बोले उरई: बारिश में हर साल भीग रहा करोड़ों का माल
Orai News - उरई के राठ रोड स्थित गल्ला मंडी में व्यापारियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जलभराव, अन्ना जानवरों, और साफ-सफाई की कमी से व्यापारी परेशान हैं। पिछले 10-12 वर्षों से इन समस्याओं का समाधान...
उरई। उरई से करीब आधा किमी दूर राठ रोड स्थित गल्ला मंडी में मूलभूत सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। कहने को वहां पर रोज मंडी सचिव तो बैठते ही हैं। साथ ही अस्थाई तहसील भी खुल गई है। दिन भर एसडीएम और तहसीलदार यहां से गुजरते हैं। डीएम भी आते रहते हैं पर व्यापारियों की समस्याएं जहां थीं वहीं पर खड़ी हैं। बारिश में पहले भी करोड़ों का अनाज सड़ता था और आज भी सड़ रहा है। लिखने और कहने के बाद भी किसी जिम्मेदार का ध्यान यहां की समस्याओं पर नहीं जा रहा है। उरई के राठ रोड स्थित वर्षों पुरानी गल्ला मंडी के व्यापारी पिछले दस, बारह साल से जलभराव, अन्ना जानवर, कब्जे, साफ-सफाई, पीने के पानी जैसी तमाम समस्याओं से जूझ रहे हैं। जलनिकासी के कोई समुचित इंतजाम नहीं हैं। गल्ला व्यापारी प्रदीप महेश्वरी ने कहा हर साल जब भी बारिश होती है तो पूरी मंडी जलमग्न हो जाती है और एक से डेढ़ करोड़ का मटर, मसूर, लाही आदि माल भीग जाता है। समस्या से निजात दिलाने को कई बार व्यापारियों ने आवाज बुलंद की। यहां तक कार्य बहिष्कार तक किया, पर समस्या का हल आज तक नहीं निकला। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान से मंडी में समस्याओं और सुझाओं पर गल्ला व्यापारियों ने चर्चा की।
गल्ला व्यापारी शिवशंकर पाठक ने कहा कि शहर के राठ रोड पर बसी गल्ला मंडी सबसे पुरानी है। वर्ष 1975-80 के बीच मंडी की स्थापना हुई और व्यापारियों को दुकानें आवंटित की गईं। इसमें हर व्यापारी ने अलग-अलग कारोबार शुरू किया और चना, मसूर, लाही, ¸मूंगफली से लेकर मटर की खरीद फरोख्त शुरू हुई। मंडी में सबसे ज्यादा फायदा डकोर क्षेत्र के लोगों को मिला। वहीं व्यापारी संतोष गुप्ता ने कहा कि अफसरों की उपेक्षा से आज भी हालात पहले जैसे ही हैं। मंडी में सबसे बड़ी समस्या अगर कोई है तो वह जलनिकासी की है। इसकी प्रमुख वजह मंडी के बाहर बना नाला है। नाले पर कई जगह लोगों ने अतिक्रमण कर व्यापार का साधन बना लिया है। कोई बाइक एजेंसी तो किसी ने गारमेंट, किराना की दुकानें खोल ली हैं। बारिश के मौसम में हर साल करोड़ों का माल भीग जाता है।
नाला चोक होने से पानी भर जाता है। जबकि मंडी के चारों तरफ आढ़तें हैं। कई व्यापारियों के गोदाम भी हैं। इनमें लाखों रुपये का माल रखा रहता है। आम दिनों में तो सब कुछ ठीक रहता है। पर बारिश में व्यापारियों को चिंता सताने लगती है। हालांकि व्यापारियों की मांग पर पालिका नाला सफाई अभियान तो बहुत जोरशोर से चलाती है। नाले साफ भी होते हैं, पर उन्हीं जगहों पर सफाई हो पाती हैं, जो खुले हैं। बाकी जगहों पर अफसर यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि इनकी सफाई बाद में होगी। पर कभी होती नहीं है। फिर बारिश में बूंदे नहीं आफत बरसती है। कई बार तो अचानक झमाझम बारिश से गोदामों से लेकर आढ़तों में इस कदर पानी भर जाता है कि व्यापारियों को माल सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। 10-12 सालों में जब से समस्या पैदा हुई है, तब से व्यापारी धरना प्रदर्शन से लेकर ज्ञापन और आंदोलन करते रहे हैं। व्यापारियों का गुस्सा देख अफसर पहुंचते हैं। पालिका अफसरों को बुला नाराजगी जाहिर कर डपट लगाई जाती है। आदेश भी जारी किए जाते हैं, पर पालन उतना ही किया जाता है, जितनी जरूरत हो।
बोले व्यापारी
व्यापारियों के साथ दोयम दर्जे की नीति अपनाई जा रही है। मंडी के बाहर व्यापारियों से कुछ नहीं, जबकि अंदर के आढ़तियों से बराबर मंडी शुल्क वसूला जा रहा है। यह अफसरों का भेदभाव है।
