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बोले हल्द्वानी: मरीजों को दवा देने वाले फार्मेसी अधिकारियों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं

हल्द्वानी में फार्मेसी अधिकारियों ने दवाइयों के वितरण और पदों की कमी को लेकर समस्याएं बताई। उनका कहना है कि एक अधिकारी को 2000 रोगियों को दवा बांटनी पड़ रही है और वेतन विसंगतियों का सामना करना पड़ रहा...

Newswrap हिन्दुस्तान, हल्द्वानीThu, 27 Feb 2025 05:57 PM
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बोले हल्द्वानी: मरीजों को दवा देने वाले फार्मेसी अधिकारियों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं

हल्द्वानी। दवा कक्ष में दवाइयों की खोज और स्टोरेज से लेकर रोगियों को दवाइयों की सही जानकारी देने वाले फार्मेसी अधिकारियों को सही व्यवस्थाएं नहीं मिल पा रही हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ रोगी को दवा देने से लेकर इंजेक्शन लगाने, पोस्टमार्टम कराने के साथ ही इनसे चारधाम यात्रा और वीआईपी ड्यूटी आदि हर जगह काम लिया जाता है। वहीं राज्य में भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक लागू होने के बाद फार्मेसी अधिकारियों के पदों पर स्थायी नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। इस वजह से पुराने फार्मासिस्टों पर काम का दबाव बढ़ गया है। फार्मेसी अधिकारियों का कहना है कि पद कम होने के कारण एक ही फार्मेसी अधिकारी को दो हजार रोगियों को दवा बांटनी पड़ रही है। छठे वेतनमान के अनुसार उन्हें पदोन्नति और वेतनमान तक नहीं मिल रहा है। फार्मेसी संवर्ग में वीआईपी पूल में रखे गए 63 पद क्रियाशील नहीं है। जिससे उन्हें अस्पतालों में ड्यूटी करने के बाद भी वीआईपी ड्यूटी के लिए परेशान होना पड़ता है। वेतन विसंगतियों के अलावा फार्मेसी अधिकारियों को गोल्डन कार्ड का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में दूसरों को दवा देने वाले फार्मेसी अधिकारी खुद बीमार होने पर दवा के लिए परेशान हो रहे हैं। बोले हल्द्वानी की टीम जब फार्मेसी अधिकारियों के बीच पहुंची तो उन्होंने खुलकर समस्याएं बताते हुए उनके समाधान के लिए सुझाव भी दिए।

कुमाऊंभर में लगभग 600 स्थायी फार्मेसी अधिकारी विभिन्न राजकीय अस्पतालों में तैनात हैं। चिकित्सकों के साथ रोगी को उपचार देने में सहायता करने के अलावा दवाइयों का रखरखाव और मरीजों को सही दवा का कॉम्बिनेशन बनाकर देने वाले फार्मेसी अधिकारी वर्तमान में अव्यवस्थाओं से परेशान हैं। फार्मेसी अधिकारियों का कहना है कि सात जिलों के फार्मेसी अधिकारियों ने खाली पदों को भरने और आपातकाल में पद बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखा है लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा है। उपकेन्द्रों में खाली पड़े पदों को भी नहीं भरा जा रहा है। इससे वर्तमान में कार्यरत फार्मेसी अधिकारियों पर दबाव बढ़ रहा है। उनका कहना है कि नियमों के तहत 120 मरीजों पर एक फार्मेसी अधिकारी को तैनात किया जाना चाहिए।

वहीं गोल्डल कार्ड में कैशलेस सुविधा की मांग कर रहे फार्मेसी अधिकारियों का कहना है कि इलाज के दौरान पहले कैश देने के लिए कहा जाता है। इसके बाद ही पैनलाइज अस्पताल में इलाज की व्यवस्था हो पाती है। उनका कहना है कि यदि स्वास्थ्य कर्मियों के साथ ही ऐसा बर्ताव हो रहा है तो आम जनता को और अधिक परेशान किया जाता होगा। अगर कैशलेस सुविधा नहीं दी जा रही है तो निजी बीमा पॉलिसी में जुड़ने की सुविधा दी जानी चाहिए। इसके अलावा फार्मेसी अधिकारियों का कहना है कि जहां स्वास्थ्य नीति बनती है वहां फार्मासिस्टों को नहीं बुलाया जाता है। इससे उनका हित नीति में रखा ही नहीं जाता है। कई अस्पताल ऐसे हैं जो केवल फार्मासिस्टों पर निर्भर हैं। ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारी अपनी ओर से बनाए नियमों को उन पर थोप देते हैं। फार्मेसी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें भी बुलाकर उनकी समस्याएं और सुझाव सुनने चाहिए।

