बोले मुरादाबाद : समान कार्य पर समान वेतन चाहते हैं शिक्षामित्र
Moradabad News - शिक्षामित्रों की कार्यभार परिषदीय स्कूलों में अत्यधिक महत्वपूर्ण है, लेकिन उन्हें उचित वेतन और सम्मान नहीं मिल रहा है। 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर काम करते हुए, शिक्षामित्र कई महत्वपूर्ण कार्यों...
शिक्षामित्रों का कार्यभार परिषदीय स्कूलों में बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उचित सम्मान और वेतन नहीं मिल पा रहा है। 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर काम करने वाले ये शिक्षामित्र न केवल बच्चों को पढ़ाते हैं, बल्कि पल्स पोलियो, जनगणना, पशु गणना, बीएलओ ड्यूटी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में जिम्मेदारी निभाते हैं। मिड-डे मील व स्कूलों के कई कामों में उनका योगदान अहम है, लेकिन इन शिक्षामित्रों की वर्षों से चली आ रही मांग यह है कि वे शिक्षक के समान वेतन और सम्मान के हकदार हैं। इन्होंने प्रदेश स्तर पर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलांद की, लेकिन इनकी मांगों पर शासन ने गौर नहीं किया। इससे इनमें असंतोष और निराशा का माहौल है। शिक्षामित्रों की नियुक्ति उपशिक्षकों के तौर पर परिषदीय स्कूलों में की गई थी। प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ करने और शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए नियुक्त किए गए ये शिक्षामित्र आज समान कार्य पर समान वेतन की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि वे शिक्षकों की तरह ही मेहनत कर रहे हैं। विद्यालयों में तैनात किए गए ये उपशिक्षक वर्षों से अपनी मांगों को लेकर इंतजार में बैठे हैं कि कभी सरकार उनके बारे में भी बेहतर सोचेगी।
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने की योजना वर्ष 2001 में बनाई गई थी। इसमें विशेष ध्यान रखा गया था कि विद्यालय जिस गांव में हो, उसी गांव का शिक्षित युवक या युवती उस विद्यालय में 11 माह के लिए नियुक्त होंगे। कुछ वर्षों बाद 2250 रुपये से बढ़ाकर इनका मानदेय 2400 रुपये भी कर दिया। 20 वर्ष बाद अब शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये मानदेय मिल रहा है। हालांकि उन्हें सिर्फ 11 माह का ही वेतन मिलता है। अपना मानदेय बढ़ाने और 12 महीने का वेतन देने को लेकर शिक्षामित्र ब्लॉक स्तर से प्रदेश स्तर तक आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अभी तक कोई ठोस विचार नहीं किया गया। इससे शिक्षामित्रों में असंतोष है। कई वर्षों से इनका मानदेय नहीं बढ़ा है, लेकिन उनकी उम्र बढ़ रही है। शिक्षामित्रों ने बताया कि उम्र के साथ ही घर की जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं। अन्य राज्यों में शिक्षामित्रों की स्थिति उत्तर प्रदेश की अपेक्षा बेहतर है। यहां के शिक्षामित्र अपने दिन बहुरने का इंतजार कर रहे हैं।
काम के बोझ तले दब रहे शिक्षामित्र
शिक्षामित्रों का कार्यभार अत्यधिक बढ़ चुका है। वे काम के बोझ तले दबे हुए हैं। वर्षों से परिषदीय स्कूलों में कार्य कर रहे ये शिक्षामित्र स्कूल का ताला खोलने से लेकर उसे बंद करने तक की जिम्मेदारी निभाते हैं। स्कूल को निपुण बनाने की अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी उनके कंधों पर होती हैं। अधिकांश शिक्षामित्रों ने टीईटी पास किया हुआ है, जो उनके योग्य होने का प्रमाण है, फिर भी उन्हें शिक्षक की तरह मान्यता और सम्मान नहीं मिल रहा है।
