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रेलवे यात्रियों का सफर होगा मुश्किल, 12 अप्रैल से 122 ट्रेनें निरस्त, कई बदले रास्ते से जाएंगी

  • रेलवे यात्रियों का सफर मुश्किल होगा। 12 अप्रैल से गोरखपुर से और होकर जाने वाली रूटीन व स्पेशल मिलाकर 122 ट्रेनें निरस्त रहेंगी। कई बदले मार्ग से चलेंगी। इतनी ज्यादा संख्या में ट्रेनों का निरस्तीकरण एनईआर के इतिहास में कभी नहीं हुआ।

Deep Pandey लाइव हिन्दुस्तानThu, 27 Feb 2025 06:52 AM
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रेलवे यात्रियों का सफर होगा मुश्किल, 12 अप्रैल से 122 ट्रेनें निरस्त, कई बदले रास्ते से जाएंगी

पूर्वोत्तर रेलवे 12 अप्रैल से अब तक सबसे बड़ा ब्लॉक लेने जा रहा है। ये ब्लॉक तीन मई तक चलेगा। कुल 22 दिनों तक के ब्लॉक में गोरखपुर से और होकर जाने वाली रूटीन व स्पेशल मिलाकर 122 ट्रेनें निरस्त रहेंगी। इतनी ज्यादा संख्या में ट्रेनों का निरस्तीकरण एनईआर के इतिहास में कभी नहीं हुआ।

इस ब्लॉक को लेकर रेलवे बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। इस ब्लॉक से गोरखपुर में यार्ड रिमॉडलिंग का काम किया जाएगा। दरअसल, डोमिनगढ़ से गोरखपुर तक थर्ड लाइन का काम पूरा हो गया है। उसी लाइन के इंटरलॉकिंग के लिए ब्लॉक लिया गया है। ब्लॉक के दौरान गोरखधाम, वैशाली जैसी कुछ प्रमुख ट्रेनें छोड़ बाकी लगभग सभी ट्रेनें निरस्त रहेंगी। कुछ को डायवर्ट तो कुछ को शार्ट टर्मिनेट भी किया जाएगा। 12 अप्रैल से 26 अप्रैल तक प्री एनआई होगी, उसके बाद 27 से 3 मई तक एनआई का काम किया जाएगा। इंटरलॉकिंग के बाद ट्रेनों का संचालन काफी सहज हो जाएगा। ट्रेनें बेवजह डोमिनगढ़ या कैंट में नहीं खड़ी रहेंगी।

मुम्बई रूट की एक ट्रेन को छोड़, बाकी सभी निरस्त : मुम्बई-पुणे रूट की एक ट्रेन को छोड़कर बाकी सभी ट्रेनें निरस्त रहेंगी। इससे मुम्बई जाने वाले यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ेगा। कुशीनगर एक्सप्रेस को गोमतीनगर से चलाई जाएगी।

कार्य पूरा होने पर नहीं बेवजह नहीं रुकेंगी ट्रेनें : तीसरी लाइन व दोहरीकरण का कार्य पूरा होने पर सबसे अधिक राहत एक्सप्रेस ट्रेनों को होगा। अभी नकहा जंगल रूट से गुजरने वाली ट्रेनों को ट्रैक खाली नहीं मिलने पर रुकना पड़ता है, लेकिन दोहरीकरण का कार्य पूरा होने पर यात्रियों को राहत मिलेगी। थर्ड लाइन पूरा होने से गोरखपुर से आने-जाने वाली ट्रेनों को बिना रुकावट के चलाया जा सकेगा।

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पूर्वोत्तर रेलवे 12 अप्रैल से अब तक सबसे बड़ा ब्लॉक लेने जा रहा है। ये ब्लॉक तीन मई तक चलेगा। कुल 22 दिनों तक के ब्लॉक में गोरखपुर से और होकर जाने वाली रूटीन व स्पेशल मिलाकर 122 ट्रेनें निरस्त रहेंगी। इतनी ज्यादा संख्या में ट्रेनों का निरस्तीकरण एनईआर के इतिहास में कभी नहीं हुआ।

इस ब्लॉक को लेकर रेलवे बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। इस ब्लॉक से गोरखपुर में यार्ड रिमॉडलिंग का काम किया जाएगा। दरअसल, डोमिनगढ़ से गोरखपुर तक थर्ड लाइन का काम पूरा हो गया है। उसी लाइन के इंटरलॉकिंग के लिए ब्लॉक लिया गया है। ब्लॉक के दौरान गोरखधाम, वैशाली जैसी कुछ प्रमुख ट्रेनें छोड़ बाकी लगभग सभी ट्रेनें निरस्त रहेंगी। कुछ को डायवर्ट तो कुछ को शार्ट टर्मिनेट भी किया जाएगा। 12 अप्रैल से 26 अप्रैल तक प्री एनआई होगी, उसके बाद 27 से 3 मई तक एनआई का काम किया जाएगा। इंटरलॉकिंग के बाद ट्रेनों का संचालन काफी सहज हो जाएगा। ट्रेनें बेवजह डोमिनगढ़ या कैंट में नहीं खड़ी रहेंगी।

मुम्बई रूट की एक ट्रेन को छोड़, बाकी सभी निरस्त : मुम्बई-पुणे रूट की एक ट्रेन को छोड़कर बाकी सभी ट्रेनें निरस्त रहेंगी। इससे मुम्बई जाने वाले यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ेगा। कुशीनगर एक्सप्रेस को गोमतीनगर से चलाई जाएगी।

कार्य पूरा होने पर नहीं बेवजह नहीं रुकेंगी ट्रेनें : तीसरी लाइन व दोहरीकरण का कार्य पूरा होने पर सबसे अधिक राहत एक्सप्रेस ट्रेनों को होगा। अभी नकहा जंगल रूट से गुजरने वाली ट्रेनों को ट्रैक खाली नहीं मिलने पर रुकना पड़ता है, लेकिन दोहरीकरण का कार्य पूरा होने पर यात्रियों को राहत मिलेगी। थर्ड लाइन पूरा होने से गोरखपुर से आने-जाने वाली ट्रेनों को बिना रुकावट के चलाया जा सकेगा।

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यार्ड रिमाडलिंग की तैयारियों में जुटा रेलवे

पिछले साल डोमिनगढ़ से कुसम्ही तक तीसरी लाइन और गोरखपुर से नकहा जंगल तक दूसरी लाइन की कार्ययोजना को मंजूरी मिली थी। इस पर कार्य चल रहा है। अब इस परियोजना को पूरा करने के लिए सबसे बड़ा काम गोरखपुर स्टेशन के यार्ड रिमाडलिंग का है। पूर्वोत्तर रेलवे के इस सबसे बड़े यार्ड का काम शुरू करने से पहले रेलवे अपनी अन्य सभी तैयारियां पूरी करने में लगा है, जिससे कि एक बार कार्य आरंभ हो तो बीच में किसी प्रकार की बाधा न आए। करीब 21.15 किलोमीटर लंबे इस दोहरीकरण व तीसरी लाइन के लिए अंतरिम बजट में 18.10 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ था।

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