भोजपुरी कवि सम्मेलन में कवियों ने किया काव्यपाठ
Mau News - मऊ में देवश्री न्यास के तहत डीसीएसके पीजी कॉलेज में अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य संगम का आयोजन हुआ। प्रो. वशिष्ठ अनूप की अध्यक्षता में कवियों ने भोजपुरी भाषा का गुणगान किया। विभिन्न कवियों ने अपनी...
मऊ। देवश्री न्यास के तत्वावधान में गुरुवार शाम डीसीएसके पीजी कॉलेज में अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य संगम कार्यक्रम के अन्तर्गत भोजपुरी कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। बीएचयू के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ अनूप की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में भोजपुरी भाषा का बखान किया गया। साथ ही कवियों ने भोजपुरी में अपनी प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही लूटी। काव्यपाठ की शुरुआत बालचंद त्रिपाठी ने सरस्वती वंदना से किया। युवा कवि सुशांत शर्मा ‘हम ना मानब की राघव त्यगलें सिया का पाठ करके प्रभु श्रीराम के लगे आरोपों को खारिज किया। हास्य-व्यंग्य के कवि मुन्ना मवाली ने ‘मलकिन लड़हीं बीडीसी, हम लड़़ब परधानी पढ़कर आज के राजनीति की विद्रूपता का चित्रण किया। विभा सिंह ने पढ़ा कि ‘जग में प्यार के रंग से बचा कौन है। शायर और गीतकार भालचंद त्रिपाठी ने अचके में खुल गईली निनिया हो राम, का पाठ किया। देवरिया से पधारे बादशाह प्रेमी ने हास्य-व्यंग्य बहुत कविताएं सुनाई। प्रो. वशिष्ठ अनूप, प्रो. प्रकाश उदय, रश्मि शाक्य ने भी काव्य-पाठ किया। हिन्दुस्तानी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. उदयप्रताप सिंह ने बताया कि हमें अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए। भोजपुरी हमारी मातृभाषा है, पर गुलामी के कारण और अंग्रेजियत के कारण हम अपनी भाषा बोलने में शर्म करते हैं। भोजपुरी भाषा-भाषी क्षेत्र के लोग यदि इसका प्रयोग अपने परिवार में नहीं करेंगे तो भोजपुरी संविधान की आठवीं अनुसूची में कभी नहीं आ पाएगी। विशिष्ट अतिथि डा. ब्रजभूषण मिश्र ने कहा कि भोजपुरी एक सामर्थ्यवान बोली है। भोजपुरी के बोलने वाले की संख्या 25 करोड़ से अधिक है। भोजपुरी कवि सम्मेलन का संचालन मिथिलेश गहमरी और धन्यवाद ज्ञानप डॉ. रामनिवास राय ने किया। इस मौके पर डॉ. जयकांत सिंह, पं. दयाशंकर तिवारी, डॉ. कमलेश राय, आनंद प्रताप सिंह, सचिन्द्र सिंह, देवभास्कर तिवारी, डॉ. शाश्वत पाण्डेय, डॉ. सीपी राय, डॉ. विशाल जायसवाल, सुमित उपाध्याय, डॉ. धनंजय शर्मा, जयनारायण द्विवेदी सहित सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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