नालों पर दिन-प्रतिदिन बढ़ते अतिक्रमण से निगम बेपरवाह, प्रशासन की सुस्त कार्रवाई से बढ़ा हौसला; जानें किसका क्या है हाल
पटना शहर में फुटपाथों, पार्किंग व सड़क के किनारे अतिक्रमण से बेपरवाह पटना नगर निगम की अनदेखी से अब प्रमुख नालों पर भी अतिक्रमण दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
पटना शहर में फुटपाथों, पार्किंग व सड़क के किनारे अतिक्रमण से बेपरवाह पटना नगर निगम की अनदेखी से अब प्रमुख नालों पर भी अतिक्रमण दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। योगीपुर, बाईपास नाला, राजीवनगर और पुनाईचक नाला अतिक्रमण से ढंकते जा रहा है। एनबीसीसी नाला और एनबीसीसी संप हाउस चारों ओर से अतिक्रमण से ढंक गया है।
बादशाही पईन का बहाव क्षेत्र भी अतिक्रमण से बुरी तरह प्रभावित है। निगम और जिला प्रशासन की सुस्त होती कार्रवाई से अतिक्रमणकारी अवैध रूप से दुकानें, बस और गाड़ी पार्किंग करने के अलावा कई जगह खटाल भी चला रहे हैं। इस कारण एक ओर नाले की उड़ाही प्रभावित होती है तो दूसरी ओर अतिक्रमणकारियों द्वारा दुकानों से निकली बेकार सामग्रियों व कचरे को फेंकने से नाले का बहाव प्रभावित होता है।
योगीपुर नाला: हनुमाननगर आवास बोर्ड स्थित संप हाउस के बाद से लेकर भूतनाथ रोड तक के लगभग दो किलोमीटर लंबे नाले का दो तिहाई हिस्सा अतिक्रमण से प्रभावित हो गया है। कांटी फैक्ट्री रोड के पुल के पास मीट-मांस की दुकानें, सब्जी, सुधा दूध बूथ, खटाल, से लेकर पान-सिगरेट की दुकानें तक खुल गई हैं। नाले के किनारे तीन-चार स्कूल बस की पार्किंग भी बन गई है। अगल-बगल में बसीं झुग्गियों की नालियां और शौचालय की गंदगी भी सीधे नाले में ही गिरती है।
बाईपास नाला: मीठापुर से लेकर पहाड़ी संप हाउस तक बाईपास नाला कई जगह अतिक्रमण का शिकार है। नाले के किनारे सैकड़ों दुकानें, अस्पताल, भवन बन गए हैं। इनके द्वारा अवैध रूप से नाले पर स्थायी-अस्थायी पुल आदि का निर्माण भी करा लिया गया है। निर्माण के दौरान नाले के बहाव का भी ध्यान नहीं रखा गया है।
बादशाही पईन: पटना के सबसे बड़े नाले बादशाही पईन भी अतिक्रमण के कारण कई जगह सिकुड़ गया है। 2019 के जलजमाव का बड़ा कारण इस नाले पर अतिक्रमण और उसके बहाव क्षेत्र में रूकावट को माना गया था। जगनपुरा से लेकर खेमनीचक मोड़, चमनचक, नंदलाल छपरा और उसके आगे भी नाले के किनारे सैकड़ों दुकानें, बहुमंजिले भवन आदि का निर्माण हो गया है। बार-बार आदेश के बावजूद इसपर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जोर-शोर से नहीं हुई।
पुनाईचक, कुर्जी और राजीवनगर नाला: पुनाईचक, कुर्जी और राजीवनगर नाले के किनारे भी कई जगह अवैध रूप से दुकानें, बस्तियां आदि बस गई हैं। सैकड़ों की संख्या में मीट-मांस और मछली की दुकानें इसके किनारे सजती हैं। नाला उड़ाही भी अतिक्रमण के कारण प्रभावित होती हैं। बावजूद इसके अतिक्रमण हटाने को लेकर निगम गंभीर नहीं है।