बोले रामपुर : कारोबार चौपट कर रहा जाम, पार्किंग का हो इंतजाम
Rampur News - रामपुर का रेडीमेड कपड़ा कारोबार जाम, पार्किंग की कमी और ऑनलाइन खरीदारी के कारण संकट में है। दुकानदारों का कहना है कि अतिक्रमण और जीएसटी ने बिक्री में कमी की है। वे प्रशासन से सुविधाओं में सुधार की मांग...

ग्राहकों से गुलजार रहने वाला रामपुर का रेडीमेड कपड़ा कारोबार बेरंग होता जा रहा है। अतिक्रमण से सड़कें संकरी हो गई हैं। पार्किंग न होने से लोग सड़कों पर वाहन खड़े कर देते हैं। इनसे जाम की स्थिति बनती है। ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन और जीएसटी से भी कपड़ा कारोबार पर असर पड़ रहा है। बाजार में पार्किंग, सुलभ शौचालय की व्यवस्था और सुरक्षा बढ़ाई जाए तो इस कारोबार से जुड़े लोगों को सहूलित मिलेगी। अभी समस्याओं के बीच कारोबारी कारोबार करने के लिए जूझ रहे हैं। उनकी मांग है कि समस्याओं का समाधान किया जाए। लेभर के बाजारों में रेडीमेड कपड़ों की 1000 दुकानें हैं। दुकानदार लाखों रुपये टैक्स देते हैं। फिर भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। बाजार में पार्किंग व शौचालय नहीं है। सड़कों पर अतिक्रमण की वजह से जाम लगता है तो ग्राहक दुकानों पर आने कतराते हैं। इससे भी कपड़ों की बिक्री कम होती है।
कारोबारियों ने बताया कि शहर के ज्वालानगर में रेडीमेड कपड़ों की दुकानें सुबह से देर रात तक गुलजार रहती थीं। अब ऑनलाइन शॉपिंग और शहर स्थित शॉपिंग मॉल से खरीदारी का चलन बढ़ने से बाजार में खरीदारों की संख्या घट रही है। संकरी गलियों में बसे इस बाजार में अतिक्रमण, वाहन पार्किंग के अभाव और रेहड़ी पटरी वालों, मुख्य मार्गों एवं चौराहों पर हर रोज जाम की वजह से खरीदारी का चलन कम हो रहा है।
कारोबारियों का कहना है कि लाखों रुपये के रेडीमेड कपड़ों से भरी दुकानों पर खरीदारों की संख्या घट गई है। होली ,दिवाली और ईद के मौक पर ही बाजार में बिक्री बढ़ती है। कमाई कम होने से दुकानदार आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। दुकान का किराया, बिजली का बिल, नौकर का वेतन देना मुश्किल हो रहा है। कारोबारी इस बाजार से हटकर दूसरी जगहों पर दुकानें तलाश रहे हैं। कई कारोबारियों ने शहर के बाहर कारोबार भी शुरू कर दिया है। बताया कि महंगाई के दौर में दुकान में सामान भरने के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। बाजार में समस्याओं की वजह से बिक्री कम होती है तो लाखों रुपये का माल दुकानों में जमा है।
दुकानदारों का कहना है कि सुरक्षा, आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम किए जाए और इस बाजार से कपड़ा खरीदारी करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए तो बिक्री बढ़ेगी। इससे कारोबिरियों की आय में इजाफा होने पर वे आर्थिक तंगी का सामना करने से बचेंगे। इसके लिए प्रशासन को उनका सहयोग करना चाहिए।
प्रतिस्पर्धा के दौर में छोटे दुकानदारों का बुरा हाल
रामपुर। ज्वालानगर के कपड़ा बाजार में कुछ दुकानों को छोड़कर लगभग 90 फीसदी दुकानें पुरानी हैं। रेडीमेड कपड़ा कारोबारी बड़ी दुकानों पर बिकने वाले कपड़ों के डिजाइनों एवं रंगों में समय के अनुसार बदलाव की वजह से परेशान होते है। ग्राहक विवाह के मौके पर खरीदारी के लिए दूसरी जगह चले जाते हैं। दुकानदार बताते हैं कि बाजार में जाम की स्थिति बन रही है। इसके लिए यातायात पुलिस ने कई बार प्लान बनाया, यहां तक कि बाजार में पुलिस बैरियर तक लगा दिए गए, जिससे बाजार में ई-रिक्शा, टेंपो व चार पहिया वाहन नहीं घुस सकें। परंतु कुछ दिन के बाद ही प्लान को धड़ाम हो जाता है। जाम से दुकानदार और ग्राहक दोनों परेशान हो रहे हैं।
अघोषित बिजली कटौती से व्यापार होता है प्रभावित
कारोबारियों का कहना है कि कब बिजली चली जाएगी इसका कोई समय तय नहीं है। कभी फाल्ट तो कभी मरम्मत के नाम पर बिजली काटी जाती है। इससे व्यापार प्रभावित होता है। सर्दी में तो किसी तरह काम चल जाता है पर गर्मियों में खासी दिक्कत उठानी पडती है। अघोषित कटौती से कभी-कभी तो स्थिति यह रहती है कि इन्वर्टर चार्ज नहीं हो पाते हैं।
जीएसटी लगने से बढ़ी मंहगाई
रेडीमेड कपड़ों पर 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाई जाती जाती है। इसी वजह से कपड़ा व्यापारियों का कारोबार काफी प्रभावित हुआ है।जीएसटी लगने के बाद महंगाई और बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी लगने के बाद से कपड़ों के दामों में काफी बढ़ोतरी हुई है। जेब हल्की करनी पड़ रही है।
