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बोले कानपुर : हमारी कॉलोनियों की हर सहूलियत हुई बेपटरी

Kanpur News - कानपुर सेंट्रल रेलवे कर्मचारियों की समस्याओं की एक लंबी सूची है। कर्मचारियों के लिए सुविधाओं की कमी, खाली पदों की संख्या, और महिलाओं के लिए टॉयलेट की अनुपस्थिति प्रमुख मुद्दे हैं। कर्मचारियों का कहना...

Newswrap हिन्दुस्तान, कानपुरFri, 28 Feb 2025 07:37 PM
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बोले कानपुर : हमारी कॉलोनियों की हर सहूलियत हुई बेपटरी

देश के पांच सेंट्रल स्टेशनों में से एक है कानपुर सेंट्रल। रोजाना लगभग दो लाख यात्रियों को सफर कराने का जिम्मा यहां के करीब नौ हजार रेल कर्मचारियों पर है। शहर में इलेक्ट्रिक लोको शेड से लेकर ट्रेनिंग सेंटर,न्यू कोचिंग कांप्लेक्स, मेमो मेंटीनेंस शेड के अलावा लोडिंग-अनलोडिंग के कई मालगोदाम हैं। इनके बावजूद कर्मचारियों के लिए यहां सुविधाओं की कमी है। रेलकर्मी कहते हैं कि इन समस्याओं से राहत कब मिलेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। रेलवे की लक्ष्मणबाग कॉलोनी हो या फिर साउथ रेलवे कॉलोनी। यहां रेलवे के सैकड़ों आवास हैं। इन क्वार्टरों के बीच से निकली सड़क चलने लायक नहीं है। नालियों में सीवरेज बजबजा रहा है तो जगह-जगह गड्ढों में गंदा पानी भरा है। ये बातें कहते-कहते रेल कर्मचारी विक्रम यादव, नरेश यादव का गला रुंध सा गया। तभी बगल में खड़े अनूप यादव बोल उठे, कॉलोनी के हालत तो छोड़िए, कर्मचारियों को तो देय अवकाश भी नहीं मिल पाता है क्योंकि एक तिहाई पद खाली हैं। वर्ष 2019 के बाद से कोई भर्ती ही नहीं हुई, जो हुईं भी उनके परिणाम फंसे हैं। वहीं पर बीच में बैठे कर्मचारी महेंद्र सिंह कहने लगे कि ट्रैक और कीमैन जो औजार लेकर पैदल चलता है, उसका भार 18-20 किलो होता है। इस भार को लाद-लादकर कर्मचारी समय से पहले ही बूढ़ा हो जाता है। इलेक्ट्रिक विभाग को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और हाइड्रोलिक मशीनें दी जाएं जो सुविधाजनक के साथ ही कम मैन पावर से काम करेगा। रेल कर्मचारी प्रकाश सिंह बोले कि अनवरगंज का हेल्थ सेंटर वर्षों से फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। डॉक्टर की तैनाती ही नहीं है। कर्मचारी सत्यजीत और अनूप यादव बोले, कैरिज एंड वैंगन अनुभाग में तो हेल्परों का प्रमोशन 12 साल से नहीं हुआ। यह समस्या डीजल शेड में भी है। सीवर और टूटी सड़कों की समस्या तो सभी कॉलोनियों की है। एनसीआरएमयू के विक्रम यादव ने समस्याओं के साथ ही कहा कि मंडल रेल प्रबंधक हिमांशु बड़ोनी के कार्यकाल में कल्याणकारी योजनाएं और सुविधाएं तो शुरू हुईं पर अभी भी स्थानीय स्तर पर कई समस्याओं से यहां के कर्मचारियों को जूझना पड़ रहा है। इन समस्याओं का समाधान हो जाए तो रेल कर्मचारी तनाव मुक्त होकर ड्यूटी करेगा तो परिणाम भी आएंगे। यात्री सुविधाओं को बेहतर करने में मदद मिलेगी।

दफ्तरों में महिलाओं के लिए टॉयलेट हो : रेलवे के कई अनुभागों के ऑफिसों में महिलाएं तो कार्यरत हैं पर वहां उनके लिए न तो टॉयलेट हैं और न ही चेजिंग रूम। इससे महिलाओं को आठ-दस घंटे की ड्यूटी करने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इस समस्या का समाधान जल्द से जल्द होना चाहिए, जिससे महिला कर्मियों को राहत मिल सके।

न्यू कानपुर स्टेशन पर रहने को क्वार्टर नहीं : सेंट्रल स्टेशन मुख्यालय से करीब 20 किमी. की दूरी पर सरसौल के पास न्यू कानपुर स्टेशन है। यहां पर रेल कर्मचारी काम करने जाते हैं। कई कर्मचारी सड़क दुर्घटना का शिकार होकर अपनी जान तक गंवा चुके हैं। न्यू कानपुर स्टेशन पर कर्मचारियों के लिए स्टाफ क्वार्टर तो बनवाएं जाएं ताकि रात में कर्मचारी वहां पर रुक सकें। स्टेशन जाने में अंडरपास से कर्मचारियों को गुजरना होता है। वहां पर न तो मार्ग प्रकाश का इंतजाम है और न ही सुरक्षा का। यहां पर सुरक्षा के लिए आरपीएफ को तो ड्यूटी लगानी चाहिए। भारतीय रेलवे के लिए यात्री और कर्मचारी सुरक्षा सर्वोपरि है।

