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बोले रामपुर : रेडीमेड कपड़ों के चलन ने रोक दी सिलाई मशीन की तेज रफ्तार

Rampur News - रामपुर के टेलर मास्टरों का कहना है कि ऑनलाइन शॉपिंग और रेडीमेड कपड़ों के बढ़ते चलन के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। पहले जहां दर्जी के पास ग्राहक आते थे, अब वे ऑनलाइन खरीदारी की ओर बढ़ रहे...

Newswrap हिन्दुस्तान, रामपुरWed, 12 March 2025 11:05 PM
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बोले रामपुर : रेडीमेड कपड़ों के चलन ने रोक दी सिलाई मशीन की तेज रफ्तार

तुझे कसम है खुदी को बहुत हलाक न कर, तू इस मशीन का पुर्जा है, तू मशीन नहीं...दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां रचना टेलर मास्टरों के हालातों पर सटीक बैठती हैं। ऑनलाइन शॉपिंग और रेडीमेड कपड़ों के बाजार में टेलर मास्टर ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं। आधुनिकता के दौर में सिलाई मशीन से बने कपड़े कम ही लोगों को पसंद आ रहे हैं। 10-12 साल पहले तक कैंचियों से कपड़ों को आकार देने और सिलाई मशीन से सिलने की कला का सम्मान था, आज वहां कम ही ग्राहक कपड़े सिलवाने आते हैं। दर्जी की दुकानें खाली पड़ी हैं। उन्होंने अपनी पीड़ा बयां की है। जिले के ज्वालानगर रोड, कृष्ण बिहार,सीआरपीएफ रोड,मिस्टन गंज,राजद्वारा रोड सहित कई स्थानों पर कपड़ा सिलाई का काम होता है। अधिकांश पुरुष और महिलाएं कपड़े सिलती हैं। शहर में इनकी बड़ी तादात है। महिला और पुरुषों के कपड़े सिलने वाले टेलर मास्टरों का कहना है कि कई लोगों का पुश्तैनी काम है। पहले हाथ से तुरपाई का चलन था, जिसमें घरों की महिलाएं भी मदद करती थीं। उस दौर में दुकानों पर सात-आठ लोग काम करते थे। कोई कैंची से कपड़ों को आकार देता था, तो कोई तुरपाई करता था। धीरे-धीरे तुरपाई का चलन खत्म हो गया। हालांकि शहर के कुछ क्षेत्र में अभी भी कुछ घरों में हाथ से तुरपाई की जाती है। आने वाले दिनों में सिलाई के रंग डिजाइनर कपड़े फीका न कर दें, इसको लेकर टेलर मास्टर चिंतित हैं।

टेलर मास्टरों का कहना है कि आधुनिकता के दौर में सिलाई कढ़ाई पर असर पड़ा है। अब लोग शोसल साइटों पर डिजाइन देखकर टेलर मास्टरों के पास कपड़े बनवाने आ रहे हैं। ऐसे में दुकान से ग्राहक वापस न लौटे, इसलिए उनकी मनपसंद डिजाइन को सिला जाता है, जिसमें समय काफी वक्त लगता है। पहले सादा सिलाई के लोग कपड़ों को पहनना पसंद करते थे। अब तो कोट पेंट में भी काफी सारी वैरायटी आ रही हैं। इन्हें भी तैयार करने में समय अधिक लग रहा है।

ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ने से परेशानी

रामपुर। टेलर मास्टरों का कहना है कि आजकल की जिंदगी काफी भागदौड़ वाली हो गई है। लोग समय की बचत करना चाहते हैं। इसलिए वह ऑनलाइन खरीदारी पर काफी जोर दे रहे हैं। इस समय मार्केट में कई कंपनियां लोगों को सर्विस उपलब्ध करा रही हैं। ऑर्डर बुक करने के दो दिन के भीतर-भीतर ग्राहकों के पास में डिलीवरी पहुंच रही है। हालांकि इसमें ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी की शिकायतें भी बढ़ गई हैं। क्योंकि अधिकतर कंपनियां ग्राहकों को दिखाते कुछ और हैं और डिलीवरी कराते कुछ और हैं। ऐसे में ग्राहकों को जागरूक होने की आवश्यकता है। इसके लिए समय-समय पर जागरुकता के कार्यक्रम आयोजित कराने चाहिए। ताकि ग्राहकों का रूझान ऑनलाइन की तरफ से हटें और टेलरिंग का काम आगे बढ़ सके। टेलर बताते हैं कि पहले पैंट-शर्ट सिलवाने के लिए लोगों को टेलर के पास ही आना पड़ता था। अब रेडीमेड गारमेंट्स के चलन में भी बहुत सारी वैरायटी पेंट-शर्ट की ग्राहकों को मिल रही हैं।