बाजार में जाम से निपटने को ई-रिक्शा पर लगे रोक
सुनील कुमार बताते हैं कि बाजार में कहीं भी पार्किंग की व्यवस्था न होने से व्यापारियों को वाहन अपनी दुकान के आगे खड़े करने पड़ते हैं। ग्राहकों के भी वाहन खड़े होने से दुकान के अंदर आने-जाने के लिए जगह तक नहीं बचती है। रही सही कसर ई-रिक्शा वाले पूरी कर देते हैं। जहां पर भी बाजार में ई-रिक्शों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगता है। उस स्थिति में बाजार जाममुक्त रहता है। कुछ ही दिन व्यवस्था पर अमल होता है। पुलिस की ढील मिलते ही दोबारा ई-रिक्शावाले नासूर बन जाते हैं। शहर में हजारों ई-रिक्शा चल रही हैं। लाख कोशिशों के बाद भी बाजार में जाने से ई-रिक्शा पर रोक नहीं लग पा रही है। दूसरी ओर नगर पालिका बाजार में हो रहे अतिक्रमण को भी नहीं हटवा पा रही है। ऐसे में दुकानदार व ग्राहक दोनों ही परेशान हो रहे हैं। शहर के बड़े बाजार से लेकर अन्य मार्केट तक अब दिन भर ई-रिक्शा पहुंच रहे हैं।
सुझाव एवं शिकायतें
ल्ल कपड़ा बाजार में एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है। इससे कई बार ग्राहकों को बहुत परेशानी होती है।
ल्ल ई-रिक्शों के प्रवेश से बाजार में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। रोक लगती है फिर छूट दे दी जाती है।
ल्ल बाजार में पार्किंग की व्यवस्था न होने से दुकानों के बाहर वाहन खड़े करने पड़ते हैं। कई बार ग्राहक दुकान से लौट जाते हैं।
ल्ल बाजार में पेयजल की समस्या है। गर्मी के दिनों में अधिक परेशानी होती है।
ल्ल बाजार में अतिक्रमण हावी है, इससे काम प्रभावित होता है। ग्राहकों को दिक्कतें होती हैं।
ल्ल बाजार में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय बनवाए जाएं तो राहत मिले।
ल्ल बाजार में नालियों की सफाई कराई जाए। बारिश के दौरान जलभराव न हो, इससे पहले व्यवस्था की जाए।
ल्ल बाजार में हर गली-चौराहे पर सीसीटीवी लगवाएं,इससे सुरक्षा पुख्ता होगी।
ल्ल जाम की समस्या दूर करने के लिए बाजार में ई-रिक्श का प्रवेश रोका जाए।
ल्ल बाजार में वाहन पार्किंग के लिए जगह चिह्नित की जाए तो ग्राहकों को दिक्कत होगी।
बाजार में ई-रिक्शा और ठेले वालों के कारण जाम लगता है। उनसे कहने पर विवाद होता है। इस समस्या से निपटा जाना चाहिए।
-ध्रुव
पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से दुकानदारों के साथ ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पार्किंग की जगह चिह्नित की जाए।
-सागर
पार्किंग न होने से ग्राहक वाहन बेतरतीब तरीके से खड़े करते हैं। इनसे जाम लगता है। इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।
-अमित
ऑनलाइन शॉपिंग से कारोबार पर असर पड़ा है। आमदनी कम हुई है। दुकानदारों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है।
-बाबर पाशा
नालियों की सफाई और जलनिकासी की उचित व्यवस्था की जाए। बारिश में जलभराव होता है। जलभराव होने से ग्राहकों को परेशानी होती है।
-दीपक
बाजार में शौचालय नहीं होने से दुकानदारों और ग्राहकों को समस्या होती है। शर्मिंदगी उठानी पड़ती है।
-वीरेंद्र मोहन सक्सेना
शहर में अधिकांश लोगों का आना-जाना रहता है। वे बाहर स्थित दुकानों से ही खरीदारी कर लेते हैं। बाजार के दुकानदार ग्राहकों के आने का इंतजार करते हैं। -रोहित कुमार
बाजार में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। यहां के ग्राहकों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। पानी की व्यवस्था की जानी चाहिए।
-जितेंद्र
ऑनलाइन के चलन से इस कारोबार पर असर डाला है। इस समस्या का निस्तारण किया जाए। इससे कारोबार को पंख लगेंगे।
-नईम
बाजार में शौचालय नहीं है। दुकानदारों एवं ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। शौचालय बनना जरूरी है।
-एवन
पार्किंग न होने से लोगों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। इसके लिए तत्काल व्यवस्था की जाए। इससे दुकानदारों को सहूलित मिलेगी। -सुनील कुमार
बाजार में दुकानदारों और ग्राहकों की परेशानी को देखते हुए सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए। इसके लिए प्रशासन तेजी से काम करे।
-जैव खान
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