छोड़कर तुम्हें ऑफिस जाना होगा। डॉक्टर की बात सच थी। बच्चे के तीन माह होते ही छुट्टी खत्म हो गई और ऑफिस ज्वॉइन करना पड़ा। इस बात के लिए मानसिक रूप से मैं पहले से तैयार थी, इसलिए मुझे परेशानी तो हुई, पर बहुत ज्यादा नहीं।
मां बनने के सपने के साकार होने के बाद जिंदगी में जो तमाम तरह के बदलाव आते हैं, उसको लेकर कई लोग पहले से तैयार नहीं रहते। ये बदलाव जिंदगी के मायने को पूरी तरह से बदल डालते हैं। 16 देशों में नेस्ले के द्वारा आठ हजार नई मांओं पर किए गए इस सर्वे में पाया गया कि 32 प्रतिशत महिलाएं मां बनने के बाद अकेलेपन के घेरे में फंस जाती हैं। वहीं, 50 प्रतिशत से ज्यादा नए अभिभावक बच्चे के परवरिश के तौर-तरीकों को लेकर सामाजिक दबाव महसूस करते हैं। 45 प्रतिशत अपराध बोध के साये में जिंदगी भर के लिए दब जाते हैं, तो 31 प्रतिशत को ऐसा महसूस होता है कि इस नए सफर के लिए उन्होंने उचित तैयारी नहीं की थी। 53 प्रतिशत नए अभिभावाकों को महसूस होता है कि उन्होंने जैसा सोचा था, उससे कहीं ज्यादा उन्हें जिंदगी में समझौता करना पड़ रहा है। कई लोग बच्चे की परवरिश, देखभाल और घर की जिम्मेदारियों के चक्र में इस तरह से फंसते हैं कि उससे बाहर निकलना उनके लिए सपने की तरह हो जाता है। दुखद बात यह है कि जब तक उन्हें इस बात का अंदाजा होता है, तब तक दुनिया बहुत आगे बढ़ चुकी होती है। आपको खुद के साथ ऐसा नहीं करना है। कैसे? आइए जानें:

खुद के लिए निकालें वक्त
बच्चे के जन्म के बाद चैन से कुछ देर बाथरूम में बिताना भी किसी लग्जरी से कम नहीं होता। मां की जिंदगी पर पूरी तरह से बच्चे का एकाधिकार हो जाता है। पर, आपको बच्चे को पूरी तरह से प्राथमिकता देते हुए खुद के लिए भी नियमित रूप से समय निकालना है। बच्चा अगर थोड़ा बड़ा और समझने लायक हो गया है तो उसे अपनी जिंदगी का यह नियम समझाएं कि आप हर दिन एक तय समय अकेले बिताएंगी और उस वक्त बच्चा आपको बिल्कुल भी परेशान नहीं करेगा। इस वक्त का इस्तेमाल अपनी पसंद के किसी भी काम के लिए कीजिए। किताब पढ़िए, झपकी लीजिए, दोस्तों से बात कीजिए या फिर अपना कोई मनपसंद कार्यक्रम देखिए। बच्चा अगर बहुत छोटा है तो अपने लिए यह वक्त निकालने के लिए परिवार के सदस्यों की मदद लीजिए।

जुड़िए, अपने जैसों से
आप इस वक्त किस दौर से गुजर रही हैं और किन चुनौतियों का सामना कर रही हैं, इसे आपकी जैसी कोई मां ही समझ सकती है। यह भाव मन में घरने लगता है कि मुझे और मेरी परेशानियों को कोई नहीं समझ रहा। ऐसे समय में नई मांओं के लिए तैयार सेल्फ-हेल्प ग्रुप या ऑनलाइन कम्यूनिटी का हिस्सा बनना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। यहां आप ना सिर्फ बिना किसी चिंता के अपने मन की बात साझा कर सकती हैं बल्कि टिप्स और फीडबैक भी प्राप्त कर सकती हैं, जो परवरिश के आपके आगे के सफर को आसान बनाएगा।

तय कीजिए अपना लक्ष्य
मां बनने के बाद समय पर खाना खा पाना, नहा लेना या फिर बालों में कंघी कर पाना ही हर महिला के लिए उपलब्धि से कम नहीं। ऐसे में अपने लिए लक्ष्य तय करना और उन्हें पूरा करने की कोशिश करना वाकई एक मुश्किल काम है। पर, अगर आप ऐसा कर लेती हैं, तो आप खुद को थोड़ा और खोने से बचा लेंगी। एक डायरी लें और उसमें अपने छोटे-छोट लक्ष्यों जैसे नियमित टहलना या व्यायाम करना, कुछ नई चीजें सीखना आदि को लिखें। इन लक्ष्यों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर पूरा करने की कोशिश करें। जब आप अपने इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल हो जाएंगी तो आपको खुद पर गर्व होगा और जिंदगी की खोई हुई उम्मीद धीरे-धीरे लौट आएगी।

न छोड़े हॉबी का साथ
मां बनने से पहले तो आपकी पसंद-नापसंद और शौक की एक लंबी-सी लिस्ट थी। उस लिस्ट को दोबारा तैयार कीजिए और दोबारा से अपनी हॉबी की ओर रुख कीजिए। पर, इस हॉबी में बच्चों को शामिल करने की गलती ना करें। कोई नई स्किल सीखिए। दोबारा से पेंटिंग शुरू कीजिए या फिर कोई भी ऐसा काम कीजिए जो मां बनने से पहले करना आपको बेहद पसंद था। ऐसा करने से आप मानसिक रूप से अपने उस व्यक्तित्व से दोबारा रूबरू हो पाएंगी, जैसी आप बच्चे के जन्म से पहले थीं।

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