बोले रामपुर : भंडारण की व्यवस्था हो तो फल खराब होने से बचे
Rampur News - रामपुर में फल कारोबारियों की स्थिति चुनौतीपूर्ण है। भंडारण की कमी और पुलिस की ज्यादतियों के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी में फल खराब होने का खतरा और फास्ट फूड के बढ़ते चलन से...

रामपुर में फल कारोबारियों की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है, रोजाना लाखों का कारोबार होने के बावजूद उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। एक प्रमुख समस्या यह है कि भंडारण की उचित व्यवस्था का अभाव है, जिससे व्यापारियों को फलों को सुरक्षित रखने में कठिनाई होती है। छोटे दुकानदारों को पुलिस की ज्यादतियों का भी सामना करना पड़ता है, क्योंकि उन्हें सड़कों पर फल बेचने की अनुमति नहीं मिलती। पुलिस उन्हें अपने ठेले हटाने के लिए मजबूर करती है, जिससे उनका कारोबार प्रभावित होता है। फल कारोबारियों के सामने ढेरों समस्याएं हैं। जो अपने कारोबार को बचाए रखने के लिए प्रयास कर रहे हैं। सरकारी से प्रोत्साहन न मिलने से वे कारोबार करने के लिए जूझ रहे हैं। कारोबारियों ने बताया कि भंडारण की व्यवस्था न होने से फलों के खराब होने से नुकसान होता है तो पुलिस भी ठेलों पर फल बेचने वालों को भगाती रहती है। फास्ट फूड का चलन तेजी से बढ़ा है। उसने फल के कारोबार पर असर डाला है। गर्मी में केला, सेब, संतरा, मौसमी समेत अन्य फल खराब होने का सबसे अधिक खतरा रहता है। शहर में अधिकतर फल ठेलों पर ही बिकते हैं। थोक स्तर पर यही लोग मंडी से ले जाते हैं। शादी पार्टी के कार्यक्रमों में फलों की मांग बढ़ जाती है। हालांकि रमजान के रोजे करीब है। इससे फल विक्रेताओं को काम में तेजी आने की उम्मीद है।
कारोबारियों का कहना है कि फलों को रखने के लिए अनुदान पर फ्रीजर उपलब्ध होने चाहिए। इसके लिए शासन स्तर से फल कारोबारियों को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। क्योंकि उद्योग विभाग की ओर से विभिन्न कार्यों के लिए अनुदान, सब्सिडी का प्रावधान किया जा रहा है। मगर इस कच्चे सौदे के लिए कहीं पर कोई राहत नहीं दी जा रही है। वे कहते हैं कि भंडारण और परिवहन की जो दिक्कत है उसे कहा नहीं जा सकता। जैसे-तैसे फलों को बाहर से मंगाने का काम किया जाता है और तब तक चिंता रहती है जब तक फल पूरी तौर पर खत्म न हो जाएं। कारोबारियों ने बताया कि फल ज्यादातर दूर दराज के राज्यों से लाने पड़ते हैं। यही वजह है कि यहां पर फलों की कीमत ज्यादा रहती है। कहते हैं कि 15 से 20 फीसदी फल खराब हो जाते हैं। कई मर्तबा ऐसा होता है कि फलों की लागत भी नहीं निकल पाती है और यही लगता है कि फलों का कारोबार बंद ही कर दें। मगर इस आस में रहते हैं कि चार पांच महीने में सब कुछ ठीक हो जाएगा। फास्ट फूड के इस दौर में फल वालों की चिंता स्वाभाविक भी है। शादी, बारात या फिर अन्य मौके पर भी पहले जैसी फलों की मांग नहीं होती है।
योजनाओं की नहीं मिलती जानकारी
फल कारोबारियों का कहना है कि उन्हें अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए और सहयोग चाहिए यह लोग सुबह से शाम तक मेहनत करने के बाद भी अपने परिवार को अच्छे तरीके से कमाई नहीं कर पाते है। अच्छी कमाई के लिए उन्हें अपने व्यसाय को बढ़ाने के लिए बैंक द्वारा सरकारी योजनाओं की जानकारी देने वाला कोई नहीं है। गर्मी में फलों को खराब होने से बचाने के लिए प्रयाप्त इंतजाम किए जाने चाहिए। फल कारोबारियों ने कहा कि उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं मिलती है।
सुझाव एवं शिकायतें
1. अनुदान पर कारोबारियों को फलों को रखने के लिए फ्रीजर सरकार द्वारा रियायती किराये पर उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
2. भंडारण के लिए स्थानीय स्तर पर वृहद स्तर पर सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
3. ठेलियों पर फल बेचने वालों को पुलिस कभी भी परेशान न करे।
4. भंडारण और परिवहन की व्यवस्था फल उत्पादकों और विक्रेताओं को मिलनी चाहिए।
1. अपने यहां फल की पैदावार न के बराबर होने से बाहर से ही फल मंगाए जाते हैं जिससे उसकी कीमत बढ़ जाती है।
2. भंडारण की सुविधा उपलब्ध न होने से कारोबारियों को हमेशा चिंता रहती है।
3. फ्रीजर उपलब्ध कराने के लिए सहायता नहीं मिलती है।
4. फल विक्रेताओं को आयुष्मान कार्ड, सस्ते या निशुल्क राशन नहीं मिलता है।
फलों को सुरक्षित रखने के लिए सब्सिडी पर फ्रीजर आदि की व्यवस्था शासन स्तर से होनी चाहिए।
-अनवर अली
फल बेचने का काम सीजन का कारोबार है। गर्मी के सीजन में कारोबार ठीक चलता है। अन्य मौसम में मंदी के दौर से गुजरता है। -अजय
फल खराब होने का खतरा रहता है। फलों को सुरक्षित रखने के लिए इंतजाम होने चाहिए।
-अख्तर अली
फास्ट फूड के दौर में अब फल कारोबार हाशिये पर ज्यादा दिख रहा है। इसकी चिंता सता रही है। सरकार कुछ करे। -प्रेमशंकर
शहर से लेकर जिले में अधिकतर जो फलों की दुकानें हैं वे ठेलियों पर लगती हैं। ठेली दुकानदारों को परेशान न किया जाए। -इरफान
फल के कारोबार को सुरक्षित रखना बड़ा चुनौतीपूर्ण है इसलिए इस कारोबार पर ध्यान देने की जरूरत है। -बंटी कुमार
अनुदान पर फलों को रखने के लिए फ्रीजर की व्यवस्था सरकारी स्तर से करायी जानी चाहिए जिससे दिक्कतें खत्म हों। -भजन लाल
दूर दराज से फल आने से इसकी कीमतें बढ़ जाती हैं लिहाजा डिमांड में भी कमी आ रही है। इससे चिंता रहती है।
-राधे
कारोबार आसान नहीं रहा क्योंकि फलों को ज्यादा समय तक सुरक्षित रखने के लिए कोई बंदोबस्त नहीं हैं।
-विशाल
फलों के भंडारण की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। क्योंकि दुकानों पर लंबे समय तक फल भंडारित नहीं हो सकते। -वेदप्रकाश
फल की डिमांड कम होने से आर्थिक तौर पर दिक्कतें आ रही हैं। लंबे समय से इसी धंधे में लगे हैं।
-सुरेश
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