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बोले कानपुर : सबका सफर बनाते हैंआसान पर अपनी गाड़ी खा रही हिचकोले

Kanpur News - यूपी रोडवेज के चुन्नीगंज डिपो में ढांचे की कमी और कर्मचारियों की समस्याओं के बावजूद, वे रोजाना 50,000 यात्रियों को सुरक्षित यात्रा कराते हैं। कर्मचारियों को उचित सुविधाएं और वेतन नहीं मिल रहा है,...

Newswrap हिन्दुस्तान, कानपुरFri, 28 Feb 2025 07:21 PM
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बोले कानपुर :  सबका सफर बनाते हैंआसान पर अपनी गाड़ी खा रही हिचकोले

यूपी रोडवेज के चुन्नीगंज डिपो का ढांचा चरमरा चुका है। रोडवेज स्टाफ के लिए स्वच्छ टॉयलेट नहीं हैं। अगर रात में कोई घटना हो जाए तो स्टाफ को चिकित्सा सुविधा तक नहीं मिलती। इसके बावजूद समस्याओं से जूझते हुए रोडवेजकर्मी रोजाना करीब 50 हजार यात्रियों को सुरक्षित सफर कराते हैं। चुन्नीगंज डिपो के कर्मचारियों ने बताया कि हम मुसाफिरों की सुविधाओं का ख्याल रखते हैं, पर हमारी सुनने वाला कोई नहीं है। राज्य कर्मचारियों का दर्जा न मिलने से इस विभाग के कर्मचारी बोनस से भी वंचित हैं। रिटायरमेंट के बाद पेंशन भी समय से नहीं मिलती। करीब 50 लाख आबादी वाले कानपुर महानगर के लोगों को शहर से दूसरे शहर तक सुरक्षित ले जाने वाले यूपी रोडवेज के चुन्नीगंज बस डिपो के कर्मचारी खुद कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। बस चालक राजेश कुमार कहते हैं कि बाहर से बस लाने के बाद जब टॉयलेट जाते हैं तो वहां की गंदगी देख लौट आते हैं। बारिश में जलभराव के बीच बड़ी मुश्किल से निकल पाते हैं। चालक फहीमुद्दीन का कहना है कि पूरी नौकरी करने के बाद जब कोई रिटायर होता है तो उसको पेंशन के नाम प्रति माह 2800 से 3400 रुपये दिए जाते हैं पर वह समय से नहीं मिलते। चालक हरिशंकर कहते हैं कि हम लोग यात्रियों को कोई परेशानी न हो इसका ध्यान रखते हैं, पर हमारी जायज मांगों को कोई सुनने वाला भी नहीं है। हमें राज्य कर्मचारियों का दर्जा भी नहीं मिला है।

चुन्नीगंज डिपो में ही बातचीत के दौरान रोडवेज कर्मचारी राजेंद्र पाल ने बताया, शहर के भीतर का यह बस अड्डा झकरकटी से अधिक डेवलप हो सकता है पर यहां सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम तक नहीं है। रात के समय न तो समुचित बिजली की व्यवस्था भी नहीं है। कर्मचारी दिनेश यादव ने बताया, रोडवेज कर्मचारी हर विषम परिस्थिति में काम करते हुए मुसाफिरों को गंतव्य तक पहुंचाते हैं फिर प्रबंधन परिचालन और रोडवेज कर्मचारियों की मूलभूत समस्याओं तक को दूर नहीं करता है। यह बात नहीं है कि इन चीजों को तय प्लेटफार्म पर न रखा गया हो। यूनियन के जरिए भी बात प्रबंधन तक पहुंचाई जाती है फिर भी कर्मचारी समस्याओं से रोजाना दो-चार होते रहते हैं। यूपी रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष अरविंद कुरील के चेहरे पर भी बातचीत के दौरान समस्याओं का दर्द झलका। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान कराने का खाका तैयार है। अभी महाकुंभ का पर्व है। कोरोना काल की तरह ही रोडवेज का हर कर्मचारी अपनी निष्ठा और मेहनत से महाकुम्भ के श्रद्धालुओं को प्रयागराज तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए कृतसंकल्प है। सालों से चली आ रही समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता है। उम्मीद है कि दिक्कतों को समाधान होगा।

निजी बसों से चौगुना यात्री कर देता रोडवेज : रोडवेज की बसों में यात्री कर 600 रुपये प्रति सीट के हिसाब से लिया जाता है। वहीं अनुबंधित बसों से 450 रुपये प्रति सीट के हिसाब से यात्रीकर लिया जाता है। इसके अलावा निजी बसों से तो सिर्फ 150 रुपये प्रति सीट के हिसाब से लिया जाता है। एक तरह से प्रदेश सरकार बेजा तरीके से रोडवेज से यात्रीकर वसूलती है। इस वजह से प्रबंधन पर अतिरिक्त कर का बोझ पड़ता है। रोडवेज भी बसों का संचालन कर सवारियां ढोता है तो रोडवेज से भी 150 रुपये प्रति सवारी के हिसाब से यात्री कर लिया जाए।

