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बोले रामपुर : शादियों की बढ़ाते थे शान,आज कारोबार हो गया बेजान

Rampur News - विवाह जैसे समारोहों के आयोजन में टेंट कारोबारियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बैंक्वेट हॉल संस्कृति, जीएसटी, और श्रमिकों की कमी ने उनके व्यापार को प्रभावित किया है। प्रशासन से सहयोग की...

Newswrap हिन्दुस्तान, रामपुरWed, 12 March 2025 11:01 PM
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बोले रामपुर : शादियों की बढ़ाते थे शान,आज कारोबार हो गया बेजान

विवाह जैसे बड़े समारोहों के आयोजन में अहम भूमिका निभाने वाले टेंट कारोबारी कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। प्रशासन और समाज की ओर से उन्हें समझने का प्रयास न के बराबर है, जबकि उनके कारोबार की समस्याएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। खासकर बैंक्वेट हॉल संस्कृति ने उनके व्यापार के सामने संकट खड़ा कर दिया है। टेंट कारोबारियों के लिए सबसे बड़ी दिक्कत सीजन में कुशल श्रमिकों की कमी है, क्योंकि सही समय पर आवश्यक लेबर मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। सुरक्षा, परिवहन, और यातायात पुलिस से जुड़ी समस्याएं भी उनके काम को जटिल बनाती हैं, जो इनके कारोबार की राह में आड़े आती हैं। टेंट कारोबारियों ने अपनी समस्याओं को लेकर हिन्दुस्तान से अपनी पीड़ा बयां की।

टेंट कारोबारी एक समय में कई परिवारों की रोजी-रोटी का जरिया थे, लेकिन आज वे अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। रामपुर जैसे शहर में, जहां टेंट कारोबार का अहम स्थान था, अब यह व्यापार बुरे दौर से गुजर रहा है। टेंट कारोबारियों का कहना है कि एक समय था जब शहर में सैकड़ों टेंट की दुकानें हुआ करती थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर सिर्फ 25-30 दुकानों तक सिमट गई हैं। इसके पीछे बैंक्वेट हॉल संस्कृति, जीएसटी, श्रमिकों की कमी और सुरक्षा से संबंधित समस्याएं मुख्य कारण बनी हैं।

टेंट कारोबारी बताते हैं कि इन समस्याओं के चलते उनका व्यापार पहले जैसा नहीं रहा। बैंक्वेट हॉल के बढ़ते चलन ने उनके काम को सीमित कर दिया है और फिर जीएसटी ने उनके काम में और मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अक्सर उन्हें कार्यक्रमों में पूरे पैसे नहीं मिल पाते, और सामान की टूट-फूट पर भी सही मुआवजा नहीं मिलता। इसके अलावा, सीजन में लेबर की भारी कमी हो जाती है, जिससे काम में देरी और परेशानी होती है। कई टेंट कारोबारी इन समस्याओं के चलते इस व्यवसाय को छोड़कर अन्य व्यापारों में हाथ आजमा रहे हैं।

समस्याओं के बावजूद, टेंट कारोबारी अपने काम को बचाने और इसे पुनः प्रगति की दिशा में लाने के लिए कई प्रयास कर रहे हैं। इस स्थिति में एक जिला टेंट एसोसिएशन की आवश्यकता महसूस हो रही है, जो उनके हितों की रक्षा कर सके और उनके लिए काम करने की सुविधाएं बढ़ा सके। टेंट कारोबारी चाहते हैं कि प्रशासन उनकी समस्याओं को समझे और समाधान प्रदान करे, ताकि उनका कारोबार फिर से प्रगति कर सके।

महंगाई के दौर में सामान हो जाता है खराब, बुकिंग मिल रही कम

टेंट कारोबारी सुनील ने बताया कि महंगाई के इस दौरान में टेंट का सामान महंगा आता है। टेंट का सामान इधर-उधर भेजने में काफी सामान खराब हो जाता है, तो वहीं टेंट को बुकिंग स्थल पर पहुंचाने पर भी काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। वहीं जिले में बड़ी संख्या में नए बैंक्वेट हाल खुल रहे हैं। बैंक्वेट हाल ने कारोबार प्रभावित किया है। बुकिंग नहीं मिल रही है। शहर के लोग छोटे से छोटे कार्यक्रम बैंक्वेट हाल में करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में बुकिंग न होने के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है। जिस तरह से बैंक्वेट हाल खुल रहे हैं, तो एक दिन कारोबार पूरी तरह सिमट जाएगा।

सुझाव दें

नो एंट्री के नाम पर भी होती परेशानी

टेंट कारोबारियों की गाड़ियों का चालान ट्रैफिक पुलिस नो एंट्री बताकर काट देती है। जहां दिन में ट्रैफिक पुलिस उनके टाटा मैजिक नहीं आने देती है और रिक्शा से वह पूरे सामान की पूर्ति नहीं कर पाते हैं। रिक्शा से पूरा सामान नहीं आने के कारण उनके कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। अगर कार्यक्रम दूर है तो रिक्शा से काम नहीं चलता है।

पार्टी समय पर टेंट संचालकों को करें भुगतान

टेंट संचालकों का कहना है कि पार्टी का ऑर्डर मिलने पर समय पर टेंट लगा दिया जाता है और कुछ पार्टी समय पर भुगतान नहीं करती हैं। भुगतान के लिए पार्टी के पास बार-बार जाना पड़ता है। कुछ पार्टी तो सहालग होने के बाद लंबे समय तक पैसा नहीं देती हैं। इससे कारोबार प्रभावित होता है। यह समस्या आम हो गई है। कुछ लोग तो टेंट का काम निपटने पर शत प्रतिशत भुगतान कर देते हैं लेकिन कुछ लोगों के पास पैसा फंस जाता है। यह समस्या को टेंट संचालकों को झेलनी पड़ती है, जिससे उन्हें काफी नुकसान भी उठाना पड़ता है।

