यज्ञ में शुद्ध वेद मंत्रों का शुद्ध उच्चारण होना चाहिए : वशिष्ठ
Muzaffar-nagar News - मोरना में हनुमद्धाम में श्री राम आध्यात्मिक प्रन्यास द्वारा श्री हनुमत जयंती महोत्सव का आयोजन किया गया। आचार्य दिवाकर वशिष्ठ ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डाला। समारोह में सवा लाख आहूतियों का प्रारंभ हुआ...

मोरना। तीर्थ नगरी शुकतीर्थ स्थित हनुमद्धाम में श्री राम आध्यात्मिक प्रन्यास के तत्वावधान में चल रही श्री हनुमत जयंती महोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार को आचार्य एवं वेदपाठियों के द्वारा यज्ञीय कर्म, देवी पूजा व श्रीरामार्चाप्रयोग पूजन किया गया। मुख्य आचार्य दिवाकर वशिष्ठ ने कहा कि यज्ञ में शुद्ध वेद मंत्रों का शुद्ध उच्चारण होना चाहिए। वैदिक ब्राहृाणों के मुख से मंत्रोचारण के साथ उच्च स्वर में जब स्वाहा बोलते हुए आहूति प्रदान की जाती है, तो ऐसा लगता है कि यज्ञ के प्रधान देवता साक्षात उपस्थित होकर आहूति स्वीकार कर रहे हैं। इस दौरान रूद्रावतार श्रीराम भक्त श्रीहनुमत महायज्ञ के तहत सवा लाख आहूति प्रदान करने का प्रारूप प्रारंभ हुआ। मुख्य यजमान आरके टंडन, जिया लाल गोयल, स्वदेश पाठक, शिव कुमार, सत्यनारायण बंसल ने महामण्डलेश्वर स्वामी केशवानन्द सरस्वती महाराज व आचार्यों का पूजन किया। वेदी पूजन आचार्य राजीव मिश्रा, देवेंद्र, आशीष, मोहित, किशन पांडेय आदि ने कराया। हनुमद्धाम के महामण्डलेश्वर स्वामी केशवानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करना आपकी स्मरण शक्ति और बुद्धि में वृद्धि करता है। इस दौरान गीता घाट के महंत स्वामी गीतानंद महाराज, आंध्रप्रदेश के कथा वाचक अनंत कृष्णमचार्य, धाम के स्वामी आनन्द स्वरूपानन्द सरस्वती व स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती आदि मौजूद रहे।
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