सिलाई से कारीगर कर रहे हैं किनारा

रामपुर। टेलर मास्टर राजेश का कहना है कि पिछले 35 सालों से सिलाई कर रहे हैं। पहले में दुकानों पर अधिकांश लोग सिलाई के लिए कपड़े लेकर आते थे। बाजार में काफी प्रतिस्पर्धा थी। अब धीरे-धीरे प्रतिस्पर्धा का दौर खत्म होने लगा है। पहले दुकानों पर आठ से 10 कर्मचारी काम करते थे। अब सिर्फ गिने-चुने कारीगरों से ही काम लिया जा रहा है। क्योंकि कारीगरों की संख्या कम होने से इस काम पर असर पड़ा है। अब लोग रेडीमेड गारमेंट्स की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। इसलिए टेलरिंग में काफी मंदी है। हालांकि अभी भी पुराने लोग टेलरों के पास से ही कपड़े सिलवाना अधिक पंसद करते हैं। इसलिए जिन लोगों के पास ऐसे ग्राहकों की संख्या ठीक-ठाक है तो उनका कारोबार ठीक प्रकार से चल रहा है।

तुरपाई का चलन फिर शुरू होना चाहिए: योगेश का कहना है कि हाथों की तुरपाई का दौर अब धीरे-धीरे खत्म हो गया है। यदि यह दौर वापस आ जाएगा तो सिलाई कढ़ाई से जुड़े लोगों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट नहीं आएगा। क्योंकि इस काम से घरों की महिलाओं को आसानी से जोड़ा जा सकता है। अधिक से अधिक लोगों को रोजगार भी मिल पाएगा। अब टेलरिंग के कारोबार में भी आधुनिक मशीन आ रही है। यह मशीनें काफी महंगी भी आती है। इनके दामों को कम किया जाना चाहिए।

दामों पर भी पड़ रहा फर्क

रामपुर। रेडीमेड गारमेंट्स में सस्ते दामों पर भी कपड़े ग्राहकों को उपलब्ध हो रहे हैं। जबकि टेलर के पास ग्राहक आता है तो उसे सबसे पहले कपड़ा खरीदना पड़ता है। उसकी सिलाई करानी होती है। जिससे लोगों को समय अधिक खर्च करना पड़ता है। इसलिए अब धीरे-धीरे रेडीमेड गारमेंट्स का चलन बढ़ने से टेलर का काम करने वालों को दिक्कत आ रही है। अधिकांश युवा ऑनलाइन शॉपिंग कर कपड़ों की खरीदारी कर रहे हैं, जिसका असर टेलरिंग कारोबार पर भी पड़ रहा है।

सुझाव एवं शिकायतें

1. महिलाओं को अधिक से अधिक टेलरिंग के काम से जोड़ा जाए। इससे उनकी आजीविका में फायदा होगा।

2. ऑनलाइन कपड़े खरीदने वाले ग्राहकों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए।

3. सिलाई के सामान के दामों को कम किया जाए। इससे इस कारोबार से जुड़ने वाले लोगों को राहत मिलेगी।

4. टेलरों का मनोबल बढ़ाने के लिए समय-समय पर उन्हें प्रोत्साहित करने का काम किया जाना चाहिए।

5. ऑनलाइन शॉपिंग का चलन कम हो, तो टेलरिंग कारोबार को भी आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

6. टेलरिंग का काम कम होने से कारीगर आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। इन्हें सरकारी मदद दी जाए।

1. ऑनलाइन शॉपिंग से टेलरिंग का काम प्रभावित हो रहा है। इससे टेलरों के सामने रोजगार का संकट बढ़ रहा है। लोग यह काम छोड़ रहे हैं।

2. महिलाएं टेलरिंग के कारोबार से नहीं जुड़ रही हैं। इससे महिलाएं कपड़े सिलवाने से बचती हैं।

3. मार्केट में टेलरिंग का कारोबार करने वाले लोग बैठते हैं, वहां शौचालय, पेयजल की व्यवस्था नहीं है।

4. टेलरिंग का काम करने वाले लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

