प्रचंड गर्मी की चपेट में बिहार, जून में 72 फीसदी कम हुई बारिश, लोग महसूस कर रहे 60-65 डिग्री का तापमान
बिहार इन दिनों भीषण गर्मी के प्रकोप को झेल रहा है। इसकी वजह जून माह में राज्य भर में 72 फीसदी कम बारिश का होना है। इसके चलते दिन के समय लोग 60-65 डिग्री तक का तापमान महसूस कर रहे हैं।

बारिश की कमी से बिहार इस बार भीषण गर्मी की चपेट में है। जून में अब तक 72 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं प्री मानसून (मार्च से मई) तक भी राज्य में सामान्य से कम बारिश हुई है। जून में 37 जिलों में जहां सामान्य से कम बारिश हुई, वहीं प्री मानसून में 20 जिले ऐसे रहे जहां बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहा। पटना सहित राज्य के कुछ जिलों में बारिश की कमी का आंकड़ा 99 फीसदी तक चला गया है।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि बारिश की कमी से राज्य के अधिकतर हिस्से भीषण गर्मी का शिकार हैं। मौसम विभाग 1 मार्च से 31 मार्च को प्री मानसून और 1 जून से मानसून की अवधि मानता है। देश में मानसून के प्रवेश करने की निर्धारित तिथि 1 जून तय हो गई है, इसका कारण हर साल लगभग इसी दिन के आस-पास मानसून का भारतीय तट से टकराना है। इन दोनों ही अवधि में बारिश कम होने के कारण उत्तर बिहार के दो-तीन जिलों को छोड़कर राजधानी सहित पूरा प्रदेश प्रचंड गर्मी की चपेट में है।
कम बारिश के कारण ही इस साल राज्य का अधिकतम तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। सबसे चौकाने वाली बात यह हुई कि गया जिले में अधिकतम तापमान के 54 सालों का रिकॉर्ड भी टूट गया। बक्सर, जमुई, रोहतास और समस्तीपुर ऐसे जिले हैं जहां 100 फीसदी बर्षा की कमी देखी गई है।
बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश में कुछ दिनों के अंतराल पर हवा का रुख बदलता रहा है। इस दौरान कई बार पुरवा और पछुआ हवा का संयुक्त रूप से मिश्रण भी देखा गया। पुरवा हवा चलने के कारण वातावरण में नमी का मात्रा बढ़ जाती है। इस कारण रिकॉर्ड तापमान से लोगों को अधिक का एहसास होता है। मौसम विभाग के अनुसार अगर बारिश होती, तो रात का तापमान 20 से 22 और दिन का तापमान 40-44 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता। लेकिन बारिश नहीं होने और पूर्वा हवा के चलने के कारण लोगों को रिकॉर्ड तापमान से अधिक का अनुभव हो रहा है। इस कारण लोगों को दिन के समय 60 से 65 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान का अनुभव हो रहा है।