इसलिए होते हैं फुलेरा दौज पर विवाह, इस बार कब है फुलेरा दौज
द्वापर युग में योगिराज भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी का सांगो पांग (वैदिक रीति) से विवाह हुआ था। यह विवाह सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी ने मांट के निकट भांडीरवन में फाल्गुन मास में फुलेरा दौज के दिन सम्पन्न कराया था।
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द्वापर युग में योगिराज भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी का सांगो पांग (वैदिक रीति) से विवाह हुआ था। यह विवाह सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी ने मांट के निकट भांडीरवन में फाल्गुन मास में फुलेरा दौज के दिन सम्पन्न कराया था। गर्ग संहिता व ब्रह्म वैवर्त पुराण में इसका उल्लेख भी मिलता है। यही वजह है कि फुलेरा दौज पर अबूझ साए में विवाह समारोह का विशेष महत्व है। इस बार फुलेरा दौज शनिवार को है।
भांडीर बिहारी मंदिर के सेवायत पंडित प्रमोद भारद्वाज बताते हैं कि श्री ब्रह्म वैवर्त पुराण के कृष्ण जन्म खण्ड में राधा कृष्ण के विवाह का विस्तृत उल्लेख मिलता है, वहीं गर्ग ऋषि द्वारा रचित गर्ग संहिता में भी इसका उल्लेख है। ब्रह्नवैवर्त पुराण में वर्णन है कि कृष्ण जब छोटे थे।
तब एक बार नन्द बाबा की गोद में बैठकर भांडीरवन में गाय चराने आये। उसी वक्त कृष्ण की इच्छा से यहाँ तेज आंधी तूफान व वारिश हुई। नन्द बाबा ने श्रीकृष्ण से इसे बन्द करने को कहा। बारिश बन्द होते ही राधा जी नन्द के सामने प्रकट हुई। तब बाबा की गोद से राधा ने कृष्ण को छुड़ाकर अपनी गोद में ले लिया और उसी वक्त कृष्ण राधा के बराबर के हो गए। इसी पल सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा की का यहां आगमन हुआ और उन्होंने विनती की कि आप दोनों विवाह कर लें और मुझे विवाह में आचार्य बना लें। राधा और कृष्ण ने उनका आग्रह स्वीकार कर विवाह कर लिया। विवाह के बाद ब्रह्मा जी चले गए। विवाह होते ही एक बार फिर योगीराज भगवान कृष्ण शिशु रूप में आ गए।
राधा कृष्ण का विवाह
फुलेरा दौज के दिन राधा कृष्ण का विवाह हुआ था। इसीलिए फुलेरा दौज के दिन बड़ी तादाद में हिन्दू धर्म में अबूझे विवाह का प्रचलन लंबे समय से चला आ रहा है। आज भी पूरे वर्ष भर भांडीरवन में धर्म परायण लोग यहां राधा कृष्ण का विवाह मनोरथ करते हैं। यूँ तो पूरे वर्ष भर भांडीरवन में राधा कृष्ण विवाह मनोरथ मनाये जाते हैं, पर फुलेरा दौज का विशेष महत्व माना जाता है। भांडीरवन के भांडीर बिहारी मंदिर में आज भी कृष्ण भगवान द्वारा राधा जी की मांग में सिंदूर भरते हुए का विग्रह विराजमान हैं। विवाह के व़क्त भगवान कृष्ण छोटे थे, सो उन्होंने पंजे के बल खड़े होकर राधा जी की मांग में सिंदूर भरा था, भांडीर बिहारी मंदिर में भी श्रीकृष्ण पंजे पर खड़े हैं।
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