मानदेय बढ़ने की आस लगा रहे शिक्षामित्र
शिक्षामित्रों की मुख्य मांग यह है कि वे लंबे समय से एक ही मानदेय पर काम कर रहे हैं और इसमें वृद्धि अब तक नहीं की गई है। हालांकि, हाल ही में मानदेय बढ़ाने की घोषणा की गई है, लेकिन इसकी शुरुआत कब होगी, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष पंकज शर्मा का कहना है कि सरकार हर साल शिक्षकों का वेतन बढ़ाती है, लेकिन शिक्षामित्रों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उनका सुझाव है कि सरकार को हर साल उनके मानदेय में वृद्धि करनी चाहिए, ताकि उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके।
शिक्षामित्रों को मिले पेंशन, मृतक आश्रित को नौकरी
शिक्षामित्रों का दर्द और भी गहरा है, क्योंकि वे स्कूलों में बेहतर शिक्षा देने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन उनके भविष्य के बारे में सरकार को कोई चिंता नहीं है। इन शिक्षामित्रों के लिए पेंशन और भविष्य की सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है। वे चाहते हैं कि उन्हें ईपीएफ या पेंशन योजना का लाभ दिया जाए, ताकि वे अपनी वृद्धावस्था में आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस कर सकें। उनके लिए यह सिर्फ एक वेतन वृद्धि की मांग नहीं, बल्कि अपने जीवन को सुरक्षित बनाने की आवश्यकता भी है।
शिकायत
1. स्थानांतरण के लिए जारी शासनादेश में काफी विसंगतियां हैं।
2. शिक्षामित्रों को वर्ष में मात्र 11 आकस्मिक अवकाश मिलते हैं।
3. शिक्षामित्रों का मानदेय हर माह विलंब से पहुंचता है, इससे परेशानी बढ़ती है।
4. कार्य न होने पर सबसे पहला उन्हीं का मानदेय रोक दिया जाता है।
5. कई जगहों पर शिक्षामित्रों को स्कूल के प्रधानाचार्य व शिक्षक परेशान करते हैं।
सुझाव
1. शिक्षामित्रों को समान कार्य पर समान वेतन दिया जाना चाहिए।
2. शिक्षामित्रों से पढ़ाने के अलावा कोई अन्य कार्य नहीं कराया जाए।
3. शिक्षामित्रों को शिक्षकों की तरह सभी सुविधाएं मिलें।
4. शिक्षामित्रों को मेडिकल की सुविधा मिलनी चाहिए, जिससे उनका बेहतर इलाज हो सके।
5. शिक्षामित्रों की मानदेय बढ़ाई जाए, साथ ही उनके मृतक आश्रितों को नियुक्ति दी जाए।
ये बोले शिक्षामित्र
शिक्षामित्रों को जो भी कार्य दिया जाता है, उसे वे पूरी जिम्मेदारी से निभाते हैं। सरकार शिक्षामित्रों पर ध्यान नहीं दे रही है। उनके जीवन में सुधार के लिए प्रयास करने होंगे।
-पंकज शर्मा, जिलाध्यक्ष, उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ
वर्ष में जितने अवकाश सहायक अध्यापकों को मिलते हैं, उतने ही शिक्षामित्रों को भी देने चाहिए। शिक्षामित्रों के स्थानांतरण के लिए जारी शासनादेश में तमाम विसंगतियां हैं। उन्हें दूर किया जाए।
-खेमपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन
शिक्षकों को जो सुविधाएं दी जा रहीं हैं, वे ही शिक्षामित्रों को भी मिलना चाहिए। हमारे साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। हमारा सम्मान बढ़ेगा तो शिक्षा में सुधार होगा।
भीम सिंह, जिला महामंत्री, आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर सोसाइटी
सरकार ने शिक्षामित्रों के लिए ट्रांसफर नीति लागू की है, लेकिन उसका लाभ मिल ही नहीं पा रहा है। शिक्षामित्रों को घर के पास ही काम करने की समस्या बनी ही हुई है।
