Holashtak: होलाष्टक कब से? जानें महत्व व शुभ-अशुभ मुहूर्त
- Holashtak 2025: हर साल फाल्गुन में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू होता है और पूर्णिमा यानी होलिका दहन तक रहता है। ऐसी मान्यता है कि होली से पहले के आठ दिनों में भक्त प्रहलाद ने जो यातनाएं सही थीं, वे यातनाएं ही होलाष्टक कहलाती हैं।

Holashtak 2025 होलाष्टक कब से: हर साल फाल्गुन में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू होता है और पूर्णिमा यानी होलिका दहन तक रहता है। इस बार सात मार्च से होलाष्टक शुरू होगा। इस दौरान विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य नहीं होंगे। 13 मार्च को होलाष्टक समाप्त होगा तथा इस दिन होलिका दहन भी होगा। आमतौर पर होली के बाद विवाह और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं, लेकिन इस वर्ष 14 मार्च को मलमास शुरू हो रहा है। मलमास के दौरान शुभ कार्यों पर रोक रहती है। इस वर्ष विवाह समेत मांगलिक कार्य 13 अप्रैल को मलमास खत्म होने के बाद ही शुरू होंगे। ज्योतिषियों के अनुसार, इस साल फरवरी से दिसंबर तक 42 विवाह मुहूर्त हैं। इस समय विवाह, मुंडन, नामकरण, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य करने पर रोक रहती है। इस अवधि में सभी ग्रह उग्र स्थिति में रहते हैं। इस कारण वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, इसीलिए शुभ कार्यों पर रोक रहती है।
विवाह के शुभ मुहूर्त
- मार्च: सात मार्च से होलाष्टक दोष और मीन मलमास शुरू हो जाएगा। इस कारण 14 मार्च तक कोई मुहूर्त नहीं है।
- अप्रैल: 14 अप्रैल से विवाह शुरू होंगे। अप्रैल में 14, 16, 18, 19, 20, 25, 29, 30 तिथि को विवाह मुहूर्त हैं।
- मई: मई में 5, 6, 7, 8, 13, 17, 28 मई को शुभ मुहूर्त हैं। इन दिनों में शुभ विवाह हो सकते हैं।
- जून: 1, 2, 4, 7, 8, 9, 10 जून को विवाह होंगे। 11 जून से गुरु अस्त होने से विवाह नहीं होंगे।
देवशयन दोष
- इस वर्ष छह जुलाई से देव शयन दोष लग जाएगा। इसके बाद विवाह 21 नवंबर तक नहीं होंगे।
- नवंबर: देवउठनी एकादशी के बाद 22 नवंबर से फिर विवाह मुहूर्त शुरू होंगे। नवंबर माह में 22, 23, 25, 30 तारीख को विवाह के मुहूर्त हैं।
- दिसंबर: दिसंबर माह में दो दिन 4 और 11 दिसंबर को विवाह के शुभ मुहूर्त हैं।
अबूझ मुहूर्त: साल के कुछ दिन अत्यंत शुभ माने जाते हैं और इन दिनों को विवाह के लिए मुहूर्त की जरूरत नहीं होती है। इस वर्ष 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया, पांच मई को जानकी नवमी, 12 मई को पीपल पूर्णिमा, पांच जून को गंगा दशमी, चार जुलाई को भड़ल्या नवमी, छह जुलाई को देवशयन एकादशी और दो नवंबर को अबूझ मुहूर्त होने से विवाह हो सकेंगे।
महत्व: ऐसी मान्यता है कि होली से पहले के आठ दिनों में भक्त प्रहलाद ने जो यातनाएं सही थीं, वे यातनाएं ही होलाष्टक कहलाती हैं। इस वजह से इन आठ दिनों में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता। वहीं, शिवपुराण के अनुसार, कामदेव ने प्रेम बाण चलाकर शिवजी की तपस्या भंग कर दी थी। इस पर महादेव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। प्रेम के देवता कामदेव के भस्म होने पर पूरी सृष्टि में शोक और हाहाकार मच गया। कामदेव की पत्नी रति ने अपने पति को पुनर्जीवित करने के लिए भोलेनाथ की प्रार्थना की। महादेव ने प्रसन्न होकर कामदेव को जीवनदान दिया। कामदेव फाल्गुन मास की अष्टमी तिथि को भस्म हुए थे और पूर्णिमा तिथि को पुनर्जीवित हुए थे। इस कारण से होलाष्टक के आठ दिनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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