सुझाव

1. मैन पॉवर बढ़ जाए तो कर्मचारी देय अवकाश ले सकेगा। हर अनुभाग में 20 से 30 फीसदी कर्मचारियों के पद खाली हैं।

2. फॉग सेफ्टी डिवाइस को ट्रेन इंजन में ही इनबिल्ड हो जाए तो सहायक लोको पायलट को पीठ पर लादकर नहीं जाना पड़ेगा।

3. हर दफ्तर में जहां 250 या फिर इससे अधिक कर्मचारी है तो वहां कैंटीन की सुविधा मुहैया करवाई जाए।

4. रेलवे की ब्रीथ एनालाइजर के अलावा लोको अस्पताल की रिपोर्ट में एल्कोहल की पुष्टि नहीं होती है तो उसे सशंकित नशेड़ी की सूची में न रखा जाए।

5. वरिष्ठ टीटीई जो एसी में चलता है तो उसके कोच में बिना टिकट यात्री न के बराबर मिलेंगे तो उसे लापरवाह मानकर ट्रेनों से उतारकर प्लेटफार्म पर न लगाया जाए।

6. रेल कर्मचारियों को यदि डाक्टर को दिखाना होता है तो वह क्यूआर कोड से पर्चा बनवा लेता है। इसमें यह भी व्यवस्था कर दी जाए कि जिस डॉक्टर को दिखाना है, यदि वह नहीं है तो व्हाट्सअप में पता चल जाए।

समस्याएं

1. ट्रेन को जब चालक ख़ड़ा करता है तो ब्रेक लगाता है। दोबारा ट्रेन के चलने पर प्वाइंटमैन को ब्रेक लॉगिंग खोलना चाहिए न कि लोको पायलट खोले।

2. परिचालन स्टाफ की ऐसी व्यवस्था हो, जहां से वह अपनी ड्यूटी खत्म करके 36 घंटे में वापस क्वार्टर पर आ सके। अभी 72-72 घंटे लग जाते हैं।

3. हर दफ्तर में पेयजल का समुचित इंतजाम नहीं है। इसकी माकूल व्यवस्था कराई जाए। यह मूलभूत समस्या है।

4. कॉलोनियों की गंदगी के आकलन को राजपत्रित स्तर के अधिकारी को नोडल अफसर बनाएं। इसकी रिपोर्ट पर ही जिम्मेदार सीएचआई के वेतन का भुगतान हो।

5. आकस्मिक दुर्घटना यान में जाने वाले स्टाफ के क्वार्टर एआरटी रवानगी स्थल के आसपास हो ताकि हूटर बजते ही सभी कर्मचारी आधे घंटे में पहुंच सके। अभी ऐसा नहीं है।

6. उप मंडलीय लोको अस्पताल के अलावा दूसरे हेल्थ सेंटर के पर्चे पर ही सीधे स्टाफ को दवाई लोको अस्पताल से मिल सके। वहां के डॉक्टरों को दोबारा दिखाने की बाध्यता खत्म हो।

बोले रेलवे कर्मचारी

रेलवे को कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल की सुविधा देनी चाहिए। अनूप यादव, शाखा मंत्री एनएसआरएमयू

सभी विभागों में कर्मचारियों की कमी है। रेलवे को सभी रिक्त पदों में कर्मचारियों की भर्ती करनी चाहिए। विक्रम सिंह, शाखा मंत्री जंक्शन

फॉग सेफ डिवाइस केबिन में स्थायी जगह पर होनी चाहिए। इस डिवाइस का काफी वजन होता है। महेंद्र यादव, शाखा मंत्री

ज्यादातर विभागों में चेजिंग रूम और टॉयलेट नहीं है। जिस कारण महिला कर्मचारियों को परेशानी होती है।

सुनील यादव

ट्रेन चालकों का मशीन के साथ मैनुअल एल्कोहल टेस्ट होना चाहिए। ऐसे में चालक भी सुरक्षित रहेंगे। अजीत कुमार यादव, शाखा अध्यक्ष इंजी.

रेलवे कॉलोनियों की समय से मरम्मत नहीं होती है। 50 प्रतिशत कर्मचारी बाहर रहने के लिए मजबूर है। महेश यादव, ओबीसी शाखा सचिव

रेलवे कॉलोनियों की मरम्मत समय से नहीं होती है। जिसका खमियाजा कर्मचारियों को होता है। महेंद्र सिंह, शाखा मंत्री इंजीनियर विभाग

कर्मचारियों को घटिया क्वालिटी के शूज और सेफ्टी जाकेट दी जाती है। इससे कर्मियों को क्षति पहुंचती है।

विकास गुप्ता

रेलवे के ज्यादातर हेल्थ यूनिट में डॉक्टरों की कमी है। कई हेल्थ यूनिट बिना डाक्टर के चल रहे है।

प्रकाश सिंह

बोले जिम्मेदार

रेलवे यात्रियों के साथ अपने कर्मचारियों की सुविधाओं पर पूरा ध्यान रखता है। इसके बावजूद किसी टॉयलेट में दरवाजा नहीं है तो उसे लगवाएंगे। सीवर चोक और टूटी सड़कों के मामले संज्ञान में आए हैं, इनको भी हल कराया जाएगा। रेल कर्मचारी जब आराम से परिवार के साथ रहेगा तो वह तनावमुक्त ट्रेन संचालन का काम करेगा तभी तो ट्रेन संचालन समय पर होगा। शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ,एनसीआर

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