काउंटर अलग-अलग बनाएं: फार्मेसी अधिकारियों की मांग है कि 800 की ओपीडी से ऊपर वाले अस्पतालों में दवा काउंटर अलग-अलग बनाए जाए। जिले के कई अस्पताल हैं जहां दवा काउंटर अलग-अलग तो बने हैं लेकिन ड्यूटी एक ही फार्मेसी अधिकारी को दे दी जाती है। ऐसे में दिनभर में सैकड़ों मरीजों को दवा देना एक ही अधिकारी के लिए मुश्किल हो जाता है।

उपकेंद्रों के लिए रखे 391 पदों को किया जाए सृजित: फार्मेसी अधिकारियों का कहना कि उपकेंद्रों के 391 पदों को डेड कैडर किया गया है। इससे रोजगार और पद दोनों खत्म हो रहे हैं। नई भर्तियां भी नहीं हो रही हैं। जो फार्मेसी अधिकारी कार्यरत हैं उन पर अप्रत्याशित रूप से कार्य भार बढ़ रहा है।

राज्यभर से लगाएं ड्यूटी : फार्मेसी अधिकारियों का कहना है कि चारधाम यात्रा में कुमाऊं के नैनीताल, अल्मोड़ा और बागेश्वर से ड्यूटी लगाई जाती है। जबकि गढ़वाल और कुमाऊं के अन्य जिलों के फार्मासिस्टों को इस ड्यूटी में शामिल नहीं किया जाता है। ऐसे में इन्हीं जिलों में फार्मेसी अधिकारियों पर कार्य का दबाव अधिक है। उनका सुझाव है कि जिस जिले की यात्रा हो या जिस मंडल की यात्रा हो, वहीं से फार्मेसी अधिकारियों को लिया जाए। वहीं कुमाऊं में होने वाली मानसरोवर यात्रा आदि के लिए ही उन्हें भेजा जाए।

यात्रा भत्ते का एक माह में हो भुगतान : चारधाम ड्यूटी कर चुके फार्मासिस्टों ने कहा कि लंबे समय तक उन्हें यात्रा भत्ते नहीं मिल पाते हैं। इससे उन पर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ता है। फार्मेसी अधिकारियों की मांग है कि उन्हें वीआईपी या चार धाम ड्यूटी के अंतिम सप्ताह से एक माह के भीतर यात्रा भत्ते का भुगतान कर दिया जाए।

समान कार्य समान वेतन की हो व्यवस्था: फार्मेसी अधिकारियों का कहना है कि समान कार्य समान वेतन की व्यवस्था होनी चाहिए। वेतन विसंगति होने के कारण उन्हें अतिरिक्त कार्य करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

फार्मेसी अधिकारियों की मुख्य समस्याएं

1. समान कार्य के लिए समान वेतन नहीं मिलना

2. अतिरिक्त कार्य करने को मजबूर हैं फार्मेसी अधिकारी

3. वीआईपी और यात्रा ड्यूटी का भत्ता समय पर नहीं मिलता

4. चिकित्सा शिक्षा विभाग को आवंटित 119 पद और 63 पद लटके

5. स्थानांतरण में पारदर्शिता और समय-समय पर पदोन्नति न होना

फार्मेसी अधिकारियों के सुझाव

1. एसीपी में पदोन्नति के पद का वेतन और पूर्व की भांति 10,16,26 वर्ष में मिले

2. आईपीएचएस मानकों से कम हुए उपकेंद्र के 391 स्थगित पद पुनर्जीवित हों

3. चारधाम, पूर्णागिरि मेला और वीआईपी ड्यूटी के निर्धारित 63 पद सक्रिय हों

4. चिकित्सा शिक्षा विभाग को आवंटित 119 पदों का मेडिकल कॉलेज में समायोजन हो

5. बड़े अस्पतालों में पदों का पुनर्निर्धारण हो।

फार्मेसी अधिकारियों का दर्द

2009 के बाद नियुक्त साथियों का वेतनमान 5400 ग्रेड पे नहीं है। हमारी सरकार से मांग है कि पारदर्शी स्थानांतरण नीति बने और एसीपी के तहत 5400 ग्रेड पे को लागू किया जाए।