परिवार नियोजन भत्ता, बोनस लाभ नहीं : रोडवेज कर्मचारी सरकार और जनमानस के प्राथमिकता वाले हर काम को सेवा मानकर करता है। चाहे वह कोरोना काल का दौर रहा हो या फिर महाकुम्भ पर्व। इसके बावजूद उन्हें परिवार नियोजन भत्ता (दो बच्चे) और नगर प्रतिकर भत्ता नहीं मिलता है। राज्य कर्मचारियों का दर्जा न होने से कर्मचारी बोनस से भी वंचित रहते हैं। यूपीएसआरटीसी के बनने के समय तय हुआ था कि रोडवेज स्टाफ को भी राज्य कर्मचारी को देय सुविधाओं का लाभ मिलेगा। राज्य कर्मचारियों को ये सभी भत्ते मिलते हैं।

कार्यशालाओं में 22 साल से भर्तियां नहीं : रोडवेज की कार्यशालाओं में तकनीकी और गैर तकनीकी कर्मचारियों की वर्ष 2003 के बाद नियमित भर्ती नहीं हुई है। यह दीगर बात है कि वर्ष 2018 में बैकलॉग के तहत नौकरियां दी गईं। सेवा नियमावली के तहत बैकलॉग को भर्ती की श्रेणी में नहीं गिना जाता है। इसके पीछे का घटनाक्रम कर्मचारियों के लिए घातक है क्योंकि अब कार्यशालाओं का निजीकरण शुरू हो चुका है। सीधी नियमित भर्ती न होने से 1100 मृतक आश्रितों को विभाग में नौकरी नहीं मिल पा रही हैं, जिससे वह दर-दर ठोकरें खाने को मजबूर हैं।

बोले कर्मचारी

छठवें वेतन और सातवें वेतन का एरियल अभी तक नहीं दिया गया है। बीते कई सालों से कर्मचारियों को आश्वासन ही दिया जा रहा है। अरविंद कुरील, यूपी रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद कानपुर मंडल क्षेत्रीय अध्यक्ष

विभाग में 90 के दशक के बाद से टेक्निकल कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई है। कर्मचारियों की कमी होने के कारण एक कर्मचारी को कई लोगों को काम करना पड़ता है।

शिव कुमार

महिला चालक परिचालकों से पुरुष सवारियां अश्लील बातें करते हंै। पुलिस और अन्य विभाग के लोग भी अभद्रता करते हैं। अपने आपको को मैं असुरक्षित महसूस करती हूं।

अमिता कुमारी, महिला चालक

रोडवेज कर्मी हर मौसम में सवारियों को सुरक्षित पहुंचाते हैं। राजस्व भी बढ़ाते हंै पर सरकार हमें न न्यूनतम वेतन दे रही है और न

ही परमानेंट कर रही है।

राजेंद्र प्रसाद पाल

पुलिस प्रशासन रोडवेज के कर्मचारियों से अभद्रता करते है। डग्गामार वाहन बीच सड़क पर खड़े होकर सवारी भरते हैं, लेकिन पुलिस उनसे कुछ नहीं कहती है।

अर्जुन वर्मा

रोडवेज कर्मियों को राजकीय कर्मचारियों के बराबर सुविधा नहीं मिलती है। अन्य विभाग के कर्मचारियों को मेडिकल सुविधा उपलब्ध है, रोडवेज कर्मियों को नहीं है।

राजेश कुमार यादव

सरकार प्राइवेट बसों से प्रत्येक सवारी का डेढ़ रुपये टैक्स लेती है। जबकि रोडवेज से छह रुपये प्रति सवारी लिया जाता है। सरकार की नीतियों के कारण ही राजस्व को घाटा होता है।

गंगाराम

प्राइवेट बसों की अपेक्षा रोडवेज का टिकट महंगा है। वहीं प्राइवेट बसें रोडवेज की अपेक्षा सवारियों को सुविधा भी देती है। जिस कारण सवारियां कम मिलती है।

रघुराज

बोले जिम्मेदार

रोडवेज चालक-परिचालकों की समस्याओं पर प्रबंधन गंभीर रहता है। चुन्नीगंज डिपो में जलभराव और टॉयलेट की समस्याएं हल भी कराई जाती हैं। ड्रेनेज सिस्टम सही कराने के लिए जलकल विभाग से पत्राचार किया जाता है। चालक ट्रैफिक का नियमों का पालन करके संचालन करें तो चालान की कार्रवाई को बंद कराने के लिए पैरोकारी भी करेंगे।

- अनिल कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज कानपुर रीजन

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