जीएसटी की दर घटाकर की जाए पांच प्रतिशत

टेंट कारोबारियों का कहना है कि उनके कारोबार पर 18 प्रतिशत की जीएसटी वसूली जाती है। जो बहुत ज्यादा है। उन्हें पार्टी से कभी पूरे रुपये नहीं मिलते हैं। जीएसटी घटाकर पांच प्रतिशत करनी चाहिए। उनका कारोबार दिन रात है। उन्हें रात दिन लेबर के साथ एक से दूसरी जगह भागना पड़ता है। ऐसे में उनको खतरा भी रहता है। सुरक्षा की दृष्टिगत प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर टेंट कारोबारियों को शस्त्र लाइसेंस देने चाहिए। जिससे टेंट कारोबारी रात में काम पर आते-जाते खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।

क्या बोले--

1-रात में सामान लाने ले जाने के दौरान पुलिस परेशान न करें। उनकी लेबर को परेशान किया जाता है। बेवजह चेकिंग के नाम पर उत्पीड़न किया जाता है।

-महेंद्र

2-टेंट वालों को सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। समाज में छवि देखकर लोग आप पर भरोसा जताते हैं और जुड़ते हैं। अब में काफी बदलाव आया है।

-संजय सिंह

3-टेंट वालों को मौसम की समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। बारिश और तेज हवा से उन्हें सामान का नुकसान हो जाता है। इसकी भरपाई भी हमें ही करनी पड़ती है

-सोनू

4-18 प्रतिशत जीएसटी बहुत बड़ी समस्या है। इससे टेंट कारोबारियों को नुकसान हो रहा है। जीएसटी की दर 5 प्रतिशत की जाए। इससे टेंट कारोबारियों को राहत मिलेगी ।

-सूरज पाल

5-रिक्शा से सामान नहीं ढोने दिया जाता है। दिन में वाहन को भी नहीं आने देते हैं। ऐसे में वह कैसे अपना कारोबार करें। इस कार्रवाई से छूट मिलनी चाहिए।

-सिद्धांत

6-टेंट कारोबारी रात दिन शहर के बाहर भी काम के सिलसिले में जाते हैं। कारोबारियों को प्रशासन सुरक्षा की दृष्टिगत से शस्त्र लाइसेंस दें। ताकि वे बेखौफ होकर अपना काम कर सके।

-सुनील कुमार

7-अब पहले जैसा माहौल नहीं रहा। पहले के मुकाबले काम में काफी कमी आई है। पहले बर्थ-डे पार्टी तक के लिए टेंट की जरूरत पड़ती थी। छोटे बैंक्वेट हालों ने उसे भी पूरा कर दिया है।

-शानू

8-छोटे कार्यक्रमों में उनको उतने रुपये भी नहीं मिलते हैं। जितना उनका लेबर खर्च आ जाता है। जिसके चलते कई बार उन्हें अपने पास से खर्च उठाना पड़ता है। काफी दिक्कतें बढ़ी हैं।

-जसवीर सिंह

9-नो-एंट्री बताकर ट्रैफिक पुलिस परेशान करती है। उनके सामान से भरे वाहनों को दिन में शहर में एंट्री नहीं दी जाती है। इससे काफी समय लगता है और परेशानी होती है।

-भीमपाल

10- सहालग के समय परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेबर की दिक्कत आती रहती है। जिस कारण समय और रुपये काफी खर्च करने पड़ते हैं।

-अजय

11-कुछ माह का ही कारोबार बचा है। इसमें भी लेबर के लिए काफी परेशान होना पड़ता है। सरकार को भी हमारे कारोबार को बचाने के लिए सोचना चाहिए।

-मुकेश कुमार

12-टेंट कारोबार को बचाने के लिए सरकार की ओर मदद मिलनी चाहिए। इस काम में कमाई कम हुई है। अब लेबर मिलनी मुश्किल होती है।

-भोला यादव

13- टेंट का कारोबार कुछ माह ही चलता है। इसके भरोसे ही वर्षभर कारोबार करना पड़ता है। अब पहले जैसी कमाई नहीं रही है। समस्याएं बढ़ रही हैं।

-आकाश

- लेबर के लिए काफी परेशानी होती है। लेबर मिलती है तो वह अधिक रुपये की मांग करती है। जिस कारण काफी परेशानी होती है।

-सहदेव

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सुझाव--

-टेंट कारोबारियों को सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस दिए जाए।

-18 प्रतिशत जीएसटी की दर घटा पांच प्रतिशत की जाए।

-पुलिस रात में सामान लाने-ले जाने के दौरान कार्रवाई नहीं करे।

-समारोह के दौरान सामान की टूट फूट का मुआवजा दिया जाए।

-टेंट कारोबारियों की बुनियादी जरूरतों का ख्याल रखा जाए।

शिकायतें-

-टेंट वालों को सुरक्षा से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

-टेंट कारोबारियों को मौसम के कारण नुकसान उठाना पड़ता है।

-साहलग के समय काम के लिए मजदूर मिलने चुनौती से कम नहीं है।

-समारोह के दौरान सामान की टूट फूट होने पर भरपाई नहीं की जाती है।

- सीजन पूरा होने पर काम नहीं मिलता है। इससे आर्थिक तंगी बढ़ जाती है।

25

शहर में 25 से तीस टेंट कारोबार की दुकानें मौजूद है।

10

एक दुकान पर दस से कम लेबर से काम नहीं चलता है।

18

18 प्रतिशत लगने वाली जीएसटी को कम किया जाए।

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