पवन पांडे, प्रांतीय संयोजक, डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन।

स्थानांतरण नीति पारदर्शी होनी चाहिए। 15 साल से दुर्गम में फंसे साथियों को सुगम में लाया जाए। उसके अलावा लंबे समय से सुगम में ड्यूटी कर रहे फॉर्सेसी अधिकारियों का पारदर्शी स्थानांतरण नीति के तहत ट्रांसफर दिया जाए।

गिरीश चंद्र पांडे।

मानक के अनुरूप पद नहीं है। एक काउंटर में एक ही फार्मासिस्ट को 6 घंटे तक 120 मरीज के लिए कार्य दिया जाना चाहिए। जबकि फार्मासिस्ट 2000 से अधिक मरीजों को दवा देने की ड्यूटी करने के लिए मजबूर हैं।

डीएस कोश्यारी।

समान कार्य के लिए समान वेतन व्यवस्था लागू होनी चाहिए। कार्य के आधार पर ही फार्मासिस्टों की व्यवस्था की जाए। सालों से दुर्गम में कार्य कर रहे साथियों को सुगम में लाया जाए। आईपीएचएस के मानकों का गलत प्रयोग किया जा रहा है।

दिगम्बर सिंह रावत।

आईपीएचएस के मानक लागू करने के बाद उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार व्यवस्था की जानी चाहिए। पद कम कर दिए गए हैं इससे काम का अधिक दबाव बढ़ गया है। हमारी मांग है कि समान वेतन समान कार्य व्यवस्था लागू हो।

राजेश जोशी।

स्पष्ट स्थानांतरण नीति बनाई जाए। सालों से दुर्गम में कार्य कर रहे साथियों को सुगम में भी तैनाती दी जानी चाहिए। कई लोग अपनी पहुंच और पैसे का प्रयोग करके सालों से सुगम में बने हुए हैं। ऐसे लोगों को स्थानांतरित किया जाए।

रतन सिंह बिष्ट।

मैं जिस अस्पताल में तैनात हूं, वहां आईपीएस मानक लागू होने के बाद दो काउंटर तो बना दिए गए लेकिन तैनाती एक ही फार्मासिस्ट की है। पहले मरीजों का दबाव कम होता था इसलिए व्यवस्थाएं हो जाती थी लेकिन वर्तमान में परेशानी बढ़ गई है।

विनोद पांडे।

सरकार ने उपकेंद्रों में फार्मासिस्ट अधिकारी के पद कम कर दिए हैं। इससे हमारे साथियों के रोजगार पर संकट आ गया है। कई बेरोजगार फार्मासिस्ट परेशान हैं। इन पदों को पुनः सृजित किया जाए। इससे हमारे नए साथियों को भी रोजगार मिलेगा।

मनोज जोशी।

पद लगातार कम किए जा रहे हैं। पदोन्नति का वेतन भी कम कर दिया गया है। दवा वितरण और स्टोरेज नॉन फार्मासिस्ट से कराया जा रहा है। सरकारी नियुक्तियां रोक दी गई हैं। हमारा रोजगार प्रभावित हो रहा है। नए पद सृजित किए जाएं।

मनोहर सिंह मेहता।

स्थानांतरण नीति पारदर्शी होनी चाहिए। हमारे कई साथी सालों से दुर्गम में तैनात रहे, इसके बाद भी कोई सुविधा नहीं मिली। हमारी मांग है कि हमारे दुर्गम में बने साथियों को भी सुगम की सुविधा मिले। छठे वेतनमान के तहत 5400 ग्रेड पे व्यवस्था लागू की जाए।

कमलेश आर्या।

जहां स्वास्थ्य नीति बनती है वहां फार्मेसी अधिकारियों को बुलाया जाए। बिना सहमति के बनाई गई व्यवस्था को थोप दिया जाता है। हमारी समस्याओं को देखते हुए व्यवस्था को नहीं बनाया जाता है। हमारी मांग है कि फार्मासिस्टों के पद बढ़ाए जाने चाहिए।

