पशुओं को लू व हीटवेब से बचाने को जारी हुआ टोल फ्री नंबर
Kushinagar News - कुशीनगर में पशुपालकों को लू और हीटवेव से अपने मवेशियों की सुरक्षा के लिए टोल फ्री नंबर 1800-180-1962 जारी किया गया है। जिला मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. रवींद्र कुमार ने बताया कि नोडल अधिकारी की...

कुशीनगर। पशुपालक को अपने मवेशियों को लू व हीटवेव से बचाने के लिए पशुपालन विभाग ने पशुपालक भाई टोल फ्री नंबर 1800-180-1962 जारी किया है। इसके माध्यम से पशु संबंधित आकस्मिक सेवाओं का लाभ पशुपालक ले सकेंगे। इसके अलावा जिले स्तर पर नोडल अधिकारी को नामित किया गया है। जिला मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. रवींद्र कुमार ने बताया कि कुशीनगर में माह अप्रैल, मई व जून में गर्म हवायें एवं लू का प्रकोप होता है, जिससे तापमान काफी बढ़ जाता है। ऐसी अवस्था में लू, हीटस्ट्रोक व हीटवेव के प्रभाव से बचने के लिए कुशीनगर के पशुपालकों को पशुओं में उचित प्रबन्धन करना अति आवश्यक होता है। इसके मद्देनजर पशुपालकों को पशुओं को छाया में रखने, शेड में टाट, बोरा, त्रिपाल से ढक के रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इस मौसम में एमपी चरी ज्वार में हाइड्रोसाइनिक एसिड की विषाक्ता की वजह से पशुओं की असामयिक मृत्य हो जाती है। लू व हीटवेव से बढ़ी संख्या में पशुधन प्रभावित होते है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है।
नोडल अधिकारी नामित
जिला पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि जनपद स्तर पर डा. विद्याराम वर्मा उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पडरौना को जनपदीय नोडल अधिकारी नामित किया गया है, जिनका मोनं 9450556594 है। लू प्रकोप व आपदा नियंत्रण के लिए पशुचिकित्सालय सदर पर एक आपदा नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जिसके प्रभारी अशोक प्रसाद वेटनरी फार्मासिस्ट पशुचिकित्सालय सदर पडरौना मोनं-9140236432, टेलिफोन नं-05564-242008 है। पशुपालक कभी भी इन नंबरों पर फोन कर सकता है। इसके अलावा आकस्मिक पशुचिकित्सा सेवायें एवं लू व हीटवेव आपदा में त्वरित पशुओं के उपचार के लिए जनपद कुशीनगर में एमवीयू(मोबाईल वेटनरी यूनिट) 1962 संचालित है। पशुपालक एमवीयू (मोबाईल वेटनरी यूनिट) 1962 व टोल फ्री नंबर 1800-180-1962 पर फोन कर लाभ ले सकते हैं। पशु के मृत्यु होने पर पशुपालक द्वारा दी गयी सूचना पर पशुपालन विभाग के कर्मियों व राजस्व विभाग के कर्मियों के सहयोग से सूचनायें व मृत्यु प्रमाण-पत्र जिला प्रशासन को भेजी जायेगी। इससे पशु स्वामी को पशुहानि की क्षतिपूर्ति किया जाना सम्भव हो सकें।
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