राजीव चौधरी, जिला कोषाध्यक्ष, उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ
शिक्षामित्रों के भविष्य को लेकर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। उन्हें ईपीएफ का लाभ दिया जाना चाहिए। वे शिक्षकों की बराबर ही काम करते हैं। उन्हें भी सम्मान मिलना चाहिए।
सत्यपाल सिंह, मूंढापांडे
शिक्षकों को जितने अवकाश दिए जाते हैं, उतने ही शिक्षामित्रों को भी मिलने चाहिए। उनके ही तरह शिक्षामित्रों को सभी आवश्यक सुविधाएं भी देनी चाहिए, जिससे उन्हें परेशानी न हो।
हरपाल सिंह, छजलैट
महिला शिक्षामित्रों को उनके ससुराल या नजदीक के गांव में ट्रांसफर की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाना चाहिए। इससे उन्हें सहूलियत मिल सकेगी। यह बहुत जरूरी है।
सुनीता देवी, छजलैट
सरकार ने मानदेय बढ़ाने की घोषणा की है, लेकिन इसका लाभ कब से मिलेगा, इसकी जानकारी नहीं है। सरकार को इस पर तुरंत ही अमल शुरू कर देना चाहिए, जिससे शिक्षामित्रों को लाभ मिल सके।
राजकुमार, मूंढापांडे
शिक्षामित्र संविदाकर्मियों की तरह काम कर रहे हैं। अपनी मांगों को बुलंद करते रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पता नहीं, हमें शिक्षक का पद कब दिया जाएगा।
भारत सिंह, भगतपुर टांडा
शिक्षामित्र बच्चों को पढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं। सरकार को सबसे पहले उनका मानदेय बढ़ाना चाहिए, जिससे शिक्षामित्रों की आर्थिक स्थिति ठीक हो सकेगी।
-संजीव सिंह, कुंदरकी
शिक्षामित्रों का मानदेय तत्काल बढ़े। उन्हें 12 महीने का मानदेय दिया जाना चाहिए, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में थोड़ा सुधार हो सकेगा।
--रामेंद्र सिंह, मुरादाबाद ब्लॉक
सरकार ने जो घोषणा मानदेय बढ़ाने के संबंध में की है, उस पर तत्काल अमल शुरू किया जाना चाहिए जिससे शिक्षामित्रों को लाभ मिलना शुरू हो सके।
-आशीष कुमार सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षामित्र संघ, मूंढापांडे
शिक्षामित्रों के बच्चे अपने माता-पिता को शिक्षामित्र बताते से हिचकते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
-सत्यवीर सिंह, शिक्षामित्र, छजलैट
शिक्षामित्रों के भविष्य का ध्यान रखते हुए उन्हें ईपीएफ का भी लाभ दिया जाना बेहद जरूरी है। कम से कम इससे कुछ तो भविष्य सुरक्षित हो सकेगा।
-सुभाष कुमार, शिक्षामित्र व ब्लॉक प्रभारी
संविदा कर्मियों की तरह काम कर रहे हैं। हम लगातार अपनी मांग उठा रहे हैं मगर कोई सुनवाई नहीं है। जाने कब वह दिन आएगा जब हम खुद को गर्व के साथ शिक्षक कह सकेंगे।
-प्रवीण चौधरी, शिक्षामित्र, डिलारी
कम से कम हर महीने मानदेय तो समय पर मिलना चाहिए। अधिकारी तो मोटी तनख्वाह पाते हैं, लेकिन हमारे दस हजार रुपये देने में वह देर करते हैं।
अनिल सिंह, मूंढापांडे
हम सभी बहुत ही लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। हमें योग्यता और अनुभव के आधार पर सहायक अध्यापक पद पर समायोजित कर देना चाहिए।
मिंटू सिंह, शिक्षामित्र डिलारी
स्थानांतरण के लिए जारी किए गए शासनादेश में काफी विसंगतियां हैं। उन्हें दुरुस्त कर शिक्षामित्रों को इसका लाभ दिया जाए। मानदेय नहीं बढ़ रहा तो कम से कम सहूलियत मिले।
मोहित तोमर, कुंदरकी
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