वापस होगा सहारा निवेशकों का पैसा? झारखंड सरकार बनाने जा रही जांच आयोग
- झारखंड सरकार एक आयोग का गठन करने जा रही है, जो सहारा समूह द्वारा की गई धोखाधड़ी और घोटाले की जांच करेगा। इस आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के न्यायाधीश करेंगे।

सहारा समूह द्वारा की गई धोखाधड़ी और घोटाले की जांच के लिए झारखंड सरकार जांच आयोग गठित करेगी। इसके अध्यक्ष झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश होंगे। सदस्य सचिव झारखंड सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी होंगे। एक अधिवक्ता और चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी जांच आयोग का सदस्य बनाया जाएगा। राज्य सरकार के आदेश के बाद पुलिस मुख्यालय जांच आयोग के गठन का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। आयोग का ड्राफ्ट बनकर तैयार है। जल्द ही इसे गृह विभाग को भेजा जाएगा। राज्य सरकार जांच आयोग अधिनियम (1952 की संख्या 60) की धारा 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग गठित करेगी।
ऐसे पीड़ित जिनके पास सहारा समूह द्वारा जारी सभी आवश्यक दस्तावेज हैं, लेकिन वे या तो अपने दावे दाखिल करने में असमर्थ हैं या उनके दावे सीआरसीएस सहारा रिफंड पोर्टल पर खारिज कर दिए गए हैं, ऐसे पीड़ित जिनके पास सहारा समूह की विभिन्न संस्थाओं में अपने निवेश/जमा के पूरे दस्तावेज नहीं हो सकते हैं, लेकिन वे अन्य तरीकों से अपने दावों को साबित करने में सक्षम हैं (जैसे सहारा समूह या संबंधित संस्थाओं के खातों में बैंक जमा/स्थानांतरण का प्रमाण या ऐसे अन्य दस्तावेज जैसे कि सहारा समूह के कर्मचारियों/एजेंटों द्वारा प्राप्त रसीदें आदि) से जानकारी जुटायी जाएगी।
क्या होगा आयोग का काम
सहारा समूह द्वारा किए गए घोटाले के पीड़ित सीआरसीएस सहारा रिफंड पोर्टल में अपने दावे सफलतापूर्वक दाखिल करने में असमर्थ क्यों हैं, इसका पता लगाने के लिए पूर्ण जांच जरूरी है। आयोग एक ऐसी प्रणाली विकसित करेगा, जिससे पीड़ितों की पूरी सूची/डेटा निम्नानुसार तैयार किया जा सके।
● ऐसे पीड़ित जिनकी मृत्यु हो चुकी है और उनके कानूनी उत्तराधिकारी हैं, उनके निवेश की वापसी की पहल होगी।
● आयोग ऐसी व्यवस्था विकसित करेगा, जिससे सहारा समूह द्वारा किए गए घोटाले के पीड़ितों के दावों/ दस्तावेजों को ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीकों से ठीक से दस्तावेजित/एकत्रित किया जा सके।
● आयोग द्वारा यह व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जाएगा जिससे व्यापक प्रचार किया जा सके ताकि पीड़ित (विशेष रूप से गरीब, अशिक्षित पीड़ित या दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले) भी अपने दावे दर्ज करा सकें।
● पीड़ितों के परिवार जो आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गए या अवसाद/गरीबी/चिकित्सा उपचार की कमी के कारण मर गए, उन्हें सेबी और सीआरसीएस के पास पड़ी सहारा जमा राशि से मुआवजा दिया जा सके।
● यदि सेबी/सीआरसीएस किसी कारणवश भुगतान करने से इंकार कर देता है या भुगतान करने में असमर्थ है, तो क्या झारखंड सरकार अंतरिम व्यवस्था के रूप में ऐसे पीड़ितों को कुछ मुआवजा दे सकती है और फिर सेबी/ सीआरसीएस फंड से राशि का दावा कर सकती है।
● सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड/सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड से सहारा क्यू शॉप यूनिक प्रोडक्ट्स रेंज तक धोखाधड़ी/घोटाला किए गए धन के प्रवाह का अध्ययन करना भी आयोग के कार्यक्षेत्र के अधीन होगा।