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बांग्लादेश में लोकतंत्र की कमी, अब कनाडा ने भी उठाए शेख हसीना की जीत पर सवाल

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने बांग्लादेश की नवनिर्वाचित सरकार से लोकतंत्र और मानवाधिकारों के प्रति देश की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए कदम उठाने का आह्वान किया।

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, ओटावाWed, 10 Jan 2024 11:14 AM
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बांग्लादेश में लोकतंत्र की कमी, अब कनाडा ने भी उठाए शेख हसीना की जीत पर सवाल

अमेरिका के बाद अब कनाडा ने भी भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुए आम चुनावों को लेकर निराशा व्यक्त की है। कनाडाई सरकार ने बांग्लादेश के संसदीय चुनावों में उन "लोकतंत्र और स्वतंत्रता के सिद्धांतों की कमी" बताई जिस पर देश की स्थापना हुई थी। यह बात ग्लोबल अफेयर्स कनाडा (जीएसी) ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति में कही। कनाडाई विदेश मंत्रालय ने कहा, "कनाडा इस बात पर निराशा व्यक्त करता है कि यह चुनावी प्रक्रिया लोकतंत्र और स्वतंत्रता के सिद्धांतों से कमतर है, जिस पर बांग्लादेश की स्थापना हुई थी। कनाडा संबंधित अधिकारियों से बांग्लादेश के लोगों के हितों के अनुरूप लोकतंत्र, मानवाधिकारों के सम्मान और मौलिक स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सभी पक्षों के साथ पारदर्शी तरीके से काम करने का आह्वान करता है।"

इसमें कहा गया है, "एक व्यवहार्य विपक्ष, स्वतंत्र लोकतांत्रिक संस्थानों और प्रेस की स्वतंत्रता के साथ निष्पक्ष चुनाव एक मजबूत और स्वस्थ लोकतंत्र सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।" कनाडाई  विदेश मंत्रालय ने "चुनाव से पहले और उसके दौरान हुई डराने-धमकाने और हिंसा की घटनाओं" की भी निंदा की। साथ ही इसने "उन सभी लोगों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जो हिंसा से प्रभावित हुए हैं।" इसमें कहा गया कि कनाडा "बांग्लादेशी नागरिकों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं की सराहना और समर्थन करता है।"

इससे पहले भारत, रूस, चीन तथा एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई देशों ने प्रधानमंत्री के रूप में चौथी बार चुनाव जीतने पर शेख हसीना को बधाई दी। हालांकि संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और ब्रिटेन ने चुनावों में ‘‘स्वतंत्र या निष्पक्ष नहीं’’ होने पर अपनी आपत्ति व्यक्त की। मुख्य विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) द्वारा बहिष्कार किए गए चुनावों में निवर्तमान प्रधानमंत्री हसीना की अवामी लीग (एएल) ने रविवार को 300 सदस्यीय संसद में 223 सीटें जीतीं। बांग्लादेश सरकार ने चुनावों का पर्यवेक्षण करने के लिए भारत और अन्य देशों के साथ-साथ बहुपक्षीय संगठनों से बड़ी संख्या में विदेशी पर्यवेक्षकों को आमंत्रित किया था।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में कहा, ‘‘अमेरिका अन्य पर्यवेक्षकों के साथ यह बात साझा करना चाहता है कि ये चुनाव स्वतंत्र या निष्पक्ष नहीं थे और हमें अफसोस है कि सभी दलों ने चुनाव में हिस्सा नहीं लिया।’’ उसने कहा, ‘‘बांग्लादेश सरकार को हिंसा की खबरों की विश्वसनीय जांच और दोषियों को जवाबदेह ठहराने के लिए उचित कदम उठाना चाहिए। हम सभी राजनीतिक दलों से हिंसा से दूर रहने का आग्रह करते हैं।’’

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने बांग्लादेश की नवनिर्वाचित सरकार से लोकतंत्र और मानवाधिकारों के प्रति देश की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए कदम उठाने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि रविवार को मतदान प्रक्रिया के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों और समर्थकों की ओर से की गई हिंसा के कारण माहौल खराब हो गया। टर्क ने कहा, ‘‘मतदान से पहले के महीनों में हजारों विपक्षी दलों के समर्थकों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया है या धमकाया गया। ऐसी युक्तियां वास्तव में निष्पक्ष प्रक्रिया के लिए अनुकूल नहीं हैं।’’ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश में ‘‘बेहद मश्किलों के बाद’’ लोकतंत्र कायम हुआ था और ‘‘ ये दिखावटी नहीं बनना चाहिए।’’

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी ने कहा कि अक्टूबर से अब तक लगभग 25,000 विपक्षी दलों के समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें दलों के प्रमुख नेता भी शामिल हैं। चूंकि पिछले दो माह हिरासत के दौरान कम से कम 10 विपक्षी दलों के समर्थकों की कथित तौर पर मृत्यु या हत्या के मामले सामने आये हैं, ऐसे में उन्होंने संभावित यातना के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस के सहयोगी प्रवक्ता फ्लोरेंसिया सोटो नीनो से सवाल पूछा गया कि क्या संयुक्त राष्ट्र का मानता है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष थे, इस पर उन्होंने कहा, ‘‘वहां की स्थिति को लेकर आ रही खबरों को हमने देखा है। महासचिव इस बात पर नजर रखते हैं कि क्या हो रहा है। उन्होंने चुनावों से विपक्ष के बहिष्कार के फैसले पर भी गौर किया है।’’ ब्रिटेन ने कहा बांग्लादेश में 12वें संसदीय चुनावों के दौरान निष्पक्षता के मानकों को पूरा नहीं किया गया।

इसके विपरीत सोमवार और मंगलवार को भारत, चीन, रूस और एशिया, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई अन्य देशों ने हसीना को चुनाव में जीत पर बधाई दी। भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत रूप से अपने समकक्ष को फोन किया और सोमवार को उनकी ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी और अपने पड़ोसी के साथ ‘‘स्थायी और जनता-केंद्रित साझेदारी’’ को और मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। चीन ने मंगलवार को शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग पार्टी को चुनाव जीतने पर बधाई दी और कहा कि ढाका के साथ द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी और ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल के तहत सहयोग को मजबूत करना चाहता है।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, जापान, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, ब्रुनेई, मलेशिया, मिस्र, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, इराक, ईरान, कतर और फलस्तीन के राजदूतों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात की और उन्हें चुनाव में जीत की बधाई दी। बांग्लादेश प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत, रूस, चीन, भूटान, फिलीपीन, सिंगापुर और श्रीलंका के राजदूतों ने सोमवार को प्रधानमंत्री से उनके गनोभवन आवास पर मुलाकात की और बांग्लादेश के प्रति अपने देशों का समर्थन जारी रखने का वादा किया।

(इनपुट एजेंसी)

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