सुबह उठते ही होने लगती है पूरे दिन की चिंता और घबराहट? चेक करें लक्षण
- भारी मन और तनाव के साथ क्या हर सुबह आपकी भी नींद खुलती है? नियमित रूप से अगर ऐसा होता है, तो यह मॉर्निंग एंग्जाइटी का लक्षण है। ध्यान न देने पर यह समस्या विकराल रूप धारण कर सकती है। कैसे समय रहते इससे उबरें, बता रही हैं स्मिता
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आपने क्या कभी यह महसूस किया है कि सुबह बिस्तर से उठने के साथ ही आपके दिमाग में नकारात्मक विचारों की बाढ़-सी आ जाती है। आप किसी बात को लेकर चिंतित होती हैं और आपको घबराहट महसूस होने लगती है। यदि इन दिनों आपके साथ ऐसा हो रहा है, तो आप अकेली नहीं हैं। कई लोगों के साथ ऐसा होता है। वास्तव में, हमारी कुछ चिंता जीवन का हिस्सा हैं। यदि दैनिक कार्यों या अपनी स्थिति को लेकर आप लगातार अत्यधिक चिंता करने लगी हैं, तो यह विकार का संकेत हो सकता है।
कई लोगों को सुबह नींद से जागने या हल्की झपकी लेने के कुछ ही मिनटों बाद अत्यधिक चिंता, तनाव, घबराहट, उत्तेजना और परेशानी जैसी नकारात्मक भावनाएं महसूस होने लगती हैं। ये नकारात्मक भावनाएं ही सुबह होने वाली चिंता है। यह आमतौर पर काम का दबाव, स्वास्थ्य समस्याएं और बहुत अधिक आर्थिक बोझ बढ़ने पर होता है। इसके कारण सुबह के समय मुख्य रूप से कॉर्टिसोल हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है। इसके कारण लोगों को सुबह के समय तीव्र हृदयगति, बेचैनी और नकारात्मक विचार जैसे लक्षण अनुभव होते हैं। सुबह-सुबह मन पर छाने वाले चिंता के इस बादल को शांत करने के लिए क्या करें,
आइए जानें:
गहरी सांस लेने का करें अभ्यास
यह डायाफ्रामिक सांस लेने या 4-7-8 विधि जैसी श्वास नियंत्रण विधि है। लंबी और गहरी सांस लेने से स्ट्रेस हार्मोन की मात्रा शरीर में कम होती है और मन शांत होता है। 4-7-8 विधि के लिए अपने होठों को बंद कर लें और चार तक गिनते हुए नाक से सांस अंदर लें। सात गिनने तक अपनी सांस रोके रखें। आठ तक गिनते हुए ‘हूश’ ध्वनि करते हुए मुंह से पूरी सांस बाहर छोड़ें।
सुबह-सुबह फोन से दूरी
सोने से पहले और सुबह जागने पर ईमेल या सोशल मीडिया देखते रहने र्से ंचता और घबराहट उत्पन्न होती है। इसकी बजाय सुबह उठकर योग-ध्यान करने की कोशिश करें।
दिनचर्या का पालन
दिनचर्या की शुरुआत शांत सुबह के साथ होनी चाहिए। इसमें नियमित रूप से स्ट्र्रेंचग या टहलना, पानी पीना और स्वास्थ्य के अनुकूल नाश्ता करना शामिल हो सकता है। सुबह की अच्छी शुरुआत पूरे दिन की दिशा निर्धारित करती है।
हल्का व्यायाम करें
थोड़ी-सी सैर, स्ट्र्रेंचग या योग भी तनाव और चिंता को दूर करने वाले एंडोर्फिन हॉर्मोन का स्राव बढ़ाता है। सुबह उठने के बाद हर दिन कम-से-कम आधे घंटे व्यायाम, योग या टहलना आदि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। इससे तनाव दूर होगा और मन शांत रहेगा।
माइंडफुलनेस अपनाएं
सिर्फ पांच से दस मिनट का ध्यान विचारों को केंद्रित करने और भावनात्मक लचीलापन विकसित करने में बेहद मददगार साबित हो सकता है। माइंडफुलनेस को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। माइंडफुलनेस यानी जिस वक्त आप जो काम कर रही हैं, उस पर पूरी तरह से अपना ध्यान लगाना।
कैफीन का सेवन सीमित करें
अधिक कैफीन पीने से घबराहट, बेचैनी और चिंता बढ़ सकती है। कैफीन की बजाय हर्बल चाय या कम कैफीन वाला पेय पिएं। इससे मन शांत होगा, चिंता दूर होगी और ध्यान केंद्रित करने में आपको आसानी होगी।
आने वाले दिन के लिए तैयारी करें
नियमित रूप से अपनी कार्य सूची बनाएं। प्रतिदिन हाथ में कार्य सूची होने से सुबह के समय अनिश्चितता की गुंजाइश कम हो जाती है। इससे आप तनावमुक्त महसूस करती हैं और कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर पाती हैं।
मॉर्निंग एंग्जाइटी के लक्षण
• बेचैनी, तनाव या बहुत अधिक घबराहट महसूस करना • चिड़चिड़ापन • थकान • छाती में जकड़न, मांसपेशियों में तनाव, तेज हृदय गति या तेज सांस लेना • ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस करना और बात याद नहीं रखना • चिंता या घबराहट को नियंत्रित करने में कठिनाई • सोने में समस्या • अनिंद्रा • अपच जैसी पाचन संबंधी समस्याएं • सिर दर्द
आभार प्रकट करने का अभ्यास
प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करें। उन सभी चीजों के लिए और लोगों के प्रति आभार प्रकट करें, जिनकी मदद से आपकी जिंदगी सुविधाजनक बनी। इससे आपका मन चिंता बढ़ाने वाले विचारों से हटकर सकारात्मक विचारों की ओर मुड़ जाएगा।
( मनोविशेषज्ञ डॉ. सामंत दर्शी से बातचीत पर आधारित)
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