5. ऑनलाइन कपड़े खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ने से सिलाई के काम पर असर पड़ा है।

6. आर्थिक तंगी की वजह से कारीगर परेशान हैं। इनकी समस्या बढ़ती जा रही है।

हमारी भी सुनें

जगह-जगह पर टेलरिंग के दुकान के स्थान पर बुटीक भी खुल रहे हैं। ऐसे में वहां पर सिलाई के दाम अधिक होते हैं। बुटीक और टेलरिंग के दाम एक होना चाहिए। महंगाई से सिलाइ के काम पर फर्क पड़ा है।

-राजेश

-महिलाओं को भी टेलरिंग कारोबार में आना चाहिए। क्योंकि अब महिलाएं भी पुरुषों से कम नहीं हैं। इसके लिए अधिक से अधिक संख्या में सिलाई केंद्रों को खोला जाना चाहिए।

-योगेश

अब से पहले टेलरिंग के कारोबार का काफी चलन था। जिस प्रकार से ऑनलाइन सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ रही है। उससे इस कारोबार पर असर पड़ा है।

-रवि

अब टेलरों के पास ऐसे ग्राहक अधिक आ रहे हैं, जो ऑनलाइन कपड़ों में बनने वाले डिजाइन वाले कपड़े सिलवाना पसंद कर रहे हैं। इसमें अधिक समय लगता है। टेलरिंग के सामान भी महंगे है।

-मुकेश

कारीगरों की संख्या घटने से टेलरिंग का काम मंदा हुआ है। इसको बढ़ाने के लिए सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए। साथ ही टेलर के काम में प्रयोग होने वाले सामान के दाम भी कम होने चाहिए।

-राजू उर्फ गुड्डू

रेडीमेड का चलन बढ़ने से टेलरिंग का कारोबार प्रभावित हुआ है। रेडीमेड कपड़ों में बहुत सारी वैरायटी आ रही हैं। जबकि बाजार में बिना सिलाई वाले कपड़ों में वैरायटी कम उपलब्ध हैं।

-मनोज

रेडीमेड का चलन बढ़ने से टेलरिंग का कारोबार प्रभावित हुआ है। रेडीमेड कपड़ों में बहुत सारी वैरायटी आ रही हैं। जबकि बाजार में बिना सिलाई वाले कपड़ों में वैरायटी कम उपलब्ध हैं।

-मनोज

ोजगह-जगह टेलरों की दुकान खुलने से इस दौर में कंपटीशन भी बढ़ गया है। महिलाएं भी इस कारोबार में आ रही हैं। जिससे प्रतिस्पर्धा का दौर अधिक हो गया है। टेलरिंग के सामान महंगे है।

-नंद किशोर

ग्राहक सोशल मीडिया पर नए-नए डिजाइन लेकर कपड़े सिलवाने आ रहे हैं। ऐसे में उन्हें सिलने में काफी समय लगता है। हालांकि टेलर ग्राहकों की पसंद का डिजाइन तैयार कर लेते हैं।

-मुकेश

ऑनलाइन कपड़े खरीदने वाले ग्राहकों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए। इससे टेलरिंग के प्रति लोगों का रूझान बढ़ेगा तो सिलाई कारीगरों को रोजगार मिलेगा।

-शाकिर बेग

सिलाई में प्रयोग होने वालेसामानों के दामों को कम किया जाए। इससे इस कारोबार से जुड़ने वाले लोगों को राहत मिलेगी। दाम कम होने से टेलरिंग के कारोबार को बचाया जा सकता है।

-जावेद

सिलाई में प्रयोग होने वालेसामानों के दामों को कम किया जाए। इससे इस कारोबार से जुड़ने वाले लोगों को राहत मिलेगी। दाम कम होने से टेलरिंग के कारोबार को बचाया जा सकता है।

-जावेद

टेलरों का मनोबल बढ़ाने के लिए समय-समय पर उन्हें प्रोत्साहित करने का काम किया जाना चाहिए। जिससे अधिक से अधिक लोग इस कार्य से जुड़े और पुराने लोग कार्य में रूचि ले सकें।

-सतपाल यादव

ऑनलाइन शॉपिंग का चलन कम होगा, तो टेलरिंग कारोबार को भी आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। जब तक ऑनलाइन शॉपिंग के लिए कुछ अधिक सख्त नियम नहीं बनाए जाएंगे,तब तक कारोबार नहीं बढ़ सकता।

-रामगोपाल सैनी

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