सुदर्शन नेगी।

हमारे लिए गोल्डन कार्ड तो बनाए गए हैं लेकिन पैनल में लिए गए अस्पताल इलाज के लिए पैसा जमा करवाते हैं। इस सुविधा को कैशलेस किया जाए। सालों से हम मांग कर रहे नई नियुक्तियों की लेकिन हमारी मांग पूरी नहीं हो रही है।

एनके जोशी।

हमारी मांग है कि छठे वेतनमान की व्यवस्थाओं को ही लागू किया जाना चाहिए। आपातकाल, चार धाम और पोस्टमार्टम की ड्यूटी के लिए नया कैडर बनाकर नियुक्तियां शुरू की जानी चाहिए। 63 पद पूल में रखे हैं इन्हें सृजित किया जाए।

पीके जोशी।

समान कार्य समान वेतन व्यवस्था लागू हो। फार्मेसी अधिकारियों से अतिरिक्त भार हटाया जाए। हमारी मांग है कि स्पष्ट स्थानांतरण नीति बनाकर व्यवस्थाएं सुधारी जाएं। अतिरिक्त कार्य होने से फार्मेसी अधिकारियों पर दबाव बढ़ रहा है।

कमलेश चंद्र तिवारी।

फार्मेसी अधिकारियों के पद समाप्त किए जा रहे हैं। इससे काम का दबाव बढ़ रहा है। व्यवस्थाओं को आसान करने की बजाय उन्हें मुश्किल बनाया जा रहा है। हमें यात्रा भत्ता भी नहीं दिया जाता है। ड्यूटी करने वाले मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान होते हैं।

संदीप जोशी।

चारधाम में फार्मेसी अधिकारियों की ड्यूटी लगने पर उनके भोजन और रहने की व्यवस्था की जाए। हम यात्रा के दौरान इन व्यवस्थाओं के लिए परेशान होते हैं। यात्रा भत्ता भी समय पर नहीं मिलता। यात्रा भत्ते का भुगतान एक माह में किया जाए।

देवेंद्र पांडे।

अस्पतालों में डिस्पेंसिंग का राइट किसी और को नहीं दिया जाए। इससे हमारा रोजगार प्रभावित हो रहा है फार्मेसी अधिकारियों को स्वास्थ्य नीति बनाते समय बैठक में बुलाया जाए। जिससे कि हम भी अपनी समस्याओं को रख सकेंगे।

अनिल कुमार तिवारी।

चारधाम यात्रा में तीन माह की ड्यूटी करने के बाद यात्रा का वेतन भत्ता नहीं दिया जा रहा है। हमारी मांग है की यात्रा वेतन भत्ते का भुगतान एक माह के भीतर कर दिया जाए जिससे कि हमें आर्थिक संकट नहीं झेलना पड़ेगा।

महेश चंद्र पांडे।

चार धाम ड्यूटी का कैडर अलग किया जाना चाहिए। वीआईपी और यात्रा ड्यूटी पर जो पद पूल में रखे गए हैं उन 63 पदों को क्रियाशील करके उनकी ड्यूटी चार धाम यात्रा में लगाई जानी चाहिए। अतिरिक्त कार्य डालकर हमारा कार्यभार ना बढ़ाया जाए।

मदन गोस्वामी

वीआईपी और यात्रा ड्यूटी के लिए जो पद पूल में रखे गए हैं उन्हें क्रियाशील किया जाए। हमारी मांग है कि हमें अतिरिक्त कार्य से हटाया जाए और समान कार्य समान वेतन प्रक्रिया को शुरू किया जाए। जिससे हम अतिरिक्त कार्य भार से मुक्त हो सकेंगे।

जितेंद्र सिंह, संगठन मंत्री,फार्मासिस्ट एसोसिएशन।

बोले जिम्मेदार

फार्मेसी अधिकारियों की सभी मांगें राज्य स्तर की हैं। इसके लिए सरकार के साथ समय-समय पर उनके संगठन की बैठक होती है। उनकी मांगों को लेकर कार्य भी किया जाता है। वेतनमान आदि को लेकर फार्मेसी अधिकारी राज्य स्तर पर वार्ता कर अपनी मांगों को रख सकते हैं।

डॉ. हरीश पंत, सीएमओ, नैनीताल।

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