-प्रदीप महेश्वरी
मंडी में सफाई व्यवस्था ध्वस्त है। पूरी मंडी में एक भी जगह डिस्टबन नहीं हैं। इससे कई जगह कचरा फैलता है और दिन भर दुर्गंध फैलने से आने-जाने वाले लोग व किसान परेशान होते हैं।
-अरविंद पटैरिया
मंडी में अन्ना जानवर बड़ी समस्या है। आढ़तों के बाहर रखा माल नजर हटते ही खा जाते हैं। गंदे जानवर तो दिन भर आढ़तियों के ईद-गिर्द मंडराते हैं। यह जानवर अनाज भी खराब करते हैं।
-उदय सिंह टिमरो
आढ़तें जीर्णशीर्ण हो गई हैं। न सिर्फ दीवारों में दरारें आ गईं, बल्कि लेंटर भी चटक गए हैं। इससे जरा सी बारिश में पानी टपकने लगता है। गोदामों में माल खराब होने का अंदेशा बना रहता है।
-रविंद्र सिंह राजपूत
मंडी में हैंडपंप तो लगे हैं पर नाम के लिए। गर्मी के दिनों में व्यापारी हो या फिर किसान, दोनों को गला तर करने के लिए जूझना पड़ता है। किसानों को पैसे खर्च कर प्यास बुझानी पड़ती है।
- देवीदीन राजपूत
मंडी की नालियों की नियमित सफाई होती ही नहीं। इससे मच्छर पनप रहे हैं। इनके हमले से किसानों के साथ व्यापारी आएदिन बीमार पड़ जाते हैं। फॉगिंग तो नाम के लिए हुई।
-शिवशंकर पाठक
मंडी में रोशनी के खास इंतजाम नहीं है। रात के वक्त जब भी व्यापारी दुकान और गोदाम चेक करने आते हैं तो उन्हें असुरक्षा महसूस होती है। अगर मंडी में हाईमास्क लाइट की व्यवस्था हो जाए तो सहूलियत होगी।
-संतोष गुप्ता
इस समय मंडी में कटखने बंदरों का आतंक है। इससे व्यापारी व किसान दोनों दहशत में हैं। कई बार वन विभाग से कहा गया, पर उन्होंने कोई सार्थक पहल नहीं की। बंदर व्यापारी और किसानों को दौड़ा लेते हैं।
-हर्ष प्रताप सिंह
मंडी के बाहर जो नाला है, वह आएदिन चोक हो जाता है। इससे जब भी थोड़ी बहुत बारिश हो जाए तो पूरे मंडी में पानी भर जाता है। इससे व्यापारियों व किसानों का माल की तुलाई आदि का काम ठप हो जाता है।
-विनोद कुमार
सुझाव
1. मंडी को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था अभी तक नहीं की गई है।
2. मंडी को जगमग करने के लिए हाईमास्क लाइटों की व्यवस्था नहीं है, इसे जल्द हर जगह लगवाया जाए।
3. अन्ना जानवरों से राहत देने के लिए मेन गेट पर कोई व्यवस्था नहीं है यहां कर्मचारी तैनात किया जाए।
4. मंडी के बाहर बने नालों से कब्जे हटवाकर उनकी विधिवत सफाई कराई जाए, जिससे जलभराव न हो।
5. मंडी के अंदर कई जगह पर सड़क खुदी पड़ी है। इसे ठीक कराकर व्यापारियों को अच्छी सुविधा दी जाए।
6. मंडी समेत अन्य जगह पर अस्थाई रूप से किसानों के रुकने की व्यवस्था नहीं है। इसे सुनिश्चित की जाए।
7. गल्ला मंडी के पीछे स्थित फल मंडी में भी अव्यवस्था का बोलबाला है, वहां की कमियों को दूर किया जाए।
शिकायतें
1. मंडी में जगह-जगह फैले कूड़े कचरे से उठने वाली दुर्गंध से आने वाले व्यापारी व किसान परेशान रहते हैं।
2. नालियों में जल जमाव होने से दिन भर मच्छर पनपते हैं। बीमारियों का खतरा रहता है, इसे साफ कराएं।
3. शौचालय में कब्जा होने से व्यापारियों को असुविधा होती है, उन्हें इसके लिए मंडी से बाहर जाना पड़ता है।
4. गल्ला मंडी में जानवरों के विचरण करने से आए दिन इनकी चपेट में आकर व्यापारी घायल हो जाते हैं।
5. अराजकतत्वों का दिन भर यहां जमावड़ा लगा रहता है, जिससे व्यापारियों में असुरक्षा का माहौल रहता है।
6. इस समय जहां तहसील खुली है, वहां किसान भवन था। इससे किसान रुकने के लिए दर-दर भटकते हैं।
7. गल्ला मंडी के पीछे फल मंडी में जो दुकानें व्यापारियों को आवंटित की गई हैं, वह टीनशेड टूटे पड़े हैं।
बोले जिम्मेदार
गल्ला मंडी में व्यापारियों की सुख सुविधाओं पर बराबर ध्यान दिया गया है। अभी हाल ही में सीसी सड़क व नालियों का निर्माण कराया गया है। इससे जलभराव की समस्या दूर होगी। अन्य समस्याएं भी जल्द दूर होंगी।
-अरविंद सिंह, मंडी सचिव
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